ऑस्ट्रेलिया में जब्त हुए एक लाख जिंदा कॉकरोच, भारत में 'कॉकरोच जनता पार्टी' का तूफान — जानें पूरा माजरा विश्व एक घंटा पहले 2
ऑस्ट्रेलिया की पुलिस ने एक ब्रीडर के पास से 1 लाख से ज्यादा अवैध विदेशी कॉकरोच जब्त किए, जिनकी कीमत 2 लाख ऑस्ट्रेलियाई डॉलर है। उधर भारत में एक अदालती टिप्पणी के बाद सोशल मीडिया पर 'कॉकरोच जनता पार्टी' नाम का पैरोडी मूवमेंट छा गया है।

इन दिनों दुनिया के दो अलग-अलग कोनों में कॉकरोच चर्चा के केंद्र में आ गए हैं। ऑस्ट्रेलिया में पुलिस ने एक बड़ी कार्रवाई के तहत 1 लाख से ज्यादा जिंदा कॉकरोच जब्त किए हैं, जिसे वहां के इतिहास की सबसे बड़ी जब्ती बताया जा रहा है। वहीं भारत में इसी कीड़े के नाम पर एक अनोखा राजनीतिक मूवमेंट खड़ा हो गया है, जिसका नाम है 'कॉकरोच जनता पार्टी'।

दोनों ही देशों में कॉकरोच अभी सबसे ज्यादा चर्चा का विषय बने हुए हैं। एक तरफ ऑस्ट्रेलिया में इन्हें पालना और बेचना पूरी तरह गैरकानूनी है, तो दूसरी तरफ भारत में एक अदालती टिप्पणी के बाद यह बहस सोशल मीडिया पर बड़े आंदोलन में बदल चुकी है।

ऑस्ट्रेलिया में क्यों पकड़े गए एक लाख से ज्यादा जिंदा कॉकरोच?

ऑस्ट्रेलिया के न्यू साउथ वेल्स में एक ब्रीडर के पास से 1 लाख से अधिक जिंदा कॉकरोच बरामद हुए हैं। अधिकारियों के मुताबिक यह देश की अब तक की सबसे बड़ी जब्ती है। इनमें मेडागास्कर हिसिंग और दुबिया प्रजाति के कॉकरोच शामिल हैं, जिनकी अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमत करीब 2 लाख ऑस्ट्रेलियाई डॉलर आंकी गई है।

ऑस्ट्रेलिया के क्लाइमेट चेंज और एनवायरमेंट डिपार्टमेंट ने मई में न्यू साउथ वेल्स के बाथर्स्ट में यह छापेमारी की थी। मेडागास्कर हिसिंग कॉकरोच को दुनिया के सबसे बड़े कॉकरोच में गिना जाता है। इनकी लंबाई दो से तीन इंच तक होती है, जो आम ऑस्ट्रेलियाई कॉकरोच के मुकाबले कहीं ज्यादा है।

ऑस्ट्रेलिया की सबट्रॉपिकल जलवायु इन जीवों के पनपने के लिए बेहद अनुकूल मानी जाती है। वहां पहले से ही कॉकरोच की सैकड़ों स्थानीय प्रजातियां मौजूद हैं।

रेप्टाइल्स के खाने के लिए हो रहा था इस्तेमाल

स्नेक कैचर स्टेफनी लेसर के अनुसार इन बड़े कॉकरोच का इस्तेमाल सरीसृपों यानी रेप्टाइल्स के भोजन के तौर पर किया जा रहा था। आकार में बड़े होने के कारण छिपकलियों को कम संख्या में ही ये खिलाने पड़ते हैं। सरकार ने पालतू जानवर रखने वालों से कहा है कि वे छिपकलियों को खिलाने के लिए क्रिकेट्स या वुड रोच का इस्तेमाल करें।

