नीट में लगातार 5 बार मिली असफलता, फिर कैसे बदली प्रणव की किस्मत? बिहार के इस छात्र ने पेश की मिसाल करियर 3 महीने पहले 122
बिहार के पूर्णिया निवासी प्रणव ने लगातार 5 बार नीट परीक्षा में असफल होने के बावजूद हिम्मत नहीं हारी और छठी बार में सरकारी मेडिकल कॉलेज में प्रवेश पाकर अपना सपना पूरा किया। उनकी यह प्रेरणादायक यात्रा उन सभी छात्रों के लिए एक बड़ा सबक है जो कड़ी मेहनत और दृढ़ निश्चय के साथ अपनी गलतियों को सुधारना जानते हैं।

नीट परीक्षा का कड़ा संघर्ष और प्रणव की दृढ़ता

मेडिकल प्रवेश परीक्षा नीट (NEET) की तैयारी करने वाले लाखों छात्र इस बात से वाकिफ हैं कि यह सफर कितना चुनौतीपूर्ण होता है। जब कोई छात्र लगातार कई बार फेल हो जाता है, तो स्वाभाविक है कि वह टूट जाए और भविष्य के लिए कोई दूसरा आसान रास्ता तलाशने लगे। लेकिन बिहार के पूर्णिया के रहने वाले प्रणव ने इसे गलत साबित कर दिखाया है। प्रणव लगातार 5 बार नीट में असफल हुए, लेकिन उन्होंने डॉक्टर बनने का अपना संकल्प नहीं छोड़ा। उनकी कहानी उन सभी युवाओं के लिए एक मशाल की तरह है जो मुश्किलों के आगे घुटने टेक देते हैं। यह केवल एक परीक्षा पास करने की सफलता की गाथा नहीं है, बल्कि एक कूरियर बांटने वाले पिता के संघर्ष और एक मां के उस अधूरे सपने के सच होने की कहानी है, जो उन्होंने अपने बेटे के डॉक्टर बनने के रूप में देखा था।

पिता का संघर्ष और मां का अधूरा सपना

प्रणव का परिवार आर्थिक रूप से बेहद साधारण परिस्थितियों में रहा है। उनके पिता का मुख्य काम घर-घर जाकर कूरियर पहुँचाने का था। हालांकि उनके पिता की आय बहुत सीमित थी और उनके काम को समाज में बहुत अधिक सम्मान की दृष्टि से नहीं देखा जाता था, लेकिन उन्होंने अपने बेटे की पढ़ाई में कभी कोई कसर नहीं छोड़ी। दूसरी ओर, उनकी मां एक शिक्षिका थीं, जिन्होंने आर्थिक तंगी के बावजूद प्रणव को शहर के बेहतरीन विद्यालयों में पढ़ाया। हालांकि उस समय प्रणव को इस बात का स्पष्ट अंदाजा नहीं था कि डॉक्टर बनने का सपना वास्तव में उनकी मां के दिल की गहराइयों में दबा हुआ है, जिसे वह अपने बच्चे की आंखों के जरिए साकार होते देखना चाहती थीं।

रिश्तेदारों के ताने और लगातार 5 बार की नाकामी

प्रणव के नीट सफर की शुरुआत साल 2018 में हुई, जब पहला परिणाम आया और उन्हें निराशा मिली। उनका स्कोर काफी कम रहा। इसके बाद रिश्तेदारों और आसपास के लोगों ने उन्हें ताने देने शुरू कर दिए और सलाह दी कि डॉक्टर बनने का ख्याल छोड़कर किसी और क्षेत्र में करियर आजमाएं। बावजूद इसके, उनकी मां ने उन्हें हमेशा प्रेरित किया और कहा कि एक कोशिश और करने की जरूरत है। इसके बाद भी प्रणव के सामने संघर्षों का अंबार लगा रहा। साल 2019 में उन्होंने 466 अंक प्राप्त किए और 2020 में यह स्कोर बढ़कर 530 तक पहुँच गया।

वर्ष 2021 में परीक्षा के पैटर्न में बदलाव किया गया, जिससे प्रणव इतने तनाव में आ गए कि परीक्षा केंद्र में ही उन्होंने आत्मविश्वास खो दिया। इसके बाद साल 2022 में कोविड के दौर में कोचिंग संस्थान बंद हो गए, जिससे प्रणव का काफी समय व्यर्थ हुआ और वे ऑनलाइन गेमिंग की लत के जाल में फंस गए। उस वर्ष उनका स्कोर केवल 557 रहा, जो किसी सरकारी मेडिकल कॉलेज में दाखिले के लिए नाकाफी था।

बीएमएस में प्रवेश और दोस्तों से मिली प्रेरणा

लगातार 5 बार असफल होने के बाद प्रणव मानसिक रूप से पूरी तरह टूट चुके थे। उन्होंने नीट की तैयारी से किनारा कर लिया और हार मानकर बीएमएस (BMS) कोर्स में दाखिला ले लिया। हालांकि, उनके दोस्तों को हमेशा उनकी प्रतिभा और काबिलियत पर अटूट भरोसा था। दोस्तों के लगातार प्रोत्साहन के बाद प्रणव ने आत्ममंथन किया। उन्होंने अपनी पुरानी गलतियों की एक सूची बनाई। कॉलेज की पढ़ाई के साथ-साथ उन्होंने मात्र 2 महीनों के भीतर करीब 40 से 50 मॉक टेस्ट हल किए। उन्होंने एक खास 'मिस्टेक कॉपी' बनाई, जिसमें वे अपनी गलतियों का प्रतिदिन बारीकी से विश्लेषण करते थे।

सफलता का नया अध्याय और परीक्षा की रणनीति

नीट 2023 की परीक्षा में बैठने से पहले प्रणव के मन में घबराहट थी, लेकिन उन्होंने अपने डर पर काबू पाना सीख लिया था। उन्होंने शांत मन से पूरे प्रश्न पत्र को पढ़ा। उनकी रणनीति इतनी कारगर रही कि उन्होंने भौतिकी यानी फिजिक्स सेक्शन को छोड़कर शेष पूरा पेपर केवल 1 घंटे 10 मिनट में हल कर लिया। इस सटीक तैयारी और बेहतर समय प्रबंधन का परिणाम यह रहा कि नीट 2023 में उन्होंने शानदार स्कोर हासिल किया और सरकारी मेडिकल कॉलेज में प्रवेश पाने में सफल रहे।

नीट एस्पिरेंट्स के लिए प्रणव की सीख

अपनी सफलता के बाद प्रणव उन सभी छात्रों को एक महत्वपूर्ण सीख देते हैं जो वर्तमान में इस परीक्षा की तैयारी कर रहे हैं। प्रणव का मानना है कि उनकी 5 असफलताएं व्यर्थ नहीं थीं, बल्कि उन्होंने उन्हें जीवन की बड़ी चुनौतियों का सामना करना सिखाया है। वे कहते हैं कि यदि परीक्षा में अंक कम आ रहे हैं, तो निराश होकर मैदान छोड़कर भागने के बजाय अपनी गलतियों को पहचानना चाहिए। अपनी कमजोरियों को एक डायरी में लिखकर उन पर काम करना ही सफलता की कुंजी है। यदि छात्र निरंतरता और सुधार के साथ आगे बढ़ें, तो जीत निश्चित रूप से उनकी होगी।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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