न सिलेंडर की चिंता, न गैस का बिल: गोबर से जल रहा चूतराराम का चूल्हा, हर कोई पूछ रहा प्लांट का राज राजस्थान 3 महीने पहले 60
बाड़मेर के चूतराराम ने सिर्फ 22 हजार रुपये की लागत से गोबर गैस प्लांट लगाकर घर का चूल्हा गोबर की गैस से जलाना शुरू किया है, और प्लांट से निकलने वाली स्लरी खेतों में जैविक खाद का काम कर रही है।

महंगे एलपीजी सिलेंडर और लगातार बढ़ते घरेलू खर्च के इस दौर में बाड़मेर शहर के विरात्रा नगर निवासी चूतराराम ने एक ऐसा रास्ता खोज निकाला है, जिससे वे कम लागत में अच्छी बचत और मुनाफा दोनों कर रहे हैं। डेयरी से मिलने वाले गोबर का इस्तेमाल करते हुए उन्होंने महज 22 हजार रुपये की लागत में गोबर गैस प्लांट तैयार कराया। नतीजा यह है कि अब उनके घर का चूल्हा गोबर से बनी गैस से जल रहा है और साथ ही खेतों के लिए जैविक खाद भी तैयार हो रही है।

दूध के साथ गोबर भी बना कमाई का जरिया

सरहदी बाड़मेर जिले के विरात्रा नगर के रहने वाले चूतराराम ने पशुपालन को सिर्फ दूध उत्पादन तक सीमित नहीं रखा, बल्कि उससे निकलने वाले गोबर को भी आमदनी और बचत का साधन बना लिया है। उन्होंने करीब चार महीने पहले डेयरी की शुरुआत की थी। डेयरी में मौजूद पशुओं से हर दिन पर्याप्त मात्रा में गोबर मिलने लगा, जिसके बेहतर उपयोग के लिए उन्होंने दो महीने पहले गोबर गैस प्लांट लगाया।

22 हजार की लागत में तैयार हुआ प्लांट

करीब 22 हजार रुपये की लागत से बने इस प्लांट में रोजाना गोबर और पानी का मिश्रण डाला जाता है। इससे बनने वाली बायोगैस सीधे घर की रसोई तक पहुंचती है, जहां इसका इस्तेमाल खाना पकाने में हो रहा है। इस व्यवस्था से एलपीजी सिलेंडर पर होने वाला खर्च काफी घट गया है और परिवार को नियमित रूप से घरेलू गैस मिल रही है।

स्लरी बन रही खेतों की जैविक खाद

इतना ही नहीं, बायोगैस प्लांट से निकलने वाला अवशेष भी बेकार नहीं जाता। प्लांट से निकलने वाली स्लरी खेतों में जैविक खाद के रूप में काम आ रही है। इससे मिट्टी की उर्वरता बढ़ती है और रासायनिक खादों पर निर्भरता घटती है। चूतराराम इस जैविक खाद का इस्तेमाल अपने खेतों में कर रहे हैं, जिससे खेती की लागत में भी कमी आ रही है।

चूतराराम बताते हैं कि पहले वे गुजरात में मजदूरी करते थे, लेकिन अब डेयरी खोलने के बाद उन्होंने गोबर गैस प्लांट लगाया है, जिससे उन्हें दोहरा फायदा मिल रहा है।

पशुपालकों के लिए बेहद उपयोगी तकनीक

पशुपालन विभाग के चिकित्सक डॉ. रावताराम भाखर के मुताबिक, पशुपालन करने वाले किसानों के लिए गोबर गैस प्लांट बेहद उपयोगी तकनीक है। इससे घरेलू ईंधन की जरूरत पूरी होने के साथ-साथ उच्च गुणवत्ता वाली जैविक खाद भी मिलती है। बायोगैस के उपयोग से एलपीजी पर निर्भरता घटती है, खेती की लागत कम होती है और पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा मिलता है।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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