मार्कशीट और कॉपी के जोड़ में फर्क? CBSE ने बताया आंसरशीट पर बने 'स्टार' का असली राज करियर एक घंटा पहले 2
सीबीएसई 12वीं रिजल्ट के बाद नंबरों के जोड़ में आ रहे अंतर पर बोर्ड ने सफाई दी है। जानें 'ओवर अटेम्प्ट' नियम, स्टार मार्क का मतलब और 6 जून तक खुले री-इवैल्युएशन पोर्टल की पूरी जानकारी।

सीबीएसई 12वीं रिजल्ट 2026 आने के बाद से बड़ी संख्या में छात्र अपनी आंसरशीट के अंकों की गिनती को लेकर उलझन में पड़ गए थे। उनकी शिकायत थी कि उन्होंने कॉपी में हर सवाल के जो नंबर खुद जोड़े, उनका कुल योग बोर्ड की ओर से दिए गए अंकों से मेल नहीं खा रहा। कैलकुलेशन शीट और फाइनल मार्कशीट के बीच दिख रहे इसी फर्क ने छात्रों की चिंता बढ़ा दी थी।

इस भ्रम और लगातार आ रही शिकायतों को दूर करने के लिए बोर्ड ने एक स्पष्टीकरण जारी कर अपना मार्किंग फॉर्मूला समझाया है। सीबीएसई के मुताबिक यह अंतर किसी गड़बड़ी की वजह से नहीं, बल्कि 'ओवर अटेम्प्ट' से जुड़े एक खास नियम के चलते दिख रहा है।

दरअसल, बोर्ड परीक्षा में प्रश्नों के भीतर कई आंतरिक विकल्प (इंटरनल चॉइस) दिए जाते हैं, लेकिन कई बार छात्र जोश या भ्रम में तय संख्या से ज्यादा सवालों के जवाब लिख देते हैं। ऐसे मामलों में कंप्यूटर आधारित सिस्टम अंकों की गणना किस तरह करता है और छात्रों के हित में कौन-सा नियम लागू होता है, बोर्ड ने इसकी पूरी प्रक्रिया सार्वजनिक कर दी है।

क्या है 'ओवर अटेम्प्ट' का नियम और कैसे मिलता है फायदा

सीबीएसई ने साफ किया है कि अगर किसी छात्र ने प्रश्नपत्र में दिए गए अनिवार्य प्रश्नों या उनके सब-पार्ट्स से ज्यादा सवालों के उत्तर लिखे हैं, तो बोर्ड हमेशा छात्र के हित को ध्यान में रखता है। पॉलिसी के अनुसार सिस्टम छात्र की ओर से हल किए गए सभी अतिरिक्त प्रश्नों की भी जांच करता है, मगर फाइनल टोटल में केवल उन्हीं प्रश्नों के अंक जोड़े जाते हैं जिनमें सबसे ज्यादा मार्क्स मिले होते हैं।

जिन अतिरिक्त प्रश्नों में कम अंक होते हैं, उन्हें सिस्टम 'ओवर अटेम्प्ट' मानकर कुल योग से बाहर कर देता है। यही कारण है कि जब छात्र खुद सभी सवालों के नंबर जोड़ते हैं तो उनका टोटल बोर्ड के फाइनल योग से ज्यादा बैठ जाता है।

मार्कशीट पर बने 'स्टार मार्क (*)' का मतलब

बोर्ड ने छात्रों को समझाते हुए बताया कि आंसरशीट के मूल्यांकन के बाद जिन प्रश्नों के अंक 'ओवर अटेम्प्ट' की वजह से फाइनल रिजल्ट में शामिल नहीं किए जाते, कंप्यूटर सिस्टम उन्हें स्टार मार्क (*) के साथ दिखाता है। इसका सीधा अर्थ यह है कि उस सवाल की जांच तो की गई है, लेकिन कम अंक होने के कारण उसे फाइनल स्कोरिंग में जगह नहीं मिली। बोर्ड ने अपनी ऑफिशियल वेबसाइट पर जारी नोटिस में इसका एक पूरा उदाहरण भी साझा किया है।

री-इवैल्युएशन पोर्टल खुला, 6 जून तक आखिरी मौका

अगर छात्र अब भी अपनी आंसरशीट में किसी अन्य विसंगति से असंतुष्ट हैं तो उनके पास री-इवैल्युएशन (दोबारा जांच) और वेरिफिकेशन का मौका खुला हुआ है।

  • समय सीमा: उत्तर पुस्तिकाओं के वेरिफिकेशन और री-इवैल्युएशन के लिए ऑनलाइन पोर्टल 2 जून से एक्टिव कर दिया गया है, जो 6 जून, 2026 तक ही खुला रहेगा।
  • पात्रता: इस सुविधा का लाभ केवल वही छात्र उठा सकते हैं जिन्होंने पहले चरण में अपनी जांची गई आंसरशीट की स्कैन कॉपी प्राप्त कर ली थी।
  • फीस: आंसर बुक की दिक्कतों के वेरिफिकेशन के लिए प्रति कॉपी ₹100 फीस तय की गई है, जबकि किसी खास सवाल के री-इवैल्युएशन के लिए ₹25 प्रति प्रश्न की दर से ऑनलाइन भुगतान (UPI, डेबिट/क्रेडिट कार्ड, नेट बैंकिंग) करना होगा।

किन दिक्कतों के लिए कर सकते हैं अप्लाई

छात्र अपनी स्कैन कॉपी में दिख रही कई व्यावहारिक समस्याओं के समाधान के लिए ऑनलाइन क्लेम कर सकते हैं। इनमें आंसरशीट का कोई पेज छूट जाना, सप्लीमेंट्री शीट या मैप/ग्राफ का काउंट न होना, कॉपी के पन्ने धुंधले होना, गलत सेट के आधार पर कॉपी जांची जाना या किसी विशेष प्रश्न का दोबारा मूल्यांकन कराना शामिल है।

बोर्ड ने हिदायत दी है कि छात्र इन सभी शिकायतों के लिए केवल एक ही संकलित (Consolidated) एप्लीकेशन जमा करें।

चेतन शुक्ला (Chetan Shukla) Print & Broadcast News Agency (PABNA) में 'मुख्य संपादक' हैं। वह पत्रकारिता में 15 वर्ष से ज्यादा का अनुभव रखते हैं। ये मूल रूप से उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं। इन्हें राजनीति और आम आदमी से जुड़ी खबरें लिखना पसंद है।

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