जंगल में उगने वाली भटकटैया है गुणों का खजाना, जोड़ों के दर्द से लेकर पथरी तक में राहत मध्य प्रदेश एक घंटा पहले 2
बुंदेलखंड की बंजर जमीन पर पनपने वाली भटकटैया, जिसे आयुर्वेद में कंटकारी कहा जाता है, जोड़ों के दर्द, पेट की तकलीफ, दांत दर्द और मूत्राशय की पथरी जैसी समस्याओं में लाभकारी मानी जाती है।

मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले में पाई जाने वाली भटकटैया एक ऐसी झाड़ीनुमा वनस्पति है जिसे आयुर्वेद में कंटकारी के नाम से पहचाना जाता है। इसे कई औषधीय गुणों का भंडार माना जाता है। यह पौधा पथरीली और बंजर जमीन पर भी आसानी से पनप जाता है, और बुंदेलखंड की सूखी जलवायु इसकी बढ़वार के लिए बेहद मुफीद है। स्थानीय लोगों का कहना है कि बरसों से इसका इस्तेमाल पारंपरिक इलाज में होता आ रहा है।

जोड़ों और घुटनों के दर्द में आराम

स्थानीय निवासी देवीदीन प्रजापति के अनुसार, भटकटैया के फल जोड़ों और घुटनों के दर्द में काफी फायदेमंद साबित होते हैं। इन फलों को तोड़कर उनका लेप तैयार किया जाता है और इसे दर्द वाली जगह पर लगाने से राहत मिलती है। ग्रामीण इलाकों में लोग पीढ़ियों से इसी तरीके को अपनाते आ रहे हैं।

पेट और दांत की तकलीफ में उपयोगी

आयुर्वेद के जानकार बताते हैं कि भटकटैया पेट दर्द, गैस, अपच और दांत दर्द जैसी समस्याओं में भी कारगर है। इसके बीजों का धुआं या काढ़ा मुंह के छालों और दांत दर्द में आराम पहुंचाता है।

पथरी के दर्द में राहत

इसके साथ ही मूत्राशय की पथरी से होने वाले दर्द में भी इस वनस्पति को लाभकारी माना जाता है।

चेतन शुक्ला (Chetan Shukla) Print & Broadcast News Agency (PABNA) में 'मुख्य संपादक' हैं। वह पत्रकारिता में 15 वर्ष से ज्यादा का अनुभव रखते हैं। ये मूल रूप से उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं। इन्हें राजनीति और आम आदमी से जुड़ी खबरें लिखना पसंद है।

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