बिहार
एक दिन पहले
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विचारों
समाज की चुनौतियों को दी मात
दुनिया में हर इंसान अलग है। कोई कद में लंबा है तो कोई छोटा, कोई आर्थिक रूप से संपन्न है तो कोई सामान्य। हालांकि, बिहार के जहानाबाद जिले से एक ऐसी कहानी सामने आई है जो साबित करती है कि शारीरिक बनावट इंसान की तरक्की की राह में बाधा नहीं बन सकती। जहानाबाद के नगमा गांव के रहने वाले राम टहल राम का परिवार अपनी मेहनत और जज्बे के कारण मिसाल बना हुआ है। इस परिवार के चार सदस्यों का कद बहुत कम है, लेकिन उनके हौसले किसी भी अन्य व्यक्ति से कम नहीं हैं।
परिवार का संघर्ष और जीवनशैली
राम टहल राम की उम्र करीब 50 साल है। उनके पूरे परिवार की शारीरिक ऊंचाई लगभग 4 फीट के आसपास है। उनके परिवार में वे स्वयं, उनकी पत्नी और उनके बच्चे शामिल हैं। इस परिवार की स्थिति ऐसी है कि घर का कोई भी सदस्य ज्यादा पढ़ा-लिखा नहीं है, इसलिए वे सभी अपनी मेहनत के दम पर आजीविका जुटाते हैं। राम टहल राम का कहना है कि वे किसी के सामने हाथ फैलाने के बजाय खुद मेहनत करना पसंद करते हैं।
रोजाना 15 किलोमीटर की पैदल यात्रा
राम टहल राम के दैनिक दिनचर्या का हिस्सा सुनकर हर कोई हैरान रह जाता है। वे हर सुबह 10 बजे अपने घर से निकलते हैं और दिन भर में करीब 15 किलोमीटर तक पैदल घूमकर मूंगफली बेचने का काम करते हैं। वे अपने साथ मूंगफली के 80 से 100 पैकेट लेकर चलते हैं और हर पैकेट की कीमत 10 रुपये होती है। वे दिन भर घूमते हैं और शाम तक अपनी सारी मूंगफली बेचकर घर लौटते हैं। इस कड़ी मेहनत से उन्हें रोजाना 800 से 1000 रुपये तक की कमाई हो जाती है, जिससे उनका घर का खर्च आसानी से चलता है।
बुलंद हौसलों की दास्तान
राम टहल राम बताते हैं कि उनके परिवार में तीन बच्चे हैं, जिनमें से दो का कद भी उन्हीं की तरह छोटा है। हालांकि, परिवार ने विपरीत परिस्थितियों में भी हार नहीं मानी। उन्होंने अपनी बेटी का विवाह कर दिया है, जो कि सामान्य कद के दामाद के साथ खुश है। वहीं, एक बेटा भी उनके काम में हाथ बंटाता है और मूंगफली बेचने में मदद करता है। इसके अलावा, एक बेटा सामान्य लंबाई का है जो फिलहाल अपनी पढ़ाई पूरी कर रहा है।
समाज का रवैया और खुद की सोच
जीवन में आने वाली कठिनाइयों के बारे में बात करते हुए राम टहल राम भावुक हो जाते हैं। वे कहते हैं कि समाज में लोग उन्हें अक्सर बौना कहकर चिढ़ाते हैं और तरह-तरह के ताने देते हैं। पहले इन बातों का बुरा लगता था, लेकिन अब उन्हें इसकी आदत हो गई है। वे मानते हैं कि कभी-कभी मन में यह विचार आता है कि अगर लंबाई सामान्य होती तो कितना अच्छा होता, लेकिन फिर वे ईश्वर का शुक्रिया अदा करते हैं और सोचते हैं कि जो मिला है उसी में संतुष्ट रहना चाहिए।
सम्मान की कमाई सबसे बड़ी जीत
राम टहल राम के लिए उनकी मेहनत की कमाई ही उनका सबसे बड़ा सम्मान है। वे कहते हैं कि भले ही समाज का नजरिया कुछ भी हो, लेकिन वे किसी की दया पर निर्भर नहीं हैं। रोजाना 15 से 20 किलोमीटर पैदल चलना और धूप-गर्मी में मेहनत करना उनके संकल्प को दर्शाता है। यह कहानी उन सभी लोगों के लिए प्रेरणा है जो शारीरिक कमियों को अपनी कमजोरी मानकर घर में बैठ जाते हैं। जहानाबाद का यह परिवार गर्व से अपना जीवन जी रहा है और साबित कर रहा है कि मेहनत से बड़ी कोई ऊंचाई नहीं होती।
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