जापान के संग्रहालय में सराहना, पर अपनी ही माटी पर सिसक रही दरभंगा की टेराकोटा कला जीवनशैली एक घंटा पहले 2
मिथिला की सदियों पुरानी टेराकोटा मूर्तिकला अंतरराष्ट्रीय पहचान के बावजूद घरेलू स्तर पर उपेक्षा झेल रही है। दरभंगा के करीब 400 शिल्पी परिवार आज भी आर्थिक तंगी और सरकारी सहयोग के अभाव से जूझ रहे हैं।

मिथिला की धरती पर पीढ़ियों से पनप रही टेराकोटा मूर्तिकला आज अपने अस्तित्व और पहचान को बचाए रखने की जद्दोजहद में उलझी हुई है। दरभंगा के मौलागंज और हसनचक की संकरी गलियों में जन्मी ये कलाकृतियां कभी दरभंगा राजघराने के संरक्षण में खूब फली-फूलीं, लेकिन आज इनके सामने गंभीर संकट खड़ा है।

पुश्तैनी हुनर थामे हुए हैं सैकड़ों परिवार

आज भी इस इलाके के करीब 400 परिवार अपने पुरखों से मिले हुनर के बल पर सुराही, खिलौने और तरह-तरह की मूर्तियां गढ़ रहे हैं। मिट्टी को आकार देने की यह परंपरा इन परिवारों की आजीविका का आधार बनी हुई है, मगर बदलते दौर में इसे संजोए रखना आसान नहीं रह गया।

सात समंदर पार तक फैली ख्याति

इस कला की अंतरराष्ट्रीय प्रतिष्ठा का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि यहां के नामी शिल्पी लाला पंडित की बनाई कलाकृतियां जापान के मिथिला म्यूजियम तक पहुंच चुकी हैं। इतना ही नहीं, देश के भीतर उदयपुर, मैसूर, केरल और पटना के बुद्ध स्मृति पार्क की शोभा भी इन्हीं कलाकृतियों से बढ़ रही है।

योजना में शामिल, फिर भी हालत बदहाल

विडंबना यह है कि इस अनूठी कला को एक जिला-एक उत्पाद योजना में शामिल किए जाने के बावजूद जमीनी हकीकत बेहद निराशाजनक है। शिल्पियों की आर्थिक स्थिति में कोई खास सुधार नहीं आ सका है और वे आज भी संघर्ष कर रहे हैं।

उद्घाटन से पहले ही दम तोड़ गया क्लस्टर

छह साल पहले मदारपुर में सरकारी टेराकोटा क्लस्टर बनाया गया था, लेकिन यह उद्घाटन से पहले ही बंद हो गया। आज वहां लगी मशीनें जंग खा रही हैं और पूरा परिसर उपेक्षा की कहानी कह रहा है।

संगठित बाजार और स्थायी मदद का अभाव

संगठित बाजार न मिल पाने और लगातार सरकारी सहयोग के अभाव के कारण अंतरराष्ट्रीय पहचान रखने वाले ये कलाकार आर्थिक तंगी और बेबसी की जिंदगी जीने को मजबूर हैं। अपनी कला से दुनिया को मोहने वाले ये शिल्पी आज अपने ही घर में हाशिये पर खड़े हैं।

चेतन शुक्ला (Chetan Shukla) Print & Broadcast News Agency (PABNA) में 'मुख्य संपादक' हैं। वह पत्रकारिता में 15 वर्ष से ज्यादा का अनुभव रखते हैं। ये मूल रूप से उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं। इन्हें राजनीति और आम आदमी से जुड़ी खबरें लिखना पसंद है।

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