Project Glasswing क्या है? Anthropic के नए साइबर सुरक्षा अभियान को समझें तकनीक एक घंटा पहले 2
Anthropic ने अपने साइबर सुरक्षा प्रोजेक्ट Project Glasswing का विस्तार भारत समेत 15 से अधिक देशों तक कर दिया है। इसका Claude Mythos Preview AI मॉडल सॉफ्टवेयर की गंभीर सुरक्षा खामियों को तेजी से पकड़ने में मदद करता है।

अमेरिकी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस कंपनी Anthropic ने अपने विशेष साइबर सुरक्षा कार्यक्रम Project Glasswing का दायरा और बढ़ा दिया है। अब भारत सहित 15 से अधिक देशों की चुनिंदा सरकारी और निजी संस्थाओं को इस प्रोजेक्ट तक पहुंच दी जा रही है। कंपनी का कहना है कि यह पहल दुनिया के अहम सॉफ्टवेयर सिस्टम को अधिक सुरक्षित बनाने के मकसद से तैयार की गई है।

इस प्रोजेक्ट के तहत AI की सहायता से सॉफ्टवेयर में मौजूद गंभीर सुरक्षा खामियों को बेहद तेजी से ढूंढा जा सकता है, ताकि साइबर अपराधी उनका दुरुपयोग न कर पाएं। भारत की कुछ सरकारी एजेंसियों और निजी संस्थाओं को भी Claude Mythos Preview नामक एडवांस AI मॉडल का एक्सेस दिया गया है, जिसे सॉफ्टवेयर सिस्टम की कमजोरियों की पहचान के लिए बनाया गया है।

साइबर सुरक्षा के लिए विशेष AI पहल

Anthropic ने Project Glasswing को एक सीमित और हाई-सिक्योरिटी कार्यक्रम के रूप में शुरू किया है। इसका उद्देश्य सॉफ्टवेयर इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूती देना और सुरक्षा खामियों को समय रहते दुरुस्त करना है।

Claude Mythos Preview है असली ताकत

इस प्रोजेक्ट का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा Claude Mythos Preview AI मॉडल है। कंपनी के अनुसार, यह मॉडल बड़ी मात्रा में कोड को स्कैन कर सकता है और सुरक्षा से जुड़ी कई कमजोरियों को इंसानों की तुलना में कहीं अधिक तेजी से पहचान सकता है।

दिग्गज टेक कंपनियां भी जुड़ीं

Project Glasswing में अमेज़न, ऐपल, माइक्रोसॉफ्ट, गूगल, सिस्को, क्राइडस्ट्राइक और JPMorgan Chase जैसी बड़ी कंपनियां भी शामिल हैं। ये संस्थाएं इस AI मॉडल की मदद से अपने सॉफ्टवेयर और जरूरी सिस्टम की सुरक्षा को मजबूत कर रही हैं।

10,000 से अधिक गंभीर खामियां पकड़ने का दावा

Anthropic का कहना है कि Claude Mythos Preview अब तक 10,000 से अधिक हाई और क्रिटिकल लेवल की सुरक्षा खामियों को पहचान चुका है। इनमें कुछ प्रमुख ऑपरेटिंग सिस्टम से जुड़ी कमजोरियां भी शामिल बताई गई हैं।

भारत समेत 15 से अधिक देशों में विस्तार

कंपनी ने हाल ही में घोषणा की थी कि Project Glasswing को 15 से ज्यादा देशों की करीब 150 संस्थाओं तक पहुंचाया जाएगा। इनमें भारत, ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, फ्रांस, जर्मनी और इटली जैसे देश शामिल हैं। इससे पहले अप्रैल में सिर्फ 50 संस्थाओं को ही इसका एक्सेस मिला था।

क्यों अहम है यह प्रोजेक्ट?

साइबर हमलों के बढ़ते खतरे के बीच AI आधारित सिक्योरिटी सिस्टम की मांग तेजी से बढ़ रही है, और Project Glasswing को इसी दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। इसका लक्ष्य सुरक्षा खामियों को पहले ही खोजकर ठीक करना है, ताकि जरूरी डिजिटल सिस्टम और इंफ्रास्ट्रक्चर सुरक्षित बने रहें।

हालांकि कुछ विशेषज्ञ मानते हैं कि AI की हैकिंग क्षमताओं को लेकर जताई जा रही आशंकाएं कुछ बढ़ा-चढ़ाकर पेश की जा रही हैं, फिर भी यह तकनीक साइबर सुरक्षा के क्षेत्र में बड़ा बदलाव ला सकती है।

चेतन शुक्ला (Chetan Shukla) Print & Broadcast News Agency (PABNA) में 'मुख्य संपादक' हैं। वह पत्रकारिता में 15 वर्ष से ज्यादा का अनुभव रखते हैं। ये मूल रूप से उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं। इन्हें राजनीति और आम आदमी से जुड़ी खबरें लिखना पसंद है।

आपकी प्रतिक्रिया?


आपको यह भी पसंद आ सकता हैं

Comments

https://pabna.in/assets/images/user-avatar-s.jpg

0 comment

Write the first comment for this!