झारखंड
2 घंटे पहले
3
विचारों
खेती से हटकर जैविक खाद का रास्ता चुना
आज के दौर में जहां अधिकांश किसान पारंपरिक खेती या रसायनों पर आधारित फसलों की ओर भाग रहे हैं, वहीं पलामू जिले की एक महिला किसान ने लीक से हटकर रास्ता चुना है। चैनपुर प्रखंड के चेडाबार गांव की रहने वाली रीना देवी ने जैविक खाद के व्यवसाय को अपनाकर आत्मनिर्भरता की एक नई कहानी लिखी है। सरकारी प्रोत्साहन और उद्यान विभाग के सहयोग से, उन्होंने खेती के बजाय खाद उत्पादन को अपना प्राथमिक व्यवसाय बना लिया है। पिछले करीब दो वर्षों से वह लगातार इस दिशा में काम कर रही हैं और अपनी मेहनत के दम पर सफलता की सीढ़ियां चढ़ रही हैं।
प्रशिक्षण से मिली सफलता की नींव
रीना देवी ने इस व्यवसाय की शुरुआत पूरी तैयारी और वैज्ञानिक तरीके से की। उन्होंने बताया कि इस काम में उतरने से पहले उन्होंने कृषि विज्ञान केंद्र से जैविक खाद बनाने का गहन प्रशिक्षण लिया है। इसी प्रशिक्षण के दौरान उन्होंने नाडेप खाद निर्माण की बारीकियां सीखीं, जिसके बाद उन्होंने वर्मी कंपोस्ट यूनिट स्थापित करने का फैसला लिया। वर्तमान में, उनके यूनिट में पांच बेड लगे हुए हैं, जहां वह बड़े स्तर पर केंचुआ खाद तैयार कर रही हैं। इसके अलावा, वह ब्रह्मास्त्र और निर्मास्त्र जैसे महत्वपूर्ण जैविक उत्पाद भी तैयार करती हैं, जिनकी मांग स्थानीय किसानों के बीच तेजी से बढ़ रही है।
खाद बनाने की विशेष प्रक्रिया
रीना देवी ने खाद बनाने की अपनी विधि साझा करते हुए बताया कि यह प्रक्रिया काफी सरल लेकिन धैर्यपूर्ण है। सबसे पहले, जमीन पर सागवान के पत्ते और पेड़-पौधों के जैविक कचरे की एक परत बिछाई जाती है। इसके बाद मिट्टी और गोबर की परतें डाली जाती हैं। इस तरह पत्ते, मिट्टी और गोबर की कुल छह परतें तैयार की जाती हैं। अंत में, इन परतों के बीच केंचुए छोड़े जाते हैं। उचित नमी और निरंतर देखभाल के साथ, यह जैविक खाद करीब 60 से 65 दिनों में पूरी तरह तैयार हो जाती है।
मुनाफे का गणित और बाजार से सस्ती खाद
रीना देवी अपने उत्पादों को बाजार की तुलना में काफी किफायती दामों पर उपलब्ध कराती हैं, जिससे स्थानीय किसानों को काफी फायदा होता है। उनके पास मौजूद एक यूनिट से एक बार में दो क्विंटल से अधिक केंचुआ खाद प्राप्त हो जाती है। वह इसे 20 रुपये प्रति किलो की दर से बेचती हैं, जबकि खुले बाजार में इसकी कीमत 50 से 60 रुपये प्रति किलो तक होती है। उन्होंने बताया कि खाद का एक बैच तैयार होने पर उन्हें अच्छी आमदनी हो जाती है। इस पूरे कारोबार से वह प्रति सीजन 25 से 30 हजार रुपये तक की कमाई कर रही हैं।
ग्रामीण महिलाओं के लिए प्रेरणा
रीना देवी का यह छोटा सा उद्यम अब न केवल उनकी आर्थिक स्थिति में सुधार ला रहा है, बल्कि ग्रामीण क्षेत्र में महिलाओं के लिए रोजगार के नए अवसर भी खोल रहा है। उद्यान विभाग की मदद और अपनी लगन से उन्होंने साबित कर दिया है कि यदि सही दिशा में प्रशिक्षण और प्रयास किए जाएं, तो खेती के अलावा भी आय के बेहतर साधन खोजे जा सकते हैं। वह अब न केवल किसानों को जैविक खाद उपलब्ध करा रही हैं, बल्कि अन्य महिलाओं को भी आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित कर रही हैं।
Comments
0 comment