छपरा के सलेमपुर का 250 साल पुराना बरगद, 5 गांवों के लिए 'प्राकृतिक AC', छांव में मिलती है शिमला जैसी ठंडक बिहार एक घंटा पहले 2
छपरा के मांझी प्रखंड स्थित सलेमपुर गांव में जोगी वीर बाबा स्थान पर मौजूद 250 साल से भी पुराना बरगद का पेड़ आसपास के पांच गांवों के लोगों के लिए कुदरती कूलर बना हुआ है, जहां भीषण गर्मी में सैकड़ों लोग ठंडी छांव और पूजा-पाठ के लिए पहुंचते हैं।

इन दिनों पड़ रही भीषण गर्मी ने लोगों का जीना मुश्किल कर रखा है। राहत पाने के लिए लोग घरों में AC और कूलर लगवा रहे हैं। खासकर शहरों में रहने वाले लोगों को गर्मी ज्यादा सताती है, इसलिए वे आधुनिक मशीनों के सहारे चैन की नींद लेते हैं। दूसरी ओर ग्रामीण इलाकों के हजारों-सैकड़ों लोग ऐसी किसी मशीन का सहारा नहीं लेते।

गांव के पुराने पेड़ ही हैं असली कूलर

ग्रामीण इलाकों के लोगों के लिए गांव के पुराने पेड़-पौधे ही AC और कूलर का काम करते हैं। इन पेड़ों की छांव में दो-चार या दस नहीं, बल्कि सैकड़ों की संख्या में लोग गर्मी के दिनों में बैठे नजर आते हैं। यहां कूलर से भी ज्यादा ठंडी और प्राकृतिक हवा मिलती है, जो शरीर के लिए किसी तरह नुकसानदायक नहीं होती। इसके उलट, कूलर और AC की हवा में सोने वाले लोगों के बीमार पड़ने की बातें अक्सर सुनने को मिलती हैं।

250 साल से भी पुराना है यह बरगद

हम बात कर रहे हैं मांझी प्रखंड के सलेमपुर गांव में स्थित जोगी वीर बाबा स्थान की। यहां 250 वर्ष से भी अधिक पुराना बरगद का विशाल पेड़ मौजूद है। यह स्थान मांझी-ताजपुर सड़क के किनारे स्थित है, इसलिए यहां से गुजरने वाले राहगीर भी इस पेड़ की शीतल छांव में बैठकर ठंडी हवा का आनंद लेना नहीं भूलते। आसपास के गांवों से भी सैकड़ों लोग यहां हमेशा मौजूद रहते हैं।

क्या कहते हैं गांव के लोग

स्थानीय लोगों के मुताबिक यह बरगद का पेड़ 250 साल से भी पुराना है। गर्मी के मौसम में पांच से भी अधिक गांवों के लोग यहां ठंडी हवा का लुत्फ लेने पहुंचते हैं। इस पेड़ को किसने और कब लगाया, इसकी जानकारी किसी को नहीं है। पेड़ की छांव में एक मंदिर भी है, जहां शादी-विवाह समेत कई मांगलिक कार्यक्रम होते रहते हैं। इसके बगल में पोखर और ठीक सामने रामकृष्ण मिशन आश्रम है, जो इस जगह को और भी सुंदर बना देता है।

पांच पीढ़ियों ने देखा है यही रूप

रासबिहारी चौधरी ने बताया कि यह बरगद का पेड़ बहुत पुराना है। उन्होंने कहा कि इसी आकार में इसे उनके दादा, पिता, खुद उन्होंने, उनके बेटे और पोते ने भी देखा है। पेड़ में अब तक कोई बदलाव नहीं आया और यह उसी तरह हरा-भरा बना हुआ है। गर्मी के मौसम में करीब पांच गांवों के सैकड़ों लोग यहां ठंडी हवा का आनंद लेने आते हैं। यह स्थान जोगी बाबा के नाम से प्रसिद्ध है और मांझी-ताजपुर सड़क के किनारे होने के कारण दर्जनों यात्री भी यहां ठहरकर राहत महसूस करते हैं।

मन्नत मांगने वालों की उमड़ती है भीड़

यहां मंदिर के साथ-साथ चापाकल और पोखर भी मौजूद है। इस स्थान पर हमेशा अष्ट जाम पूजा-पाठ चलता रहता है। स्थानीय लोगों का मानना है कि सच्चे मन से मांगी गई मन्नत यहां जरूर पूरी होती है। गांव वालों के लिए यह पेड़ ही सबसे बड़ा AC और कूलर है, जो गर्मी के मौसम में लोगों को ठंडी हवा देता है।

स्थानीय लोगों का यह भी कहना है कि अगर लोग अपने आसपास पेड़ लगाएं और पेड़-पौधों को बचाकर रखें, तो कभी ऑक्सीजन की कमी नहीं होगी और कूलर-AC जैसी आधुनिक मशीनों की जरूरत भी नहीं पड़ेगी। प्राकृतिक पेड़-पौधों की हवा में लोग स्वस्थ और प्रसन्न रहते हैं।

चेतन शुक्ला (Chetan Shukla) Print & Broadcast News Agency (PABNA) में 'मुख्य संपादक' हैं। वह पत्रकारिता में 15 वर्ष से ज्यादा का अनुभव रखते हैं। ये मूल रूप से उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं। इन्हें राजनीति और आम आदमी से जुड़ी खबरें लिखना पसंद है।

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