सख्त बायोसिक्योरिटी कानून और भारी जुर्माना

ऑस्ट्रेलिया में इन विदेशी कॉकरोच को लाना और बेचना पूरी तरह गैरकानूनी है। डिपार्टमेंट का कहना है कि इन्हें किसी भी रूप में अपने पास रखना अपराध की श्रेणी में आता है। खेती और स्थानीय वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए वहां सख्त बायोसिक्योरिटी कानून लागू हैं, और अवैध रूप से इन्हें लाने पर भारी जुर्माना लग सकता है।

अधिकारियों ने बताया कि इन कॉकरोच का कोई एनवायरमेंट रिस्क असेसमेंट नहीं हुआ था। ये बीमारियां फैला सकते हैं और स्थानीय जीवों को नुकसान पहुंचा सकते हैं। फिलहाल ब्रीडर पर कोई आरोप तय नहीं किया गया है, हालांकि जब्त किए गए इन सभी कॉकरोच को यूथनाइज यानी मार दिया जाएगा।

भारत में कैसे खड़ी हो गई 'कॉकरोच जनता पार्टी'?

जहां ऑस्ट्रेलिया में कॉकरोच पकड़े जा रहे हैं, वहीं भारत में इसी नाम पर राजनीति गरमा गई है। सोशल मीडिया पर 'कॉकरोच जनता पार्टी' नाम का एक व्यंग्यात्मक अकाउंट तेजी से वायरल हो रहा है। इस पैरोडी पार्टी के संस्थापक 30 साल के अभिजीत दिपके हैं, जो बोस्टन यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएट और एक पॉलिटिकल स्ट्रेटेजिस्ट हैं।

अभिजीत ने पिछले महीने 16 मई को इस ऑनलाइन मूवमेंट की शुरुआत की थी। देखते ही देखते इस फर्जी पार्टी के सोशल मीडिया पर लाखों फॉलोअर्स बन गए। पार्टी का स्लोगन रखा गया है — 'युवाओं का मोर्चा युवाओं के द्वारा और युवाओं के लिए'। यह पार्टी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की भारतीय जनता पार्टी की तर्ज पर बनाई गई है।

अदालती टिप्पणी से शुरू हुआ विवाद

यह पूरा मामला तब भड़का जब चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने कथित तौर पर एक सुनवाई के दौरान सरकार की आलोचना करने वाले युवाओं को कॉकरोच और पैरासाइट कह दिया। बाद में जस्टिस सूर्यकांत ने सफाई देते हुए कहा, 'मेरी बात को गलत संदर्भ में लिया गया था।' लेकिन इसी टिप्पणी के बाद अभिजीत दिपके ने यह पैरोडी पार्टी खड़ी कर दी।

अमेरिका से लौटकर दिल्ली में क्या करेंगे अभिजीत दिपके?

कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दिपके इस समय अमेरिका में थे और अब भारत वापस लौट रहे हैं। उनका मकसद नई दिल्ली में एक बड़े प्रोटेस्ट की अगुवाई करना है। यह प्रदर्शन देश के एजुकेशन मिनिस्टर धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर होने वाला है। अभिजीत इससे पहले आम आदमी पार्टी के साथ भी काम कर चुके हैं।

भारत रवाना होने से पहले उन्होंने कहा, 'मुझे पूरा भरोसा है कि लौटने पर मुझे इसके परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं, लेकिन मैं वापस आने के लिए तैयार हूं।' उन्हें आशंका है कि दिल्ली एयरपोर्ट पर उतरते ही उन्हें गिरफ्तार किया जा सकता है। इसके बावजूद वह युवाओं की आवाज बुलंद करने के लिए भारत आ रहे हैं।

चेतन शुक्ला (Chetan Shukla) Print & Broadcast News Agency (PABNA) में 'मुख्य संपादक' हैं। वह पत्रकारिता में 15 वर्ष से ज्यादा का अनुभव रखते हैं। ये मूल रूप से उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं। इन्हें राजनीति और आम आदमी से जुड़ी खबरें लिखना पसंद है।

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