मध्य प्रदेश
एक दिन पहले
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मध्य प्रदेश के खंडवा जिले के किसान अब खेती में लगातार नए-नए प्रयोग कर रहे हैं। कम लागत में ज्यादा मुनाफा कमाने के मकसद से वे आधुनिक तकनीकों को तेजी से अपना रहे हैं। ऐसी ही एक कारगर तकनीक है ‘जिप्सम युक्त जैविक खाद’। इस खाद की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि किसान इसे अपने घर पर ही बेहद कम खर्च में बना ले रहे हैं। यह न सिर्फ सस्ती है, बल्कि फसलों की उपज बढ़ाने में भी बेहद असरदार साबित हो रही है।
क्या है जिप्सम खाद और कैसे होता है इसका उपयोग
जिप्सम दरअसल एक प्राकृतिक खनिज है। इसे किसी कारखाने या फैक्ट्री में नहीं बनाया जाता, बल्कि यह सीधे खदानों से निकाला जाता है। जिप्सम का सीधा इस्तेमाल भी किया जाता है, लेकिन खंडवा के किसान इसे धान के पुआल यानी भूसे के साथ मिलाकर ‘जैविक कम्पोस्ट खाद’ के रूप में तैयार कर रहे हैं। इस तरीके से मिट्टी की गुणवत्ता में बड़ा सुधार देखने को मिल रहा है और फसल का उत्पादन भी बढ़ गया है।
किसान लोकेश पालीवाल का अनुभव
खंडवा के किसान लोकेश पालीवाल इस खाद का सफलतापूर्वक उपयोग कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि उन्होंने अपनी सीताफल, हल्दी और दूसरी फसलों में जिप्सम युक्त खाद का प्रयोग किया, जिसके नतीजे बेहद उत्साहजनक रहे। लोकेश के मुताबिक, इस खाद के इस्तेमाल से मिट्टी की सेहत बेहतर होती है और फसल की गुणवत्ता में भी खासा सुधार आता है।
खाद बनाने की आसान विधि
जिप्सम युक्त कम्पोस्ट खाद बनाना बेहद सरल है। इसके लिए किसान को मुख्य रूप से दो चीजों की जरूरत पड़ती है—लगभग 100 किलो धान का पुआल और 25 किलो कृषि ग्रेड जिप्सम पाउडर। खाद बनाने के लिए सबसे पहले जमीन में एक गड्ढा खोदा जाता है या फिर किसी समतल जगह का चुनाव किया जाता है। इसके बाद पुआल की एक परत बिछाई जाती है और उसके ऊपर जिप्सम पाउडर का छिड़काव किया जाता है। इसी क्रम में पुआल और जिप्सम की एक के ऊपर एक कई परतें तैयार की जाती हैं।
कितने दिन में तैयार होती है जिप्सम खाद
खाद तैयार करते समय नमी का ध्यान रखना सबसे जरूरी होता है। इसके लिए मिश्रण पर समय-समय पर हल्का पानी छिड़कते रहना चाहिए। हर महीने इस ढेर को फावड़े से पलटना आवश्यक है, ताकि खाद के भीतर हवा का संचार बना रहे और सड़ने की प्रक्रिया तेज हो सके। करीब 4 महीने में यह पोषक तत्वों से भरपूर खाद पूरी तरह बनकर तैयार हो जाती है।
खाद इस्तेमाल से पहले करें यह काम
अगर कोई किसान सीधे खेत में जिप्सम डालना चाहता है, तो उसे कुछ वैज्ञानिक बातों का ध्यान रखना चाहिए। सबसे पहले मिट्टी की जांच करानी चाहिए, ताकि पीएच (pH) और सोडियम के स्तर का सही पता चल सके। इसके बाद खेत की गहरी जुताई करके मिट्टी को कुछ दिनों तक धूप में सुखाया जाता है।
इस चीज के साथ मिलाकर डालें जिप्सम
जिप्सम को सड़ी हुई गोबर की खाद के साथ मिलाकर डालना सबसे ज्यादा फायदेमंद माना जाता है। बुआई से पहले इसे पूरे खेत में बराबर मात्रा में फैलाकर रोटावेटर या कल्टीवेटर की मदद से मिट्टी में अच्छी तरह मिला देना चाहिए। इसके बाद खेत में पानी देने पर जिप्सम घुलकर मिट्टी के हानिकारक सोडियम को नीचे ले जाता है, जिससे जमीन उपजाऊ बन जाती है।
खारी और ऊसर जमीन में भी होगी खेती
जिप्सम में कैल्शियम और सल्फर जैसे महत्वपूर्ण पोषक तत्व मौजूद होते हैं। यह सख्त और चिकनी मिट्टी को भुरभुरी बना देता है, जिससे पौधों की जड़ों का विकास बेहतर ढंग से होता है। साथ ही यह खारी और ऊसर जमीन को दोबारा खेती लायक बनाने में भी मदद करता है।
कितनी मात्रा है जरूरी
- बंजर या खारी जमीन के लिए: प्रति एकड़ 1000 से 1500 किलो जिप्सम खाद की जरूरत होती है।
- सामान्य मिट्टी के लिए: पोषक तत्वों की कमी दूर करने के लिए 100 से 200 किलो जिप्सम पर्याप्त रहता है।
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