छत्तीसगढ़
एक घंटा पहले
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विचारों
खेती में पोषक तत्वों का महत्व
फसलों की बंपर पैदावार के लिए मिट्टी की सेहत का दुरुस्त रहना सबसे पहली शर्त है। पौधों के सही विकास के लिए कुल 17 तरह के महत्वपूर्ण पोषक तत्वों की जरूरत होती है। इनमें नाइट्रोजन, फास्फोरस और पोटाश, जिन्हें संक्षेप में NPK कहा जाता है, प्राथमिक पोषक तत्व माने जाते हैं। सामान्य तौर पर, रासायनिक खेती में किसान इनकी भरपाई के लिए यूरिया और अन्य उर्वरकों का प्रयोग करते हैं। लेकिन जैविक खेती करने वाले किसानों के लिए भी अब यह चिंता का विषय नहीं रहा, क्योंकि लाभकारी बैक्टीरिया और जैविक कल्चर के माध्यम से इन तत्वों की पूर्ति आसानी से की जा सकती है।
मदर कल्चर से घोल बनाने की पूरी विधि
बिलासपुर स्थित डिपार्टमेंट ऑफ हॉर्टिकल्चर के वेजिटेबल साइंस के छात्र रोहन कुमार वर्मा ने जैविक तरीके से NPK कल्चर को तैयार करने और उसे खेत में इस्तेमाल करने का एक कारगर तरीका बताया है। इस प्रक्रिया को अपनाने से किसान बाजार से बार-बार सामान खरीदने की झंझट से बच सकते हैं।
कल्चर तैयार करने की विधि इस प्रकार है:
- सबसे पहले 200 लीटर क्षमता वाला एक प्लास्टिक का ड्रम लें।
- इसमें 100 लीटर साफ पानी भरें।
- अब इस पानी में 500 एमएल मदर कल्चर को मिलाएं।
- कल्चर के सूक्ष्मजीवों को पोषण देने के लिए इसमें 1 किलो गुड़ का घोल डाल दें।
- पानी, मदर कल्चर और गुड़ को अच्छी तरह से एक लकड़ी की सहायता से मिला लें।
घोल तैयार करने में रखें ये सावधानियां
मिश्रण तैयार करने के बाद, ड्रम को सीधे धूप से बचाने के लिए किसी छायादार जगह पर ढंक कर रखें। रोहन के अनुसार, इस घोल को सक्रिय करने के लिए करीब 15 दिन तक प्रक्रिया दोहरानी पड़ती है। इन 15 दिनों तक रोज सुबह और शाम को घोल को घड़ी की दिशा में सावधानीपूर्वक चलाएं। इस निरंतर मंथन से घोल में बैक्टीरिया की वृद्धि होती है, जो इसे खाद के रूप में प्रभावी बनाता है। 15 दिनों की अवधि पूरी होने के बाद, यह जैविक घोल खेत में छिड़काव या सिंचाई के लिए पूरी तरह तैयार हो जाता है।
कल्चर को दोबारा कैसे मल्टीप्लाई करें
इस विधि का सबसे बड़ा लाभ यह है कि किसान को हर बार बाजार से मदर कल्चर खरीदने की आवश्यकता नहीं पड़ती। इसे आप अपने फार्म पर ही मल्टीप्लाई कर सकते हैं। जब आपका घोल तैयार हो जाए, तो उसमें से करीब 10 लीटर कल्चर बचाकर एक तरफ रख लें। अगली बार नया कल्चर बनाने के लिए उस 10 लीटर बचे हुए घोल में 90 लीटर पानी और करीब 2 किलो गुड़ मिला दें। दोबारा वही 15 दिन वाली प्रक्रिया अपनाएं। इस तरह आप बार-बार एक ही बार खरीदे गए मदर कल्चर से खाद तैयार करते रह सकते हैं।
मिट्टी की उर्वरता और रासायनिक निर्भरता
रोहन कुमार वर्मा का मानना है कि फसलों के समुचित विकास के लिए 17 पोषक तत्वों का सही संतुलन अनिवार्य है। जब किसान अपने खेतों में जैविक कल्चर का नियमित उपयोग करते हैं, तो इससे मिट्टी की बनावट और उर्वरता दोनों में सुधार आता है। रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम होने से मिट्टी में मौजूद मित्र कीटों और सूक्ष्मजीवों को भी जीवनदान मिलता है। रोहन स्वयं भी अपने फार्म पर इसी जैविक विधि का पालन करते हैं और इसका परिणाम सकारात्मक रहा है। जैविक खाद का यह तरीका न केवल खर्चीला नहीं है, बल्कि यह लंबे समय तक मिट्टी की गुणवत्ता बनाए रखने में भी मददगार साबित हो रहा है। जो किसान जैविक खेती की ओर कदम बढ़ा रहे हैं, उनके लिए यह तरीका एक सरल और सस्ता विकल्प है।
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