बैंक हड़ताल: सरकार ने कर्मचारियों से की काम पर लौटने की अपील, 5-दिन वर्किंग पर दिया ये बड़ा अपडेट व्यापार एक घंटा पहले 4
सितंबर के अंत में प्रस्तावित बैंक हड़ताल के बीच सरकार ने कर्मचारियों से बातचीत का आग्रह किया है, ताकि 30 सितंबर की महत्वपूर्ण हाफ-ईयरली क्लोजिंग और बैंकिंग सेवाओं पर कोई विपरीत प्रभाव न पड़े।

बैंक हड़ताल पर सरकार की चिंता

सितंबर के अंतिम दिनों में बैंकिंग सेवाओं को लेकर भारी अनिश्चितता बनी हुई है। देश के पब्लिक सेक्टर बैंकों और रीजनल ग्रामीण बैंकों के कर्मचारी संगठनों ने 28 से 30 सितंबर तक तीन दिनों की राष्ट्रव्यापी हड़ताल का आह्वान किया है। इस हड़ताल के प्रस्तावित होने के बाद केंद्र सरकार हरकत में आ गई है और उसने कर्मचारी यूनियनों से काम पर बने रहने और बातचीत का रास्ता अपनाने की अपील की है। सरकार का स्पष्ट मानना है कि हड़ताल की स्थिति में 30 सितंबर को होने वाली हाफ-ईयरली क्लोजिंग प्रभावित होगी, जिससे बैंकिंग कामकाज पूरी तरह से चरमरा सकता है।

5-डे वर्किंग और अन्य मांगों पर स्थिति

बैंक कर्मचारी संगठनों के प्रमुख एजेंडे में 5-डे बैंकिंग की मांग सबसे ऊपर है। कर्मचारी चाहते हैं कि हफ्ते में पांच दिन का काम हो और शनिवार व रविवार को अवकाश मिले। सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह मांग अभी भी विचाराधीन प्रक्रिया में है और इस पर कोई अंतिम फैसला नहीं लिया गया है। यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस यानी UFBU और अन्य संबंधित संगठन लगातार इस मांग को लेकर दबाव बना रहे हैं। इसके साथ ही, प्रदर्शन के आधार पर मिलने वाली PLI यानी परफॉर्मेंस लिंक्ड इंसेंटिव योजना को बंद करना भी उनकी एक प्रमुख मांग रही है।

PLI पर सरकार का बड़ा कदम

कर्मचारी यूनियनों के साथ हुई हालिया चर्चा के बाद सरकार ने एक बड़ा फैसला लिया है। सरकार ने पुष्टि की है कि फिलहाल PLI योजना को स्थगित कर दिया गया है। कर्मचारियों की एक बड़ी मांग पर सरकार की सहमति ने स्थिति को कुछ हद तक नरम किया है। हालांकि, पांच दिन के कार्य दिवस की मांग पर गतिरोध बरकरार है। इससे पहले 11 सितंबर को भी कर्मचारियों ने एक दिन की सांकेतिक हड़ताल की थी। यदि अब 28, 29 और 30 सितंबर की हड़ताल सफल होती है, तो उसके बाद 26 अक्टूबर से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने का भी अल्टीमेटम दिया गया है।

हाफ-ईयरली क्लोजिंग का संकट

सरकार की सबसे बड़ी चिंता 30 सितंबर को होने वाली अर्ध-वार्षिक क्लोजिंग को लेकर है। यह समय बैंकों के लिए वित्तीय दृष्टि से बेहद संवेदनशील होता है। इस दौरान खातों का मिलान, जरूरी प्रावधान, ट्रेजरी ऑपरेशंस और बाजार से जुड़े कई महत्वपूर्ण काम निपटाए जाते हैं। सरकार का तर्क है कि यदि हड़ताल के दिनों के साथ सप्ताहांत यानी वीकेंड को भी जोड़ दिया जाए, तो बैंकिंग सेवाएं कुल मिलाकर पांच दिनों तक बुरी तरह प्रभावित रह सकती हैं। इससे आम ग्राहकों के साथ-साथ व्यापारियों, सरकारी लेनदेन और अंतरराष्ट्रीय स्तर के बैंकिंग कार्यों पर भी बुरा असर पड़ेगा।

कर्मचारियों के लिए किए गए सुधार

सरकार ने इस अवसर पर बैंक कर्मचारियों के कल्याण के लिए उठाए गए अपने पिछले कदमों का भी विस्तार से ब्यौरा दिया है। सरकार के आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, वित्त वर्ष 2014-15 से 2025-26 के बीच पब्लिक सेक्टर बैंकों में करीब 4.82 लाख नए कर्मचारियों की नियुक्ति की गई है। पिछले तीन वर्षों के दौरान भर्ती प्रक्रिया को और अधिक तेज किया गया है। इसके अलावा, वेतन भत्तों में वृद्धि, पदोन्नति नियमों में बदलाव, ट्रांसफर प्रक्रिया को सरल बनाना, महिलाओं के लिए विशेष अवकाश का प्रावधान, पारिवारिक पेंशन में संशोधन और सेवानिवृत्त कर्मचारियों के लिए मेडिकल इंश्योरेंस जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराने का भी दावा किया गया है।

राजीव खन्ना पाबना के व्यापार संवाददाता हैं और कंपनियों, बाजार तथा अर्थव्यवस्था की खबरों को सरल भाषा में समझाते हैं। कारोबार जगत के बड़े फैसलों, नीतिगत बदलावों और उनके आम आदमी पर असर को वे गहराई से कवर करते हैं। उनका मकसद जटिल आर्थिक खबरों को हर पाठक के लिए आसान बनाना है।

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