खेती का खर्च घटाएं: घर पर पके हुए केलों से तैयार करें जैविक पोटाश, जानें आसान तरीका छत्तीसगढ़ एक घंटा पहले 3
छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में एक किसान ने पके हुए केलों का उपयोग करके जैविक पोटाश बनाने की विधि साझा की है, जो फसलों के विकास और गुणवत्ता में सुधार के साथ लागत को भी कम करती है।

जैविक खेती की ओर बढ़ते कदम

छत्तीसगढ़ में खरीफ का मौसम चल रहा है और धान की रोपाई का काम लगभग पूरा हो चुका है। इस समय किसानों का पूरा ध्यान अपनी फसलों की सेहत सुधारने और पैदावार को अधिक से अधिक बढ़ाने पर टिका है। पौधों के सही विकास के लिए नाइट्रोजन, फॉस्फोरस और पोटाश जैसे पोषक तत्वों की बहुत अधिक आवश्यकता होती है। आज के समय में रासायनिक उर्वरकों की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं, जिसके कारण किसानों पर आर्थिक बोझ बढ़ता जा रहा है। ऐसे में बिलासपुर जिले के नगर पंचायत मल्हार के रहने वाले किसान और जैविक खेती के विशेषज्ञ यदुनंदन प्रसाद वर्मा ने एक बहुत ही कारगर और सस्ता विकल्प साझा किया है। उन्होंने पके हुए केलों के इस्तेमाल से घर पर ही जैविक पोटाश तैयार करने की विधि बताई है।

पौधों के लिए क्यों जरूरी है पोटाश

यदुनंदन प्रसाद वर्मा का मानना है कि फसलों के लिए पोटाश एक अत्यंत आवश्यक तत्व है। यह पौधों की जड़ों को मजबूती प्रदान करने के साथ-साथ दानों की गुणवत्ता को बेहतर बनाता है और फसल को स्वस्थ रखने में अहम भूमिका निभाता है। वैज्ञानिक दृष्टिकोण से भी यह सिद्ध हो चुका है कि पूरी तरह पका हुआ केला पोटेशियम का एक बेहतरीन और प्राकृतिक स्रोत है। अक्सर बाजार में जो केले बहुत ज्यादा पक जाने के कारण बिक नहीं पाते हैं, उन्हें फेंकने के बजाय किसान जैविक पोटाश बनाने में काम में ले सकते हैं। इससे कचरे का प्रबंधन भी होता है और खेती की लागत में भी बड़ी बचत होती है।

कैसे तैयार करें जैविक पोटाश

जैविक पोटाश बनाने की प्रक्रिया को यदुनंदन प्रसाद वर्मा ने बहुत सरल तरीके से समझाया है। एक एकड़ खेत के लिए जैविक खाद तैयार करने के लिए नीचे दी गई विधि अपनाएं:

  • सबसे पहले लगभग 10 किलो पूरी तरह पके हुए केले लें और उन्हें अच्छी तरह से मैश कर लें।
  • एक 50 लीटर क्षमता वाला ड्रम लें और उसमें मैश किए हुए केले डाल दें।
  • इस मिश्रण में 3 किलो गुड़ और लगभग 30 लीटर पानी को अच्छे से मिला लें।
  • मिश्रण तैयार होने के बाद ड्रम के ढक्कन को मजबूती से बंद कर दें।
  • शुरुआती एक हफ्ते तक रोजाना सुबह और शाम को डंडे की मदद से इस घोल को चलाते रहें ताकि अंदर बनने वाली गैस बाहर निकल सके।
  • एक हफ्ते के बाद ड्रम को बंद रखें और अगले 3 महीने तक हर 10 से 15 दिन के अंतराल पर ढक्कन खोलकर गैस बाहर निकालते रहें।

खेत में उपयोग का तरीका और फायदे

3 महीने की अवधि पूरी होने के बाद, यह मिश्रण पूरी तरह से सड़कर एक प्रभावी तरल खाद में बदल जाएगा। किसान इस तैयार खाद को सीधे खेत में छिड़काव के माध्यम से दे सकते हैं। यदि खेत में सिंचाई हो रही हो, तो इसे पानी की नाली में भी डाला जा सकता है, जिससे यह पूरे खेत में समान रूप से फैल जाएगा।

यदुनंदन प्रसाद वर्मा के अनुसार, यह जैविक घोल रासायनिक पोटाश की तरह ही पौधों को पोटेशियम उपलब्ध कराने में सक्षम है। इसके अलावा, इस मिश्रण में अन्य सूक्ष्म पोषक तत्व भी प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं, जो न केवल पौधों की बढ़वार और उनकी हरियाली को बढ़ाते हैं, बल्कि दानों को भी मजबूती देते हैं। इस प्राकृतिक खाद का सबसे बड़ा लाभ यह है कि किसान बहुत कम लागत में बेहतर पैदावार प्राप्त कर सकते हैं और रासायनिक खाद पर अपनी निर्भरता को काफी हद तक कम कर सकते हैं।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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