पशुपालक ध्यान दें! बारिश आते ही करा लें यह जरूरी टीकाकरण, वरना घेर सकती हैं ये 3 खतरनाक बीमारियां झारखंड एक घंटा पहले 2
बोकारो के पशु चिकित्सक डॉ. अनिल कुमार के अनुसार बरसात में गलाघोटू, लंगड़ा बुखार और खुरपका-मुंहपका रोग का खतरा बढ़ जाता है, जिनसे पशुओं की मौत और दूध उत्पादन में गिरावट हो सकती है। इनसे बचाव के लिए समय रहते टीकाकरण जरूरी है।

बरसात का मौसम किसानों और पशुपालकों के लिए राहत भरा होता है, लेकिन यही मौसम पशुओं के लिए कई गंभीर बीमारियों का खतरा भी साथ लाता है। लगातार बारिश से पैदा होने वाली नमी, कीचड़, गंदगी और दूषित पानी के कारण संक्रमण तेजी से फैलता है। इससे पशु बीमार पड़ सकते हैं और कई मामलों में उनकी जान भी जा सकती है, जिससे पशुपालकों को भारी आर्थिक नुकसान झेलना पड़ता है।

बोकारो के चास स्थित पेट क्लीनिक के पशु चिकित्सक डॉ. अनिल कुमार ने बरसात के दौरान पशुओं में होने वाली बीमारियों, उनके लक्षणों और बचाव के तरीकों के बारे में विस्तार से जानकारी दी।

मानसून में क्यों जरूरी है खास देखभाल

डॉ. अनिल कुमार के मुताबिक मानसून के दौरान पशुओं की देखभाल सबसे ज्यादा जरूरी हो जाती है। बारिश के समय कई तरह की नई घास उग आती है, जिनमें से कुछ पशुओं की सेहत के लिए नुकसानदेह साबित हो सकती हैं। इसके अलावा कीचड़, गंदगी और खराब चारे में बैक्टीरिया और वायरस तेजी से पनपते हैं, जो पशुओं को बीमार बना देते हैं। उन्होंने आगाह किया कि इस मौसम में थोड़ी सी लापरवाही भी पशुओं के स्वास्थ्य पर गंभीर असर डाल सकती है।

गलाघोटू के लक्षण पहचानें

डॉक्टर ने बताया कि बरसात के मौसम में गलाघोटू सबसे खतरनाक बीमारी मानी जाती है। इस बीमारी में पशु के शरीर का तापमान अचानक बढ़ जाता है और मुंह से लगातार लार बहने लगती है। पशु को खाने-पीने में परेशानी होती है और उसके गले से घरघराहट जैसी आवाज आने लगती है। उन्होंने चेतावनी दी कि समय पर इलाज न मिलने की स्थिति में पशु की मौत 24 घंटे के भीतर तक हो सकती है, इसलिए ऐसे लक्षण दिखते ही तुरंत पशु चिकित्सक से संपर्क करना चाहिए।

बारिश में बढ़ता है लंगड़ा बुखार का खतरा

डॉ. अनिल के अनुसार बरसात के दिनों में खासकर गायों में लंगड़ा बुखार का खतरा बढ़ जाता है। इस बीमारी में पशु को तेज बुखार आता है और शरीर के प्रभावित हिस्सों में सूजन दिखाई देती है। सूजन वाले भाग को दबाने पर एक खास तरह की आवाज सुनाई देती है, और बीमारी बढ़ने पर पशु पूरी तरह कमजोर हो जाता है। इससे बचाव के लिए संक्रमित पशु को स्वस्थ पशु से अलग रखने की सलाह दी गई है।

खुरपका-मुंहपका रोग भी बड़ी चिंता

उन्होंने बताया कि खुरपका-मुंहपका रोग भी बरसात में पशुपालकों के लिए बड़ी चिंता का विषय है। इस बीमारी के कारण पशु के मुंह और खुरों में छाले पड़ जाते हैं, जिससे वह खाना-पीना कम कर देता है। इसका सबसे ज्यादा असर दूध उत्पादन पर पड़ता है और पशु धीरे-धीरे कमजोर पड़ने लगता है। कई मामलों में पशु गंभीर रूप से बीमार हो जाता है।

बचाव के जरूरी उपाय

डॉक्टर अनिल ने अंत में सलाह दी कि बरसात शुरू होते ही पशुपालक सतर्क हो जाएं और बारिश से पहले पशुओं का टीकाकरण जरूर करा लें। उन्होंने कहा कि गौशाला को साफ और सूखा रखें, आसपास बारिश का पानी जमा न होने दें और पशुओं को स्वच्छ खानपान दें, ताकि पशुधन की रक्षा की जा सके।

चेतन शुक्ला (Chetan Shukla) Print & Broadcast News Agency (PABNA) में 'मुख्य संपादक' हैं। वह पत्रकारिता में 15 वर्ष से ज्यादा का अनुभव रखते हैं। ये मूल रूप से उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं। इन्हें राजनीति और आम आदमी से जुड़ी खबरें लिखना पसंद है।

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