केरल में 'इस्लामिक-फ्रेंडली' जिम के विज्ञापन से छिड़ा विवाद, मालिक को देनी पड़ी सफाई भारत 3 महीने पहले 46
केरल के पाल्लक्काड़ जिले में एक फिटनेस सेंटर के मालिक ने अपने जिम को 'इस्लामिक-फ्रेंडली' बताते हुए वीडियो जारी किया, जिस पर तीखी बहस छिड़ गई। आलोचना के बाद मालिक ने वीडियो हटाकर सफाई दी कि जिम सभी धर्मों के लोगों के लिए खुला है।

केरल के पाल्लक्काड़ जिले के पुदुनगरम स्थित एक फिटनेस सेंटर के मालिक की ओर से जारी एक प्रचार वीडियो ने बड़ा विवाद खड़ा कर दिया है। इस वीडियो में जिम के मालिक नवाज मुथु टी ने अपने सेंटर को "इस्लामिक-फ्रेंडली जिम" बताते हुए कहा कि यहां तेज संगीत नहीं बजाया जाएगा और पुरुषों तथा महिलाओं के लिए वर्कआउट का समय और स्थान अलग-अलग रखा जाएगा। उन्होंने यह भी जोड़ा कि दोनों के लिए अलग-अलग ट्रेनर की व्यवस्था होगी।

मालिक ने वीडियो में क्या कहा

नवाज ने अपने वीडियो में स्पष्ट किया कि यह कोई बिल्कुल नया कारोबार नहीं है, बल्कि करीब 15 साल से चल रहे फिटनेस सेंटर का नवीनीकरण किया गया है। उन्होंने कहा, "हम एक ऐसा जिम शुरू कर रहे हैं जो इस्लाम के अनुरूप है और मेरा मानना है कि केरल में इस तरह का यह पहला जिम होगा।"

वीडियो वायरल होते ही आलोचना

यह वीडियो सार्वजनिक होते ही कई सोशल मीडिया उपयोगकर्ताओं और आम नागरिकों ने इस पहल पर सवाल उठाने शुरू कर दिए। लोगों ने पूछा कि क्या यह सुविधा सिर्फ मुसलमानों तक ही सीमित रहेगी। आलोचकों का तर्क था कि फिटनेस जैसी सार्वजनिक सेवाओं को धार्मिक पहचान से जोड़ने पर समाज में विभाजन बढ़ने का खतरा रहता है।

वीडियो हटाकर दी सफाई

तीखी प्रतिक्रियाओं के बाद नवाज ने अपना मूल वीडियो हटा लिया और एक नया अपडेट जारी किया। इसमें उन्होंने दोहराया कि जिम हर धर्म के लोगों के लिए खुला है और उन्होंने कभी यह नहीं कहा कि यह केवल मुसलमानों के लिए है। उन्होंने समझाया कि "इस्लामिक-फ्रेंडली" शब्द से उनका आशय कुछ संचालन संबंधी नियमों से था, न कि किसी की मौजूदगी पर रोक लगाने से। नवाज ने कहा कि कई लोग मिश्रित कसरत स्थानों और तेज संगीत के कारण असहज महसूस करते हैं, इसी वजह से अलग समय और स्थान की व्यवस्था की मांग रहती है।

सोशल मीडिया पर जारी बहस

इस पूरे मामले को लेकर स्थानीय समुदाय और सोशल मीडिया पर बहस लगातार जारी है। कुछ लोग इसे धार्मिक संवेदनशीलता का ध्यान रखते हुए सेवा देने का सकारात्मक प्रयास मान रहे हैं, जबकि अन्य का कहना है कि सार्वजनिक सुविधाओं को धार्मिक लेबल से दूर रखना चाहिए।

देवेंद्र पांडेय पाबना के राजनीतिक संवाददाता हैं और राष्ट्रीय राजनीति, सरकार तथा नीतियों पर रिपोर्टिंग करते हैं। चुनाव, संसद और बड़े सियासी घटनाक्रमों का वे गहराई से विश्लेषण करते हैं। उनकी रिपोर्टिंग निष्पक्ष और तथ्यों पर आधारित होती है।

आपकी प्रतिक्रिया?

Comments

https://pabna.in/assets/images/user-avatar-s.jpg

0 comment

Write the first comment for this!

फेसबुक वार्तालाप