उपनाम: पशु टीकाकरण
बरसात के मौसम में पशुओं की सुरक्षा के लिए जरूरी हैं ये 3 टीके, दूध उत्पादन पर नहीं पड़ेगा बुरा असर
छत्तीसगढ़ में मानसून के दौरान पशुओं को जानलेवा बीमारियों से बचाने के लिए पशुधन विभाग ने निशुल्क टीकाकरण अभियान शुरू किया है। विशेषज्ञ गलघोंटू, लंगड़ी बुखार और खुरपका-मुंहपका जैसी बीमारियों से बचाव के लिए पशुपालकों को जागरूक कर रहे हैं।
बरसात में पशुओं पर मंडराया बीमारियों का खतरा: गलाघोटू से 24 घंटे में मौत, लंगड़ा बुखार और खुरपका-मुंहपका भी घातक; जानिए लक्षण और बचाव
बरसात के मौसम में नमी, कीचड़ और दूषित पानी के कारण पशुओं में संक्रमण तेजी से फैलता है। गलाघोटू जैसी बीमारी तो 24 घंटे के भीतर पशु की जान ले सकती है, जिससे पशुपालकों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है।
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बरसात के मौसम में नमी और गंदगी से गाय, भैंस और बकरियों में थनैला, गलघोंटू, खुरपका-मुंहपका और फुट रोट जैसी बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। साफ-सूखा आवास, स्वच्छ चारा-पानी, समय पर टीकाकरण और कृमिनाशक दवा से पशुओं को सुरक्षित रखा जा सकता है।
जुलाई में कहर बरपाती है पशुओं की घातक गलघोंटू बीमारी, मई-जून में टीका लगवाना है जरूरी, जानें बचाव के आसान तरीके
जुलाई के महीने में दुधारू पशुओं में तेजी से फैलने वाली गलघोंटू एक जानलेवा बैक्टीरियल बीमारी है। पशु विशेषज्ञों के अनुसार मई-जून के दौरान समय रहते टीकाकरण कराना ही इससे बचाव का सबसे कारगर उपाय है।
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बोकारो के पशु चिकित्सक डॉ. अनिल कुमार के अनुसार बरसात में गलाघोटू, लंगड़ा बुखार और खुरपका-मुंहपका रोग का खतरा बढ़ जाता है, जिनसे पशुओं की मौत और दूध उत्पादन में गिरावट हो सकती है। इनसे बचाव के लिए समय रहते टीकाकरण जरूरी है।