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एक घंटा पहले
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बाजार की शुरुआती चाल
वैश्विक स्तर पर मिल रहे मिले-जुले संकेतों के प्रभाव में 17 सितंबर 2026 को भारतीय शेयर बाजार की शुरुआत काफी सुस्त रही। कारोबार शुरू होते ही प्रमुख सूचकांकों के बीच उतार-चढ़ाव की स्थिति देखने को मिली। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) का सेंसेक्स जहां मामूली गिरावट के साथ लाल निशान में खुला, वहीं नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) का निफ्टी 50 सूचकांक हल्की बढ़त दर्ज करते हुए 23,200 के मनोवैज्ञानिक स्तर के ऊपर बना रहने में सफल रहा।
सुबह के शुरुआती दौर में सेंसेक्स 55.37 अंक यानी 0.07% की फिसलन के साथ 74,281.08 के स्तर पर कारोबार करता देखा गया। वहीं दूसरी तरफ, निफ्टी 7.30 अंक यानी 0.03% की मामूली तेजी के साथ 23,224.90 के स्तर पर कारोबार कर रहा था। बाजार की कुल चाल पर नजर डालें तो सेंटीमेंट सकारात्मक बना हुआ था। कुल 1,146 शेयरों में तेजी देखी गई, जबकि 1,017 शेयरों में गिरावट रही। वहीं 166 शेयरों के भाव में कोई बदलाव नहीं हुआ और वे स्थिर रहे।
टॉप गेनर्स और लूजर्स स्टॉक्स
बाजार के शुरुआती कारोबार के दौरान कुछ चुनिंदा शेयरों में निवेशकों ने काफी दिलचस्पी दिखाई।
- टॉप गेनर्स: निफ्टी पर बजाज फाइनेंस में 2.00% और श्रीराम फाइनेंस में 1.94% की बड़ी तेजी दर्ज की गई। इन शेयरों के अलावा भारत इलेक्ट्रॉनिक्स, इटर्नल, एचडीएफसी लाइफ, महिंद्रा एंड महिंद्रा, एशियन पेंट्स, रिलायंस इंडस्ट्रीज और पावर ग्रिड कॉर्प के शेयरों में भी अच्छी खरीदारी का रुझान रहा।
- टॉप लूजर्स: दूसरी ओर आईटी और बैंकिंग क्षेत्र के बड़े दिग्गजों में मुनाफावसूली का दबाव महसूस हुआ। ओएनजीसी 1.16% की गिरावट के साथ सबसे ज्यादा टूटने वाला स्टॉक रहा, जबकि एचसीएल टेक 0.92% लुढ़क गया। इसके साथ ही टेक महिंद्रा, टीसीएस, विप्रो, इंफोसिस और एचडीएफसी बैंक के शेयर भी लाल निशान में कारोबार करते दिखे।
सेक्टोरल इंडेक्स का हाल
क्षेत्रीय सूचकांकों के मोर्चे पर बात करें तो सिर्फ निफ्टी IT इंडेक्स 0.49% की गिरावट के साथ दबाव में नजर आया। इसके विपरीत बाकी सभी प्रमुख सेक्टर हरे निशान में मजबूती के साथ कारोबार करते रहे। निफ्टी पीएसयू बैंक 0.53%, निफ्टी पीएसई 0.52%, निफ्टी इंफ्रा 0.46%, निफ्टी फार्मा 0.37% और निफ्टी एनर्जी में 0.36% की तेजी के साथ खरीदारी देखने को मिली। निफ्टी बैंक भी 0.05% की बढ़त के साथ 56,318.20 के स्तर पर टिका रहा। ऑटो और कंज्यूमर ड्यूरेबल्स शेयरों में आए सुधार ने बाजार को बड़ी गिरावट से बचाने में अहम भूमिका निभाई। फिलहाल, अमेरिकी फेडरल रिजर्व के ब्याज दरों संबंधी आने वाले फैसले से पहले वैश्विक बाजार सतर्क हैं, जिसका असर भारतीय बाजार पर भी देखा जा रहा है।
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