स्वाद और मुनाफे का मेल: किसानों के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रहा थाईलैंड का कागजी नींबू बिहार 3 महीने पहले 42
थाईलैंड की 'कागजी थाई नींबू' किस्म रोपण के सिर्फ छह महीने बाद फल देने लगती है और शुरुआती चरण में ही एक पौधे से 200 से 250 तक नींबू मिल सकते हैं, जिससे कृषि विशेषज्ञ इसे कम लागत में बेहतर कमाई का सौदा बता रहे हैं।

आधुनिक खेती के इस दौर में किसानों का रुझान अब उन फसलों की ओर बढ़ रहा है, जो कम समय में ज्यादा पैदावार और बेहतर मुनाफा दे सकें। इसी सिलसिले में थाईलैंड की एक खास किस्म 'कागजी थाई नींबू' किसानों के बीच तेजी से अपनी जगह बना रही है। इस नींबू की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसका पौधा रोपाई के महज छह महीने बाद ही फल देना शुरू कर देता है।

परंपरागत नींबू की तुलना में इसका उत्पादन चक्र बहुत छोटा होता है, जिसके चलते किसानों को कम अवधि में ही अपनी लागत वसूलने और लाभ कमाने का मौका मिल जाता है। शुरुआती अवस्था में ही एक पौधे से 200 से 250 तक नींबू हासिल हो सकते हैं, जो इसकी अच्छी उत्पादन क्षमता को दर्शाता है।

पल्प से भरपूर, अचार के लिए बेहतरीन

स्वाद और उपयोगिता के लिहाज से भी कागजी थाई नींबू को बेहद खास माना जाता है। आम नींबू के मुकाबले इसमें रस की मात्रा थोड़ी कम रहती है, लेकिन इसका गूदा यानी पल्प कहीं अधिक और गाढ़ा होता है। पल्प की इसी अधिकता के कारण इसे 'निमकी अचार' बनाने के लिए सबसे उत्तम और बेहतरीन किस्म माना गया है।

इसके साथ ही इस नींबू में एक विशिष्ट और बेहद आकर्षक खुशबू भी पाई जाती है, जो इसकी मांग को और बढ़ा देती है।

सेहत के लिहाज से भी फायदेमंद

यह नींबू स्वास्थ्य की दृष्टि से भी लाभकारी बताया जाता है। पाचन तंत्र को दुरुस्त रखने और पेट से जुड़ी समस्याओं में इसका इस्तेमाल फायदेमंद माना जाता है।

भारतीय परिस्थितियों के लिए अनुकूल

अक्सर किसानों के मन में विदेशी किस्मों की खेती को लेकर यह संदेह बना रहता है कि वे स्थानीय जलवायु और मिट्टी में सफल हो पाएंगी या नहीं। लेकिन किसानों के अनुभव बताते हैं कि थाईलैंड की यह किस्म भारतीय हालात के लिए पूरी तरह उपयुक्त है।

पूसा कृषि अनुसंधान केंद्र से मिलने वाला यह पौधा देश की मिट्टी और मौसम में बखूबी विकसित होता है। इसे किसी विशेष या बेहद खर्चीली देखभाल की भी जरूरत नहीं पड़ती। सही देखरेख मिलने पर पौधा तेजी से बढ़ता है और जल्दी ही फल देने लगता है।

कमाई का बेहतर विकल्प

फिलहाल देश में इस किस्म की खेती सीमित स्तर पर ही हो रही है। बाजार में इसकी मांग लगातार बढ़ रही है, जबकि आपूर्ति अपेक्षाकृत कम बनी हुई है। ऐसे में यदि किसान व्यावसायिक स्तर पर इसकी खेती शुरू करें, तो उन्हें अच्छा मुनाफा मिल सकता है।

कम समय में पैदावार, अधिक फल और बाजार में अच्छी मांग के चलते यह खेती किसानों के लिए आमदनी बढ़ाने का एक बेहतर जरिया बन सकती है। कृषि विशेषज्ञों का भी मानना है कि कम लागत और अधिक उत्पादन वाली यह फसल किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत करने में अहम भूमिका निभा सकती है।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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