तीनों सेनाओं को बड़ी राहत: रक्षा प्रमुखों और कमांडरों की खर्च करने की शक्ति दोगुनी, जानिए किसे मिला कितना अधिकार राष्ट्रीय राजनीति एक घंटा पहले 3
केंद्र सरकार ने नए DFPDS-2026 नियमों के तहत रक्षा बलों की वित्तीय शक्तियों को 100 परसेंट तक बढ़ा दिया है, जिससे अब सर्विस चीफ्स 125 करोड़ रुपये और सैन्य कमांडर 100 करोड़ रुपये तक खर्च कर सकेंगे और करीब 1.25 लाख करोड़ रुपये के प्रोजेक्ट्स में तेजी आएगी।

केंद्र सरकार ने सेना के शीर्ष अधिकारियों को बड़ा अधिकार देते हुए सैन्य कमांडरों और सर्विस चीफ्स की खर्च करने वाली वित्तीय शक्ति में जबरदस्त इजाफा कर दिया है। इस नए फैसले के बाद अब सेना के लिए हथियार और जरूरी साजो-सामान की खरीद पहले से कहीं अधिक आसान हो जाएगी। रक्षा मंत्रालय के इस कदम से करीब 1.25 लाख करोड़ रुपये के प्रोजेक्ट्स को तेज रफ्तार से पूरा किया जा सकेगा।

इस नई व्यवस्था को डेलीगेशन ऑफ फाइनेंशियल पावर्स फॉर डिफेंस सर्विसेज (DFPDS-2026) नाम दिया गया है। इसके तहत अधिकारियों की खर्च करने की सीमा को 100 परसेंट तक बढ़ा दिया गया है और कुछ मामलों में तो यह सीमा दोगुनी से भी अधिक हो गई है। इस फैसले का मुख्य उद्देश्य सेना की जरूरतों को बिना किसी देरी के पूरा करना है, ताकि सेना की ऑपरेशनल तैयारी और मजबूत हो सके। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने गुरुवार को तीनों सेनाओं के प्रमुखों की मौजूदगी में इन नए वित्तीय नियमों की गाइडलाइन जारी की।

सर्विस चीफ्स की नई खर्च सीमा क्या है?

नए नियमों के अनुसार आर्मी चीफ, नेवी चीफ और एयर चीफ की वित्तीय शक्ति में काफी बढ़ोतरी की गई है। अब वे किसी भी आवश्यक प्रोजेक्ट के लिए 125 करोड़ रुपये तक खर्च कर सकते हैं, जबकि इससे पहले उनकी सीमा महज 75 करोड़ रुपये तय थी। इस बदलाव से वे बिना किसी सरकारी फाइलिंग के तुरंत बड़े फैसले ले सकेंगे और सेना की जरूरतें समय पर पूरी होंगी।

आर्मी कमांडरों को कितनी छूट मिली?

आर्मी कमांडरों और उनके समकक्ष नेवी तथा एयरफोर्स के वरिष्ठ अधिकारियों की शक्तियों में भी इजाफा किया गया है। उनकी खर्च करने की सीमा पहले के 30 करोड़ रुपये से बढ़ाकर सीधे 100 करोड़ रुपये कर दी गई है। इस ऐतिहासिक बदलाव से फील्ड स्तर पर चल रहे प्रोजेक्ट्स को बड़ी रफ्तार मिलेगी और अफसरों को बार-बार दिल्ली से मंजूरी लेने की जरूरत नहीं पड़ेगी।

इमरजेंसी खरीद के नियमों में क्या बदला?

आपातकालीन यानी अर्जेंट ऑपरेशनल जरूरतों के लिए सैन्य कमांडरों को विशेष वित्तीय शक्ति दी गई है। इस श्रेणी में कुल खर्च की तय सीमा को सीधे दोगुना कर दिया गया है, जिससे संकट के समय सेना तुरंत जरूरी आधुनिक संसाधन जुटा सकेगी। इसके साथ ही कंबाइंड खरीद के लिए भी नए नियम बनाए गए हैं, जो तीनों सेनाओं के बीच बेहतर तालमेल कायम करेंगे।

रिसर्च और स्वदेशी निर्माण को कैसे मिलेगा बढ़ावा?

भारत में बनने वाले सैन्य उपकरणों और रिसर्च प्रोजेक्ट्स के लिए अधिकारियों की बजट शक्ति को दोगुना कर दिया गया है। इससे देश की आत्मनिर्भर भारत योजना को बड़ी गति मिलेगी तथा प्राइवेट कंपनियों और डिफेंस स्टार्टअप्स को बड़ा लाभ होगा। इस कदम से हथियारों के लिए विदेशी कंपनियों पर भारत की निर्भरता भी घटेगी।

रक्षा मंत्रालय के अनुसार, सेना के बढ़ते आकार और खर्चों को देखते हुए 2021 के नियमों में यह बड़ा बदलाव बेहद जरूरी हो गया था। यह नई व्यवस्था अक्टूबर 2025 में लागू हुए डिफेंस प्रोक्योरमेंट मैनुअल के साथ मिलकर काम करेगी।

चेतन शुक्ला (Chetan Shukla) Print & Broadcast News Agency (PABNA) में 'मुख्य संपादक' हैं। वह पत्रकारिता में 15 वर्ष से ज्यादा का अनुभव रखते हैं। ये मूल रूप से उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं। इन्हें राजनीति और आम आदमी से जुड़ी खबरें लिखना पसंद है।

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