170 टन का दुनिया का सबसे बड़ा चूल्हा और रहस्यमयी धाम, झारखंड के पलामू की यह कहानी आज भी करती है हैरान झारखंड एक घंटा पहले 2
झारखंड के पलामू जिले के मोहमदगंज में स्थित भीम चूल्हा सिर्फ एक पर्यटन स्थल नहीं, बल्कि महाभारत काल से जुड़ी लोक आस्थाओं का जीवंत प्रतीक माना जाता है। कोयल नदी के तट पर बना यह विशाल पत्थरनुमा चूल्हा अपनी अनोखी बनावट और जुड़ी कथाओं के कारण लोगों को आकर्षित करता है।

झारखंड के पलामू जिले के मोहमदगंज में मौजूद भीम चूल्हा केवल घूमने-फिरने की जगह नहीं है, बल्कि इसे महाभारत काल से जुड़ी लोक मान्यताओं और किंवदंतियों का जीवंत प्रतीक माना जाता है। कोयल नदी के किनारे बना यह विशालकाय पत्थरनुमा चूल्हा अपनी अनूठी संरचना और इससे जुड़ी कहानियों के चलते बरसों से लोगों के आकर्षण का केंद्र रहा है। स्थानीय मान्यता है कि इस चूल्हे का निर्माण द्वापर युग में पांडवों के बलशाली भाई भीम ने किया था।

170 टन वजनी विशाल चूल्हा

स्थानीय लोगों के मुताबिक भीम चूल्हा का वजन करीब 170 टन है। इतनी बड़ी संरचना को देखकर हर किसी के मन में सहज ही यह जिज्ञासा उठती है कि आखिर यह बनी कैसे होगी। लोककथाओं में कहा जाता है कि अज्ञातवास के समय जब पांडव इस इलाके में रुके थे, तब माता कुंती के लिए भोजन तैयार करने हेतु भीम ने इस विशाल चूल्हे का निर्माण किया था। यही वजह है कि यह स्थल आज भी लोगों की आस्था और कौतूहल का केंद्र बना हुआ है।

हथिया बाबा की दिलचस्प कथा

भीम चूल्हा के पास स्थित हथिया बाबा की कहानी भी कम रोचक नहीं है। मान्यता है कि अज्ञातवास के दौरान पांडवों और माता कुंती के साथ एक हाथी भी चल रहा था। जब आगे की यात्रा पर निकलने का समय आया तो वह हाथी नींद से नहीं जाग सका। इससे नाराज होकर माता कुंती ने उसे श्राप दे दिया और वह पत्थर में बदल गया। आज भी यहां मौजूद पत्थर की आकृति को लोग उसी हाथी का स्वरूप मानकर श्रद्धापूर्वक पूजा करते हैं।

श्रद्धालुओं की गहरी आस्था

स्थानीय भक्तों के बीच हथिया बाबा का विशेष धार्मिक महत्व है। यहां पहुंचने वाले लोग हथिया बाबा के दर्शन कर सुख-समृद्धि और मनोकामना पूर्ति की प्रार्थना करते हैं। क्षेत्र के ग्रामीणों में यह विश्वास गहराई तक बसा है कि सच्चे मन से की गई प्रार्थना पर हथिया बाबा आशीर्वाद देते हैं। यही कारण है कि साल भर यहां श्रद्धालुओं का आना-जाना बना रहता है।

पर्यटन विभाग ने संवारा स्थल

ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व वाले इस स्थल को पर्यटन विभाग ने विकसित किया है। यहां सुंदर पार्क, वॉच टावर और भीम चूल्हा के ऊपर प्रतीकात्मक कराह बनाई गई है, ताकि पर्यटक कल्पना कर सकें कि माता कुंती यहां किस तरह भोजन बनाती रही होंगी। इसके साथ ही स्थल की प्राकृतिक सुंदरता इसे और खास बना देती है।

कोयल नदी का मनोरम नजारा

भीम चूल्हा परिसर में बने वॉच टावर से कोयल नदी का खूबसूरत दृश्य और भीम बराज की सुंदरता साफ नजर आती है। हरियाली और नदी का संगम यहां आने वाले पर्यटकों को प्रकृति के बेहद करीब ले आता है। सूर्योदय और सूर्यास्त के समय यहां का दृश्य विशेष रूप से आकर्षक नजर आता है।

चेतन शुक्ला (Chetan Shukla) Print & Broadcast News Agency (PABNA) में 'मुख्य संपादक' हैं। वह पत्रकारिता में 15 वर्ष से ज्यादा का अनुभव रखते हैं। ये मूल रूप से उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं। इन्हें राजनीति और आम आदमी से जुड़ी खबरें लिखना पसंद है।

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