कौन हैं तरुण चुघ? RSS से बीजेपी के राष्ट्रीय महासचिव तक का सफर, मध्यप्रदेश से बने राज्यसभा उम्मीदवार मध्य प्रदेश 3 महीने पहले 48
भारतीय जनता पार्टी ने मध्यप्रदेश की राज्यसभा सीटों के लिए अपने राष्ट्रीय महासचिव तरुण चुघ और रजनीश अग्रवाल को उम्मीदवार बनाया है। जानिए छात्र राजनीति से लेकर पार्टी के शीर्ष पद तक पहुंचने वाले तरुण चुघ का पूरा राजनीतिक सफर।

भारतीय जनता पार्टी ने राज्यसभा चुनाव के लिए 11 उम्मीदवारों की सूची जारी कर दी है। इसी क्रम में मध्यप्रदेश की तीन राज्यसभा सीटों पर होने वाले चुनाव को लेकर पार्टी ने तरुण चुघ और रजनीश अग्रवाल के नाम तय किए हैं। एमपी की एक सीट से अपने राष्ट्रीय महासचिव तरुण चुघ को मैदान में उतारकर भाजपा ने संगठन के एक अनुभवी और लंबे समय से सक्रिय नेता पर भरोसा जताया है।

संगठन में मजबूत पकड़ रखने वाले नेता

तरुण चुघ भाजपा के प्रमुख राष्ट्रीय नेताओं में गिने जाते हैं और पार्टी संगठन में उनकी पकड़ बेहद मजबूत मानी जाती है। वे लंबे अरसे से पंजाब की राजनीति के साथ-साथ राष्ट्रीय स्तर पर भी अहम जिम्मेदारियां संभालते आए हैं। अमृतसर से ताल्लुक रखने वाले चुघ ने अपने सार्वजनिक जीवन की शुरुआत छात्र राजनीति से की थी और भाजपा युवा मोर्चा से लेकर पार्टी के अनेक संगठनात्मक पदों पर काम किया।

फिलहाल वे भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव के तौर पर सक्रिय हैं और कई राज्यों के संगठनात्मक प्रभारी की भूमिका भी निभा चुके हैं। उम्मीदवारों के चयन को लेकर पार्टी में लगातार मंथन चल रहा था और इसी प्रक्रिया के तहत चुघ के नाम पर अंतिम मुहर लगी। उनकी उम्मीदवारी को कार्यकर्ताओं और समर्थकों के बीच एक अहम राजनीतिक संदेश के रूप में देखा जा रहा है।

9 साल की उम्र में RSS से जुड़ाव

तरुण चुघ का जन्म 3 मई 1973 को पंजाब के अमृतसर में एक मध्यमवर्गीय परिवार में हुआ था। उनके पिता का नाम श्री बनारसी दास चुघ है। प्रारंभिक शिक्षा अमृतसर में पूरी करने के बाद उन्होंने डीएवी कॉलेज, अमृतसर से एमबीए (HR) की डिग्री हासिल की।

महज 9 साल की उम्र में वे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़ गए और 1989 तक उन्होंने 'घट नायक' और 'कार्यवाह' जैसी कई जिम्मेदारियां निभाईं। छात्र जीवन में वे एबीवीपी से जुड़े और जिला सचिव तथा राज्य कार्यकारिणी सदस्य के रूप में काम किया।

1993 बना राजनीतिक करियर का अहम मोड़

साल 1993 तरुण चुघ के सार्वजनिक और राजनीतिक जीवन का बड़ा मोड़ साबित हुआ। इसी वर्ष उन्हें अमृतसर जिले के भारतीय जनता युवा मोर्चा का जिला अध्यक्ष चुना गया। यह पहला मौका था जब उन्होंने किसी संगठनात्मक पद की जिम्मेदारी पूरी तरह स्वतंत्र रूप से संभाली।

वर्ष 1992 में बाबरी विवादित ढांचा गिरने के बाद चुघ भाजपा की वरिष्ठ नेता उमा भारती के संपर्क में आए, जिसके बाद उन्होंने जिला भाजपा युवा मोर्चा के अध्यक्ष पद का दायित्व निभाया।

कब संभाली कौन सी जिम्मेदारी

  • 2020: भारतीय जनता पार्टी का राष्ट्रीय महासचिव नियुक्त किया गया
  • 2013: पंजाब भाजपा के महासचिव और भाजपा युवा मोर्चा के प्रभारी रहे
  • 2009: पंजाब यूथ डेवलपमेंट बोर्ड के उपाध्यक्ष बने
  • 2007: राज्य भाजपा प्रशिक्षण प्रकोष्ठ के आयोजक रहे
  • 2005: भाजपा के राज्य मीडिया एवं प्रशिक्षण प्रकोष्ठ में कार्य किया
  • 1997: पंजाब भाजपा युवा मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष बने
  • 1995: पंजाब भाजपा युवा मोर्चा के प्रदेश महासचिव और राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य रहे
  • 1994: अमृतसर भारतीय जनता युवा मोर्चा का जिला अध्यक्ष चुना गया
अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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