घर पर बनने वाली ये जैविक खाद बचाएगी सेहत और किसानों की जेब, बेचकर भी हो रही कमाई बिहार 2 घंटे पहले 2
सारण के किसान रणजीत सिंह कृषि विज्ञान केंद्र मांझी से प्रशिक्षण लेकर गोबर, गोमूत्र, मिट्टी, गुड़ और पानी से कम बजट में जैविक खाद तैयार करते हैं और दूसरे किसानों को निशुल्क सिखाते भी हैं।

खेती-किसानी में अधिक पैदावार और फसलों को नुकसान से बचाने के लिए लंबे समय तक लोग रासायनिक खाद पर ही निर्भर रहे, लेकिन जब केमिकल युक्त फल, सब्जी और अनाज के नुकसान की समझ बढ़ी तो किसान और उपभोक्ता दोनों इससे दूरी बनाने लगे। सरकार भी अब जैविक खेती को लगातार बढ़ावा दे रही है और इसके लिए कई तरह के प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करती है। कई युवा किसान भी इस दिशा में रुचि दिखा रहे हैं और गांव-घर में रहकर 9 से 5 की नौकरी के बंधन के बिना खेती से 25-30 हजार रुपये तक कमा रहे हैं। हालांकि इसके लिए आपके पास खेती होना जरूरी है।

आठ साल से जैविक खेती कर रहे रणजीत सिंह

छपरा के दरियापुर प्रखंड के खानपुर गांव निवासी रणजीत सिंह कृषि वैज्ञानिक से प्रशिक्षण लेकर जैविक विधि से बड़े पैमाने पर खेती करते हैं और जैविक खाद भी खुद तैयार करते हैं। इलाके के समृद्ध किसानों में इनकी गिनती होती है। ड्रैगन फ्रूट, पपीता, केला और हाइब्रिड ओल समेत कई फसलें ये बड़े स्तर पर उगाते हैं। पिछले 8 वर्षों से वे जैविक खेती कर रहे हैं। उनके बताए तरीके से खेती करने वाले किसानों का खर्च कम और लाभ ज्यादा हो रहा है, यही वजह है कि दूर-दूर से किसान उनसे जैविक खेती के गुर सीखने आते हैं। रणजीत सिंह किसानों को निशुल्क प्रशिक्षण देकर जागरूक भी करते हैं।

खेती पर कैसे होती है ज्यादा बचत

रणजीत सिंह ने कृषि विज्ञान केंद्र मांझी से प्रशिक्षण लेने के बाद घर पर ही जीव अमृत, घन अमृत, जैविक खाद और घास सुखाने वाली दवा समेत कई चीजें कम बजट में तैयार करना शुरू किया। गोबर, गाय मूत्र, मिट्टी, गुड़ और पानी को मिलाकर यह खाद तैयार होती है। इसी खाद को सारण की धरती पर होने वाली हर फसल में डालकर किसान बेहतरीन उपज ले रहे हैं। जितनी लागत में एक बोरी रासायनिक खाद आती है, उससे भी कम खर्च में कई एकड़ के लिए जैविक खाद घर पर तैयार कर किसान बड़ी बचत कर सकते हैं।

रासायनिक और जैविक खाद में फर्क

रासायनिक खाद के लगातार इस्तेमाल से उपजाऊ मिट्टी बंजर होती जा रही है और उससे उगाए गए अनाज खाने से शरीर में कई तरह की बीमारियां पनप रही हैं। एक तरह से देखें तो रासायनिक खाद से उगाई गई फसल सेहत के लिए जहर जैसी है। इसके उलट जैविक खाद डालने से खेत की मिट्टी उपजाऊ बनती है और रासायनिक खाद की तुलना में कई गुना अधिक उपज मिलती है। इस अनाज को खाने से शरीर को कोई नुकसान नहीं होता, बल्कि जैविक खाद से उगाई गई साग-सब्जी ज्यादा पौष्टिक होती है। यही कारण है कि सरकार भी जैविक खेती पर जोर दे रही है।

कैसे तैयार होती है जीव अमृत खाद

रणजीत सिंह के अनुसार 1 एकड़ खेत में किसी भी फसल के लिए खाद तैयार करने पर 200 से ₹250 का खर्च आता है। 80 लीटर जीव अमृत लिक्विड खाद तैयार कर 1 एकड़ खेत में अच्छी फसल ली जा सकती है। इसे बनाने के लिए सबसे पहले एक टंकी या ड्रम का इंतजाम करना होता है।

  • 10 किलो गोबर
  • 5 लीटर गाय मूत्र
  • 2 किलो बगीचे की मिट्टी
  • 5 किलो गुड़
  • 80 लीटर पानी

इन सभी चीजों को एक साथ मिलाकर प्रतिदिन किसी छड़ी या लाठी से घड़ी की दिशा में घुमाना होता है। 15 दिन में खाद तैयार हो जाती है। इसमें एक नल लगाकर जहां से बोरिंग का पानी खेत में गिर रहा हो, उसी धार पर खाद का नल खोल देना चाहिए, जिससे पानी के साथ यह पूरे खेत में फैल जाती है। इसे स्प्रे मशीन से भी छिड़का जा सकता है। धान, मक्का और सब्जी समेत किसी भी फसल में इस खाद को डालकर बेहतरीन उपज ली जा सकती है।

किसान के अपने शब्दों में

घन अमृत समेत कई खाद और दवाएं मैं खुद जैविक तरीके से तैयार करके डालता हूं, जिससे खेती पर खर्च कम आता है और अधिक उपज लेकर ज्यादा कमाई होती है। दूर-दूर से किसान मेरे पास आते हैं, जिन्हें मैं निशुल्क प्रशिक्षण दे रहा हूं। इस आइडिया को अपनाकर किसान कम बजट में अधिक उपज लेकर अपनी आय बढ़ा रहे हैं।
चेतन शुक्ला (Chetan Shukla) Print & Broadcast News Agency (PABNA) में 'मुख्य संपादक' हैं। वह पत्रकारिता में 15 वर्ष से ज्यादा का अनुभव रखते हैं। ये मूल रूप से उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं। इन्हें राजनीति और आम आदमी से जुड़ी खबरें लिखना पसंद है।

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