बिहार
एक घंटा पहले
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जलवायु परिवर्तन से देश की खाद्य सुरक्षा पर बड़ा खतरा
बदलते मौसम और वैश्विक तापमान में बढ़ोतरी का असर अब खेती-किसानी पर सीधे तौर पर दिखने लगा है। बिहार के दरभंगा में स्थित राष्ट्रीय मखाना अनुसंधान केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. मनोज कुमार के एक नए शोध ने कृषि क्षेत्र के लिए बड़ी चिंता पैदा कर दी है। इस शोध में अनुमान लगाया गया है कि अगले 50 से 60 वर्षों में बढ़ते तापमान और कार्बन डाइऑक्साइड के स्तर का सबसे घातक असर हमारी मुख्य फसलों पर पड़ने वाला है।
गेहूं की पैदावार में होगी 17-18% की बड़ी कमी
वैज्ञानिक के अध्ययन के मुताबिक, इस मौसमी बदलाव की सबसे बड़ी मार गेहूं जैसी प्रमुख खाद्यान्न फसल पर पड़ेगी। शोध में आशंका जताई गई है कि आने वाले समय में गेहूं की कुल पैदावार में 17 से 18 प्रतिशत तक की भारी कमी दर्ज की जा सकती है। यह गिरावट भारत जैसे घनी आबादी वाले देश के लिए खाद्य संकट का कारण बन सकती है।
फसलों की पौष्टिकता पर असर और किसानों की मुश्किलें
अध्ययन में केवल पैदावार घटने की बात ही सामने नहीं आई है, बल्कि गुणवत्ता के स्तर पर भी कई नकारात्मक प्रभावों की ओर इशारा किया गया है:
- बढ़ते तापमान के कारण फसलों की पौष्टिकता में बड़ी गिरावट आ सकती है, जिससे अनाज की पोषण क्षमता कमजोर होगी।
- फसलों को बचाने और बेहतर उत्पादन हासिल करने के लिए किसानों को पहले की तुलना में कहीं अधिक उर्वरकों का इस्तेमाल करना होगा।
- विशेष रूप से खेती में फॉस्फोरस की मांग बहुत अधिक बढ़ जाएगी, जिससे किसानों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ेगा।
समय रहते कदम उठाना जरूरी
डॉ. मनोज कुमार का कहना है कि जलवायु परिवर्तन अब कोई भविष्य की बात नहीं रह गया है, बल्कि यह हमारे वर्तमान की सबसे बड़ी चुनौती बन चुका है। उन्होंने आगाह किया है कि अगर समय रहते इस दिशा में ठोस और प्रभावी कदम नहीं उठाए गए, तो देश की खाद्य और पोषण सुरक्षा पर बेहद गंभीर खतरा मंडराने लगेगा।
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