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3 घंटे पहले
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गीले कचरे को समझें कमाई का जरिया
आमतौर पर लोग अपने घरों से निकलने वाले गीले कचरे को कूड़ा समझकर बाहर फेंक देते हैं, लेकिन हकीकत यह है कि यह कचरा किसी कीमती संसाधन से कम नहीं है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सही तरीके से इसका प्रबंधन किया जाए, तो यह कचरा एक बड़े उद्योग का कच्चा माल बन सकता है। इससे न केवल पर्यावरण को लाभ होता है, बल्कि लोग अपना स्टार्टअप शुरू करके सालाना अच्छी कमाई भी कर सकते हैं। यह कचरा इतना मूल्यवान है कि इसे रीसायकल करके आप अपनी नौकरी के विकल्प के रूप में एक स्वतंत्र व्यवसाय स्थापित कर सकते हैं।
गीले कचरे से क्या-क्या बनाया जा सकता है?
काउंसिल ऑन एनर्जी, एनवायरनमेंट एंड वॉटर (सीईईडब्ल्यू) की सीनियर प्रोग्राम लीड प्रियंका सिंह के अनुसार, जैविक या गीले कचरे को संसाधित करके कई उपयोगी उत्पाद तैयार किए जा सकते हैं। इन उत्पादों में मुख्य रूप से शामिल हैं:
- बायोगैस
- कंप्रेस्ड बायोगैस (CBG)
- जैविक खाद (कंपोस्ट)
- तरल किण्वित जैविक खाद (जो CBG निर्माण के दौरान एक उप-उत्पाद के रूप में प्राप्त होती है)
घर से शुरू करें अपना छोटा प्लांट
यदि आप इसे एक छोटे स्तर से शुरू करना चाहते हैं, तो इसके लिए बहुत अधिक जगह या भारी निवेश की आवश्यकता नहीं है। घर या छोटी जगह पर इस काम को शुरू करने के दो सबसे प्रभावी तरीके हैं: कंपोस्टिंग और छोटे बायोगैस प्लांट।
कंपोस्टिंग के फायदे
प्रियंका सिंह बताती हैं कि कंपोस्टिंग के जरिए तैयार की गई खाद पोषक तत्वों से भरपूर होती है। यह न केवल रासायनिक खाद का एक बेहतरीन और सुरक्षित विकल्प है, बल्कि मिट्टी की उर्वरता और सेहत को सुधारने में भी मदद करती है। कंपोस्टिंग की प्रक्रिया काफी तेज हो सकती है। इसका एक बेहतरीन उदाहरण राजकोट का है, जहां जैविक कचरे को मशीन में प्रोसेस करने के बाद महज 10 दिनों में खाद बनकर तैयार हो गई थी। इस प्रक्रिया में बदबू को नियंत्रित करने के लिए एक विशेष दवा जिसे इनोक्यूलम कहा जाता है, उसका उपयोग किया गया था। ऐसी छोटी कंपोस्टिंग इकाइयां स्थानीय स्तर पर कचरे का उपयोग करके कहीं भी आसानी से लगाई जा सकती हैं। इनकी सबसे बड़ी खूबी यह है कि बड़ी औद्योगिक इकाइयों की तुलना में इन्हें लगाने के लिए सरकारी अनुमति की जटिल प्रक्रिया भी कम होती है।
छोटे बायोगैस प्लांट का महत्व
छोटे बायोगैस प्लांट मुख्य रूप से एनारोबिक डाइजेशन यानी ऑक्सीजन रहित माहौल में कचरे को सड़ाने की तकनीक पर आधारित होते हैं। यह उन स्थानों के लिए सबसे अधिक फायदेमंद साबित होते हैं जहां बड़ी मात्रा में कचरा उत्पन्न होता है और उस गैस का तत्काल उपयोग किया जा सकता है। यदि आपके पास प्रतिदिन करीब 1 टन कचरा उपलब्ध है, जिसका उपयोग खाना पकाने जैसी ऊर्जा जरूरतों के लिए किया जा सकता है, तो एक छोटा बायोगैस प्लांट लगाना बेहद सस्ता और आर्थिक रूप से लाभदायक सिद्ध हो सकता है। यह न केवल कचरा प्रबंधन में मदद करता है, बल्कि ऊर्जा का भी एक स्थायी स्रोत प्रदान करता है।
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