उत्तराखंड
एक घंटा पहले
2
विचारों
उत्तराखंड का जोशीमठ एक बार फिर आंदोलन की राह पर है। साल 2023 में भू-धंसाव की त्रासदी झेल चुके इस शहर के लोग अब सोमवार से 'जोशीमठ बचाओ संघर्ष समिति' के बैनर तले आर-पार की लड़ाई के लिए सड़क पर उतरने जा रहे हैं। इस बार का प्रदर्शन कुछ घंटों का नहीं, बल्कि पूरे 48 घंटे तक दिन-रात लगातार चलने वाला धरना होगा।
प्रभावित परिवारों का आरोप है कि सरकार ने 2023 में जिन 11 सूत्रीय मांगों पर सहमति जताई थी, उन्हें ठंडे बस्ते में डाल दिया गया है। उनका कहना है कि न तो नया आशियाना मिला और न मुआवजा, इसके बावजूद अब 55 प्रभावितों के घरों को तोड़ने की तैयारी की जा रही है।
48 घंटे तक चलेगा अनवरत धरना
जिन वादों के सहारे जोशीमठ के लोगों ने अपनी पीड़ा को दबा रखा था, अब वे वादे भी टूटते दिख रहे हैं। यही वजह है कि सोमवार से जोशीमठ की वादियों में दोबारा आंदोलन का बिगुल बजने जा रहा है। समिति के नेतृत्व में पीड़ित परिवार तहसील परिसर में डेरा डालेंगे। इस 48 घंटे के दिन-रात चलने वाले धरने का मकसद, आंदोलनकारियों के मुताबिक, सोए हुए सरकारी तंत्र को जगाना है।
न घर, न मुआवजा, ऊपर से तोड़फोड़
दरअसल, साल 2023 में जब जोशीमठ धंस रहा था, तब जनता सड़कों पर उतरी थी। उस समय सरकार ने 11 सूत्रीय मांगों पर लिखित सहमति दी थी, जिसके बाद आंदोलन स्थगित कर दिया गया था। लेकिन महीनों बीत जाने के बाद भी हालात जस के तस बने हुए हैं। प्रभावित लोग आज भी अपने टूटे-फूटे घरों में रहने को मजबूर हैं।
लोगों के जख्मों पर नमक छिड़कने वाली बात यह है कि एक ओर उन्हें मुआवजा और नया घर नहीं मिला, तो दूसरी ओर सरकार अब 55 प्रभावितों के मकानों को तोड़ने का आदेश जारी कर चुकी है। इसी को लेकर जनता में भारी आक्रोश है।
सोमवार से जनता और शासन के बीच आर-पार
आंदोलनकारियों का सीधा सवाल है कि सरकार पहले प्रभावितों के लिए घर बनाकर उन्हें बसाए, या फिर सीधे उनके आशियानों पर हथौड़े चलाए। साफ है कि सोमवार से बुधवार तक जोशीमठ में एक बार फिर आर-पार की जंग छिड़ने वाली है। अब देखना यह होगा कि 48 घंटे के इस अल्टीमेटम के बाद प्रशासन क्या रुख अपनाता है, या जोशीमठ में सरकार पर दबाव बनाने के लिए कोई बड़ा आंदोलन फिर खड़ा होता है।
Comments
0 comment