बिहार
एक महीने पहले
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विचारों
सफलता की एक प्रेरणादायक कहानी
नवादा जिले के काशीचक प्रखंड के निवासी विपुल कुमार ने अपनी मेहनत, मजबूत इरादों और निरंतर अनुशासन के बल पर एक ऐसी उपलब्धि हासिल की है, जो आज पूरे इलाके के लिए मिसाल बन गई है। एक सामान्य मध्यमवर्गीय परिवार से ताल्लुक रखने वाले विपुल ने देश की सबसे प्रतिष्ठित और कठिन परीक्षाओं में से एक चार्टर्ड अकाउंटेंट यानी सीए की परीक्षा उत्तीर्ण कर न केवल अपने माता-पिता का सपना साकार किया है, बल्कि काशीचक प्रखंड के इतिहास में पहले सीए बनने का कीर्तिमान भी स्थापित किया है।
भव्य स्वागत और सम्मान
जब विपुल अपनी इस बड़ी कामयाबी के बाद अपने पैतृक गांव लौटे, तो वहां का माहौल किसी उत्सव से कम नहीं था। उनके घर पहुंचने पर समाज के लोगों और ग्रामीणों ने उनका गर्मजोशी से स्वागत किया। पूरे गांव में ढोल नगाड़ों की थाप पर आतिशबाजी की गई और फूल-मालाओं के साथ उनका अभिनंदन किया गया। उनके परिजनों ने आरती उतारकर और मिठाई खिलाकर इस खुशी के पल का जश्न मनाया। इस दौरान क्षेत्र के लोगों की आंखों में खुशी के आंसू थे, क्योंकि उनके बीच से निकलकर एक युवा ने राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाई है।
साधारण परिवार से सीए तक का सफर
विपुल कुमार के पिता मनोज प्रसाद नवादा के काशीचक बाजार स्थित पटेल नगर मोहल्ले में एक छोटी सी किराना दुकान चलाते हैं। एक साधारण दुकानदार के बेटे द्वारा सीए जैसे कठिन मुकाम को हासिल करना यह साबित करता है कि अगर लक्ष्य स्पष्ट हो तो संसाधन कभी भी बाधा नहीं बनते। उनके माता-पिता का कहना है कि उन्हें अपने बेटे की इस मेहनत पर गर्व है। उन्होंने बताया कि विपुल केवल उनके परिवार का ही नहीं, बल्कि पूरे गांव और प्रखंड का गौरव है। स्थानीय लोगों के अनुसार, उनके आसपास के इलाकों में भी अब तक कोई चार्टर्ड अकाउंटेंट नहीं था, जिससे विपुल की यह सफलता और भी विशेष हो जाती है।
शिक्षा की नींव और कोलकाता में तैयारी
विपुल की सफलता के पीछे का सफर बचपन से ही संघर्ष और अनुशासन से भरा रहा है। परिजनों ने बताया कि वह पढ़ाई में बचपन से ही काफी मेधावी और परिश्रमी थे। उन्होंने अपनी स्कूली शिक्षा कोडरमा के सैनिक स्कूल से पूरी की। इसके बाद सीए की चुनौतीपूर्ण तैयारी के लिए उन्होंने कोलकाता का रुख किया। वहां रहकर उन्होंने कड़ी मेहनत की और बिना थके अपने लक्ष्य की ओर बढ़ते रहे। आज उनकी उसी मेहनत का फल है कि वह इस मुकाम तक पहुंचे हैं। उनके घर पर बधाई देने वालों का तांता लगा हुआ है। कई सामाजिक और राजनीतिक कार्यकर्ताओं के साथ-साथ स्थानीय व्यापारियों ने भी उनके उज्जवल भविष्य की कामना की है।
अनुशासन ही सफलता की कुंजी
अपनी इस कामयाबी पर विपुल कुमार ने कहा कि वे इसका पूरा श्रेय अपने माता-पिता और अपने गुरुजनों को देते हैं। उन्होंने युवा छात्रों को प्रेरित करते हुए कहा कि अनुशासन और कड़ी मेहनत ही वह रास्ता है, जिससे हर लक्ष्य को पाया जा सकता है। विपुल का मानना है कि यदि कोई भी छात्र पूरी निष्ठा के साथ प्रयास करता रहे, तो उसे सफलता अवश्य मिलती है। उनकी यह उपलब्धि न केवल उनके परिवार के लिए गर्व का विषय है, बल्कि यह क्षेत्र के उन अनेकों युवाओं के लिए भी एक बड़ी प्रेरणा है जो सीमित संसाधनों के बावजूद बड़े सपने देखते हैं और उन्हें पूरा करने का जज्बा रखते हैं।
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