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एक घंटा पहले
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कचरा प्रबंधन से कमाई का बेहतरीन मौका
आज के दौर में कचरा केवल समस्या नहीं बल्कि कमाई का एक बड़ा जरिया भी बन चुका है। अगर आप अपने आस-पास के माहौल को साफ रखने के साथ-साथ आर्थिक रूप से सशक्त होना चाहती हैं, तो गीले कचरे से खाद बनाने का काम आपके लिए एक शानदार विकल्प हो सकता है। इसके लिए आपको किसी बड़े निवेश या बहुत ज्यादा मैनपावर की जरूरत नहीं है। अगर 8 से 10 महिलाएं आपस में मिलकर एक स्वयं सहायता समूह तैयार कर लें, तो वे बहुत ही छोटे स्तर पर इस काम की शुरुआत कर सकती हैं।
सरकार से मिलती है मदद
सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि भारत सरकार महिला स्वयं सहायता समूहों को प्रोत्साहित करने के लिए कई तरह की सुविधाएं प्रदान करती है। इस बिजनेस को शुरू करने के लिए आपको लोन और सरकारी सब्सिडी जैसी योजनाओं का लाभ मिल सकता है, जो आपकी शुरुआती पूंजी की समस्या को हल कर देता है। जैविक कचरे से कंपोस्ट खाद तैयार करने का मॉडल न केवल पर्यावरण के लिए अच्छा है, बल्कि यह आत्मनिर्भर भारत की दिशा में एक बड़ा कदम भी है।
सीईईडब्ल्यू एक्सपर्ट की राय
काउंसिल ऑन एनर्जी, एनवायरनमेंट एंड वॉटर (CEEW) की सीनियर प्रोग्राम लीड प्रियंका सिंह के अनुसार, सामुदायिक समूह कचरा प्रबंधन के क्षेत्र में क्रांतिकारी भूमिका निभा रहे हैं। प्रियंका सिंह का कहना है कि भारत के कई शहरों में 8 से 10 महिलाओं के समूह और अनौपचारिक सफाईकर्मी मिलकर कचरा प्रबंधन को एक सफल उद्योग के रूप में आगे बढ़ा रहे हैं। ठोस कचरा प्रबंधन नियम 2026 के तहत अब इन समूहों को औपचारिक वेस्ट वैल्यू चेन में शामिल करना अनिवार्य और जरूरी हो गया है, जिससे उनके काम को आधिकारिक पहचान मिल रही है।
सफलता के लिए मॉडल और साझेदारी
महिलाएं इस सप्लाई चेन में अपनी जरूरत और क्षेत्र के अनुसार कहीं भी काम शुरू कर सकती हैं। उदाहरण के तौर पर, आप उडुपी की तरह गैर-सरकारी संगठनों यानी NGO के साथ मिलकर काम कर सकती हैं, जहाँ कंपोस्टिंग और सूखे कचरे का प्रबंधन बहुत ही व्यवस्थित तरीके से होता है। दूसरी ओर, अंबिकापुर का मॉडल भी प्रेरणा देने वाला है। वहां के शहरी स्थानीय निकाय के साथ 32 स्वयं सहायता समूह मिलकर कचरा एकत्र करने, उसकी छंटाई करने और ठोस व तरल संसाधन प्रबंधन केंद्रों को संचालित करने का काम कर रहे हैं।
प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण की जरूरत
क्या इस काम के लिए किसी विशेष ट्रेनिंग की आवश्यकता होती है? एक्सपर्ट प्रियंका सिंह बताती हैं कि काम शुरू करने के लिए समूहों को अपनी क्षमता का विस्तार करना जरूरी है। इसके लिए आप इस क्षेत्र में सक्रिय सीएसओ (CSOs) या एनजीओ के साथ जुड़ सकती हैं। साथ ही, सरकारी स्तर पर मान्यता प्राप्त ट्रेनिंग प्रोग्राम भी उपलब्ध हैं जो आपको कचरा प्रबंधन की बारीकियां सिखाते हैं। स्त्री मुक्ति संगठन, साहस और हसीरुदाला जैसे संस्थानों ने यह साबित कर दिया है कि कैसे सही मार्गदर्शन मिलने पर महिलाएं जैविक कचरे को आजीविका का बड़ा साधन बना सकती हैं। इस तरह का छोटा सा प्रयास न केवल आपके क्षेत्र को कचरा मुक्त रखेगा, बल्कि आपके समूह के लिए एक स्थाई आय का स्रोत भी सुनिश्चित करेगा।
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