राजस्थान
एक घंटा पहले
2
विचारों
राजस्थान की सियासत में लंबे समय से सक्रिय रहे नेता सतीश पूनिया को भारतीय जनता पार्टी ने राज्यसभा चुनाव 2026 के लिए अपना प्रत्याशी घोषित किया है। संगठन और चुनावी राजनीति दोनों में मजबूत पकड़ रखने वाले पूनिया का राजनीतिक सफर छात्र राजनीति से शुरू होकर प्रदेश अध्यक्ष और अब राज्यसभा उम्मीदवार बनने तक पहुंच चुका है। पार्टी के भीतर उन्हें उन नेताओं में गिना जाता है जिन्होंने संगठन को जमीनी स्तर पर खड़ा करने में अहम भूमिका निभाई।
छात्र राजनीति से हुई शुरुआत
सतीश पूनिया ने अपने राजनीतिक जीवन की नींव वर्ष 1984 में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) के साथ रखी थी। छात्र राजनीति के दौर में ही उन्होंने संगठनात्मक गतिविधियों में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेना शुरू कर दिया था। इसके बाद भाजपा के अलग-अलग संगठनात्मक पदों की जिम्मेदारी संभालते हुए उन्होंने अपनी एक खास पहचान बनाई। पार्टी के भीतर उनकी कार्यशैली और संगठन क्षमता की चर्चा लगातार होती रही है।
युवा मोर्चा से प्रदेश संगठन तक बढ़ता कद
वर्ष 1992 से 1998 तक सतीश पूनिया भाजपा युवा मोर्चा में प्रदेश महामंत्री के पद पर रहे। इसके बाद 1998 में उन्हें युवा मोर्चा का प्रदेश अध्यक्ष नियुक्त किया गया। युवा कार्यकर्ताओं के बीच उनकी मजबूत पकड़ और संगठन को विस्तार देने की क्षमता को देखते हुए पार्टी ने उन्हें लगातार नई जिम्मेदारियां सौंपीं। वर्ष 2003 में वे भाजपा के प्रदेश महामंत्री बनाए गए। इस दौरान उन्होंने संगठन को बूथ स्तर तक मजबूत करने के लिए व्यापक काम किया और पूरे प्रदेश में पार्टी के विस्तार में अहम भूमिका निभाई।
प्रदेश अध्यक्ष और विधायक की भूमिका
भाजपा नेतृत्व ने वर्ष 2019 में सतीश पूनिया को राजस्थान भाजपा का प्रदेश अध्यक्ष बनाया। उनके कार्यकाल में संगठनात्मक स्तर पर कई अभियान चलाए गए और कार्यकर्ताओं को सक्रिय करने पर खास ध्यान दिया गया। प्रदेश अध्यक्ष रहते हुए उन्होंने पूरे राज्य का सघन दौरा किया और संगठनात्मक बैठकों के जरिए पार्टी को मजबूती देने का प्रयास किया।
सतीश पूनिया 15वीं राजस्थान विधानसभा के सदस्य भी रह चुके हैं। विधायक के रूप में उन्होंने जनहित से जुड़े विभिन्न मुद्दों को सदन में उठाया और प्रदेश की राजनीति में सक्रिय भागीदारी निभाई।
अब राज्यसभा की ओर बढ़े कदम
वर्तमान में सतीश पूनिया हरियाणा भाजपा के प्रदेश प्रभारी की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। राजस्थान भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष के रूप में भी उनकी पहचान कायम है। संगठन और चुनावी प्रबंधन के लंबे अनुभव को ध्यान में रखते हुए पार्टी नेतृत्व ने उन्हें राज्यसभा चुनाव 2026 के लिए उम्मीदवार बनाया है। राजनीतिक विश्लेषक इसे संगठन में उनके लंबे योगदान और अनुभव का सम्मान मान रहे हैं।
राज्यसभा के लिए नाम तय होने के बाद पार्टी के कार्यकर्ताओं और नेताओं ने उन्हें बधाई दी है। अब उनकी निगाहें संसद के उच्च सदन में राजस्थान का प्रतिनिधित्व करने पर टिकी रहेंगी।
Comments
0 comment