गुजरात
एक घंटा पहले
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केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी प्रधानमंत्री स्वनिधि योजना (पीएम स्वनिधि) के छह वर्ष पूरे होने पर इसके लाभार्थियों की सफलता की कहानियां सामने आ रही हैं। गांधीनगर के युवा कारोबारी योगराज माली की कहानी इस बात की मिसाल है कि किस तरह इस योजना ने छोटे व्यापारियों के जीवन में बदलाव लाने का काम किया है।
छोटे कारोबार से शुरू हुआ सफर
बी.कॉम के छात्र योगराज माली गुजरात के पारंपरिक नमकीन स्नैक चोराफली बेचने का छोटा व्यवसाय चलाते हैं। आर्थिक चुनौतियों और सीमित आय के बीच अपने काम को आगे बढ़ाना उनके लिए आसान नहीं था। लेकिन पीएम स्वनिधि योजना से मिली वित्तीय मदद ने उनके जीवन और कारोबार दोनों को नई दिशा दे दी।
समाचार एजेंसी आईएएनएस से बातचीत में योगराज ने बताया कि महामारी के दौर में उन्हें कई मुश्किलों का सामना करना पड़ा था और उस समय कोई भी आसानी से कर्ज देने को तैयार नहीं था। ऐसे कठिन समय में सरकार की इस योजना ने उनका साथ दिया।
10 हजार से 50 हजार तक मिला लोन
योगराज के मुताबिक, योजना के तहत शुरुआती चरण में उन्हें 10 हजार रुपए का ऋण मिला। समय पर कर्ज चुकाने के बाद उन्हें 20 हजार रुपए और फिर 50 हजार रुपए का ऋण दिया गया। इस पूंजी की मदद से उन्होंने अपने काम का विस्तार किया और आर्थिक रूप से मजबूत बनने की दिशा में कदम बढ़ाया।
कोविड-19 महामारी के दौरान जब छोटे दुकानदारों के सामने गंभीर आर्थिक संकट खड़ा हो गया था, तब यह योजना उनके लिए राहत का बड़ा जरिया साबित हुई।
सात से आठ लोगों को मिला सहारा
योगराज ने कहा कि योजना से मिली मदद के कारण उनका रोजगार बढ़ा है और आय में सुधार आया है। इतना ही नहीं, उनके साथ काम करने वाले सात से आठ लोगों की आजीविका को भी इससे सहारा मिला है।
डिजिटल भुगतान को अपनाया
अपने कारोबार को आधुनिक बनाने के लिए योगराज ने डिजिटल भुगतान प्रणाली भी अपनाई। उन्होंने जीपे और पेटीएम जैसी डिजिटल सेवाओं का इस्तेमाल शुरू किया, जिससे ग्राहकों को भुगतान में सुविधा मिली। डिजिटल लेनदेन के चलते उनका कारोबार अधिक पारदर्शी और व्यवस्थित हुआ और साथ ही कैशबैक जैसे अतिरिक्त फायदे भी मिले।
अन्य लाभार्थियों की जुबानी
लाभार्थी मनोहर कुमार शाह ने आईएएनएस से बातचीत में कहा कि इस योजना से लोगों को काफी फायदा मिल रहा है। उन्होंने बताया कि रोजगार के लिए पैसे की जरूरत थी और प्रधानमंत्री स्वनिधि योजना से पैसा मिलते ही उन्होंने अपना काम शुरू कर दिया।
वहीं, लाभार्थी विष्णु शाह ने बताया कि उन्होंने एक साल पहले पैसा लेकर अपना काम शुरू किया था, जिससे उन्हें काफी फायदा हुआ है। उन्होंने कहा कि पहले उनके पास बिल्कुल पैसा नहीं था, लेकिन योजना से मदद मिलने के बाद बड़ा बदलाव आया है। जरूरत पड़ने पर वे दोबारा ऋण भी ले सकते हैं।
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