उपनाम: जैविक खाद
जैविक खेती से मालामाल हो रहे हैं किसान रणजीत, पपीता और ड्रैगन फ्रूट की खेती से बदल रहे हैं तकदीर
खेती में रसायनों के बढ़ते प्रयोग के बीच किसान रणजीत जैविक विधियों को अपनाकर न केवल शानदार मुनाफा कमा रहे हैं, बल्कि दूसरों को भी मुफ्त प्रशिक्षण दे रहे हैं।
रासायनिक DAP-NPK को टक्कर देगी यह देसी खाद, खेत की मिट्टी बनेगी उपजाऊ और लागत होगी लगभग शून्य
कृषि विभाग के उप-संचालक के अनुसार गोबर और जैविक अवशेषों से 'इंदौर विधि' द्वारा तैयार देसी खाद मिट्टी की उर्वरता बढ़ाती है और खेती की लागत को लगभग शून्य कर देती है।
मानसून आने से पहले निपटा लें ये 5 जरूरी काम, खरीफ फसलों में होगी रिकॉर्ड पैदावार और बढ़ेगा मुनाफा
दक्षिण-पश्चिम मानसून की आहट के साथ ही खरीफ की तैयारी तेज हो गई है। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि बुवाई से पहले मिट्टी जांच, गहरी जुताई, प्रमाणित बीज और बीज उपचार जैसे उपाय अपनाकर किसान उत्पादन और आमदनी दोनों बढ़ा सकते हैं।
गोबर से बनेगी जैविक खाद, किसानों की हर महीने होगी हजारों की अतिरिक्त कमाई
मध्य प्रदेश के प्रगतिशील किसान के अनुसार दुधारू पशुओं के गोबर से वर्मी कंपोस्ट बनाकर किसान खेती की लागत घटा सकते हैं और हर महीने 18 से 20 हजार रुपये तक अतिरिक्त आमदनी कमा सकते हैं।
राजस्थान का यह गांव साफ-सफाई की अनोखी मिसाल, जहां ढूंढने पर भी नहीं मिलती गंदगी
करौली जिले का सनेट गांव जनभागीदारी से स्वच्छता की मिसाल बन गया है। जिला मुख्यालय से 28 किमी दूर 5 हजार की आबादी वाले इस गांव में हर घर और दुकान के बाहर डस्टबिन लगे हैं और सड़कों पर कचरा न देख अधिकारी भी हैरान रह जाते हैं।
मशरूम की खेती से दोहरी कमाई का तरीका, मधुबनी की किसान स्वाति ने बताए आसान उपाय
मशरूम उत्पादन में इस्तेमाल होने वाले बैग को फेंकने के बजाय खाद बनाकर बेचा जा सकता है। मधुबनी की महिला किसान स्वाति एक बोरी खाद 600-700 रुपये में बेचती हैं।
अंबाला एसडी कॉलेज का 'वेस्ट टू वेल्थ' मॉडल, वर्मी कंपोस्ट के साथ जल और ऊर्जा की बचत भी
अंबाला के सनातन धर्म कॉलेज ने मंदिरों और परिसर के जैविक कचरे को वर्मी कंपोस्ट खाद में बदलने के साथ-साथ वर्षा जल संरक्षण और सौर ऊर्जा को बढ़ावा देकर प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा का संदेश दिया है। यह खाद लोगों को निशुल्क भी उपलब्ध कराई जा रही है।
पति को खोने के बाद भीख तक मांगनी पड़ी, अब आत्मनिर्भर हैं मुनक्का देवी, चला रहीं अपना कारोबार
बहराइच के निबिया बेगमपुर गांव की मुनक्का देवी ने पति की मृत्यु के बाद बेहद कठिन दौर देखा, लेकिन स्वयं सहायता समूह से जुड़कर आज वे गाय के गोबर और गोमूत्र से जैविक खाद बनाकर अपना खुद का व्यवसाय चला रही हैं।
कटहल किसानों के लिए हरा खजाना, सही प्रजाति और देखभाल से साधारण पेड़ भी देगा बंपर पैदावार
बढ़ती लागत के बीच कटहल कम खर्च में लंबे समय तक आमदनी देने वाला बहुउपयोगी पेड़ है। विशेषज्ञ के अनुसार सही प्रजाति, समय पर पोषण और वैज्ञानिक देखभाल अपनाकर किसान कम फलन वाले पेड़ों से भी अच्छा उत्पादन ले सकते हैं।
खेत की उपज का राज छिपा है मिट्टी में, बारिश से पहले जरूर करें यह अहम काम
मानसून से पहले मिट्टी की जांच और खेत की सही तैयारी करने पर किसानों की लागत घटती है और पैदावार बढ़ती है। विशेषज्ञ इसे खेती का 'ब्लड टेस्ट' बताते हैं।
यूरिया का खर्च आधा! धान के खेत में फैला दें अजोला की हरी चादर, बढ़ेगी पैदावार और घटेगा खरपतवार
धान के खेत में अजोला नाम का जलीय पौधा बिछाने से फसल को प्राकृतिक नाइट्रोजन मिलती है, जिससे यूरिया का खर्च आधा हो जाता है। यह पानी की सतह पर हरी चादर की तरह फैलकर खरपतवार रोकता है और मिट्टी की उर्वरता बढ़ाता है।
आगरा में किसान बिना केमिकल के उगा रहे जैविक देशी लौकी, नौ राज्यों तक पहुंचती है फसल
आगरा के किसान बिना किसी केमिकल और इंजेक्शन के जैविक खाद से देशी लौकी की खेती कर रहे हैं, जिसकी सप्लाई नौ राज्यों तक होती है। कम लागत और भारी मांग के चलते यह फसल किसानों को अच्छा मुनाफा दे रही है।
घर पर बनने वाली ये जैविक खाद बचाएगी सेहत और किसानों की जेब, बेचकर भी हो रही कमाई
सारण के किसान रणजीत सिंह कृषि विज्ञान केंद्र मांझी से प्रशिक्षण लेकर गोबर, गोमूत्र, मिट्टी, गुड़ और पानी से कम बजट में जैविक खाद तैयार करते हैं और दूसरे किसानों को निशुल्क सिखाते भी हैं।
घर में 6 दुधारू पशु हैं तो गोबर से हर महीने ₹20000 तक कमाई, किसान ने बताया पूरा गणित
मध्य प्रदेश के एक प्रगतिशील किसान के मुताबिक 6 दुधारू पशुओं के गोबर से वर्मी कंपोस्ट बनाकर हर महीने 18 से 20 हजार रुपये की अतिरिक्त आय अर्जित की जा सकती है. कम लागत और जैविक खाद की बढ़ती मांग इस व्यवसाय को फायदेमंद बना रही है.
पटना के नरेश अग्रवाल के घर से बरसों से नहीं निकला गीला कचरा, नगर निगम भी रह गया हैरान; बिना खर्च यूं तैयार होती है पौधों की टॉनिक
पटना के नाला रोड में रहने वाले नरेश अग्रवाल रसोई के गीले कचरे को छत पर प्रोसेस कर पौधों के लिए मुफ्त प्राकृतिक टॉनिक बनाते हैं। बिना किसी खर्च वाला यह मॉडल देखने नगर निगम की टीम तक उनके घर पहुंच चुकी है।