उपनाम: जैविक खाद
आगरा में किसान बिना केमिकल के उगा रहे जैविक देशी लौकी, नौ राज्यों तक पहुंचती है फसल
आगरा के किसान बिना किसी केमिकल और इंजेक्शन के जैविक खाद से देशी लौकी की खेती कर रहे हैं, जिसकी सप्लाई नौ राज्यों तक होती है। कम लागत और भारी मांग के चलते यह फसल किसानों को अच्छा मुनाफा दे रही है।
घर पर बनने वाली ये जैविक खाद बचाएगी सेहत और किसानों की जेब, बेचकर भी हो रही कमाई
सारण के किसान रणजीत सिंह कृषि विज्ञान केंद्र मांझी से प्रशिक्षण लेकर गोबर, गोमूत्र, मिट्टी, गुड़ और पानी से कम बजट में जैविक खाद तैयार करते हैं और दूसरे किसानों को निशुल्क सिखाते भी हैं।
घर में 6 दुधारू पशु हैं तो गोबर से हर महीने ₹20000 तक कमाई, किसान ने बताया पूरा गणित
मध्य प्रदेश के एक प्रगतिशील किसान के मुताबिक 6 दुधारू पशुओं के गोबर से वर्मी कंपोस्ट बनाकर हर महीने 18 से 20 हजार रुपये की अतिरिक्त आय अर्जित की जा सकती है. कम लागत और जैविक खाद की बढ़ती मांग इस व्यवसाय को फायदेमंद बना रही है.
पटना के नरेश अग्रवाल के घर से बरसों से नहीं निकला गीला कचरा, नगर निगम भी रह गया हैरान; बिना खर्च यूं तैयार होती है पौधों की टॉनिक
पटना के नाला रोड में रहने वाले नरेश अग्रवाल रसोई के गीले कचरे को छत पर प्रोसेस कर पौधों के लिए मुफ्त प्राकृतिक टॉनिक बनाते हैं। बिना किसी खर्च वाला यह मॉडल देखने नगर निगम की टीम तक उनके घर पहुंच चुकी है।
घर पर तैयार करें जिप्सम जैविक खाद, बंजर जमीन भी देगी भरपूर पैदावार; जानिए पूरी विधि
खंडवा के किसान जिप्सम और धान के पुआल से बेहद कम खर्च में जैविक खाद तैयार कर रहे हैं, जो मिट्टी की सेहत सुधारकर फसल उत्पादन भी बढ़ा रही है।
गोबर खाद को सीधे खेत में डालना पड़ सकता है भारी, कृषि वैज्ञानिक से जानिए तैयार करने का सही तरीका
कृषि विशेषज्ञों के अनुसार गोबर को खुले में धूप में रखने से उसके लाभकारी जीवाणु नष्ट हो जाते हैं। छायादार जगह पर नमी के साथ सड़ाकर तैयार की गई खाद ही फसल को दोगुना फायदा पहुंचाती है।
हनुमान जी को प्रिय लाल गुलाब घर में उगाएं, इस देसी लिक्विड खाद से पौधा भर जाएगा फूलों से, जानें बनाने का तरीका
हनुमान जी को अर्पित किए जाने वाले लाल गुलाब के पौधे पर ज्यादा फूल पाने के लिए वर्मीकंपोस्ट, नीम खली और सीवीड से बनी घरेलू लिक्विड खाद बेहद कारगर मानी जाती है। सही पोषण, उचित देखभाल और संतुलित धूप से कमजोर गुलाब का पौधा दोबारा फूलों से भर सकता है।
न सिलेंडर की चिंता, न गैस का बिल: गोबर से जल रहा चूतराराम का चूल्हा, हर कोई पूछ रहा प्लांट का राज
बाड़मेर के चूतराराम ने सिर्फ 22 हजार रुपये की लागत से गोबर गैस प्लांट लगाकर घर का चूल्हा गोबर की गैस से जलाना शुरू किया है, और प्लांट से निकलने वाली स्लरी खेतों में जैविक खाद का काम कर रही है।
एमपी का वह जैविक गांव, जहां कभी हर घर में बनती थी खाद, अब फैल रही रासायनिक खेती
मध्यप्रदेश का मलगांव कभी पूरे प्रदेश में 'जैविक ग्राम' के रूप में पहचाना जाता था, लेकिन आज यहां एक भी खेत पूरी तरह जैविक नहीं बचा और किसान रासायनिक खाद व कीटनाशकों पर निर्भर हो गए हैं।