बोकारो के किसान की कामयाबी, भिंडी की खेती से कमाया दोगुना मुनाफा झारखंड एक घंटा पहले 2
बोकारो जिले के किसान अनिल शाव ने भिंडी की खेती के जरिए कम लागत में शानदार कमाई का उदाहरण पेश किया है। उन्होंने महज 60 डिसमिल जमीन से 90 हजार रुपये तक की आमदनी हासिल की है।

खेती से मालामाल हुए अनिल शाव

बोकारो जिले के जरीडीह प्रखंड स्थित तातरी गांव के निवासी अनिल शाव ने खेती को मुनाफे का सौदा बनाकर दिखाया है। एक किसान परिवार से ताल्लुक रखने वाले अनिल ने अपने पुश्तैनी काम को आधुनिक तरीके से अपनाया और अब वे अन्य किसानों के लिए मिसाल बन गए हैं। अनिल ने मात्र 60 डिसमिल जमीन पर भिंडी की खेती की है, जिससे उन्हें उम्मीद से कहीं बेहतर परिणाम मिले हैं।

खेती की प्रक्रिया और समय

अनिल शाव के अनुसार, उन्होंने भिंडी की बुवाई जनवरी के अंतिम सप्ताह में शुरू की थी। लगभग 90 दिनों की मेहनत के बाद अप्रैल महीने से फसल की तुड़ाई का काम शुरू हो गया, जो जून तक लगातार जारी रहा। किसान बताते हैं कि भिंडी की सबसे बड़ी खूबी यह है कि एक बार फसल तैयार होने के बाद, इससे लगभग दो महीने तक लगातार उपज मिलती रहती है, जिससे किसानों को नियमित आय का जरिया मिल जाता है।

लागत और बंपर कमाई का गणित

भिंडी की खेती के आर्थिक पहलुओं पर बात करते हुए अनिल ने बताया कि 60 डिसमिल भूमि पर खेती करने में कुल 25 हजार रुपये की लागत आती है। उचित देखरेख और सही प्रबंधन के साथ इस भूमि से 45 से 60 क्विंटल तक का उत्पादन प्राप्त किया जा सकता है। वर्तमान में स्थानीय बाजारों और टुपकाडीह हाट में भिंडी का भाव 15 से 20 रुपये प्रति किलो है। इस सीजन में उन्होंने कुल 70 हजार से 90 हजार रुपये तक की कमाई की है, जो उनकी लागत का दोगुना से भी अधिक है। उनका अनुमान है कि यदि कोई किसान 1 एकड़ जमीन पर वैज्ञानिक तरीके से भिंडी की खेती करे, तो आसानी से एक लाख रुपये तक का मुनाफा कमाया जा सकता है।

कीटों से बचाव की सलाह

खेती में आने वाली चुनौतियों का जिक्र करते हुए अनिल ने बताया कि भिंडी की फसल में अक्सर कीट लगने का खतरा रहता है। हालांकि, समय पर उचित कीटनाशकों का छिड़काव करने से फसल को सुरक्षित रखा जा सकता है। उन्होंने अन्य किसानों को सलाह दी कि यदि फसल के दौरान छोटी-छोटी सावधानियां बरती जाएं, तो न केवल पैदावार बेहतर होती है बल्कि मुनाफा भी काफी बढ़ जाता है।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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