उपनाम: आम की खेती
जापान का ढाई लाख रुपये किलो वाला मियाजाकी आम अब जमशेदपुर में, 500 रुपये प्रति पीस में चखें स्वाद
जमशेदपुर के अमृत इक्का ने शौकिया तौर पर जापान के मशहूर मियाजाकी आम की खेती की और इस वर्ष उनके पेड़ों में 100 से अधिक फल लगे हैं। फिलहाल वे लोगों को स्वाद चखाने के लिए यह आम करीब 500 रुपये प्रति पीस की दर से उपलब्ध करा रहे हैं।
लक्ष्मण भोग आम: पतले छिलके और रसभरे गूदे की मनमोहक खुशबू ग्राहकों को खींच लाती है, बाजार में मचा रही धूम
सीधी के रामपुर नैकिन क्षेत्र में प्रकृति प्रेमी विनय सिंह के बगीचे में उगने वाला लक्ष्मण भोग आम अपने खट्टे-मीठे स्वाद, पतले छिलके और रेशारहित रसीले गूदे के कारण लोगों की पहली पसंद बनता जा रहा है। इसकी मांग देश के साथ-साथ विदेशों में भी बनी हुई है।
गोंडा के किसान प्रवीण सिंह के 8 एकड़ बाग में 30 किस्म के आम, एक सीजन में लाखों की आमदनी
गोंडा के मनकापुर में किसान प्रवीण सिंह बागवानी से पारंपरिक खेती के मुकाबले बेहतर कमाई कर रहे हैं। उनके बाग में लगे विभिन्न किस्म के आमों की मांग स्थानीय बाजार के साथ आसपास के जिलों में भी बनी रहती है।
हजारीबाग का यह गांव बना 'मैंगो विलेज', आम की खेती ने संवारी सैकड़ों परिवारों की जिंदगी
हजारीबाग जिले के ईचाक प्रखंड स्थित आरा गांव में 2000 से अधिक आम के पेड़ और दर्जनों बागान हैं, जो सैकड़ों परिवारों की आजीविका का मुख्य आधार बन चुके हैं। यहां के स्वादिष्ट आमों की मांग झारखंड के साथ-साथ बिहार के कई शहरों तक है।
आम है या केला? जमुई के कनिष्क ने उगाया 18 इंच लंबा 'बनाना मैंगो', थाईलैंड में है मशहूर
जमुई के नर्सरी संचालक कनिष्क ने थाईलैंड की प्रसिद्ध नस्ल 'बनाना मैंगो' तैयार की है, जो देखने में केले जैसा दिखता है। इस आम की लंबाई 18 इंच और एक फल का वजन 800 ग्राम तक हो सकता है।
आम की भरपूर पैदावार चाहिए तो तुड़ाई से पहले अपनाएं ये जरूरी सावधानियां
मेरठ के जिला उद्यान अधिकारी ने बढ़ते तापमान के बीच आम उत्पादकों को हल्की सिंचाई, सही समय पर तुड़ाई और लाल फ्रूट कवर बैग के इस्तेमाल की सलाह दी है। इन उपायों से फसल की गुणवत्ता और उत्पादन दोनों बेहतर हो सकते हैं।
'पेडा रसालु' आम: मिठाई जैसी मिठास और रस से लबालब, कृषि वैज्ञानिक डॉ. दीपक मेहंदीरत्ता से जानें इसकी खासियतें
बड़े आकार और बेहद रसीलेपन की वजह से 'पेडा रसालु' आम लोगों की पहली पसंद बन गया है। कृषि वैज्ञानिक डॉ. दीपक मेहंदीरत्ता के मुताबिक यह आम सीधे खाने, जूस और मिठाई बनाने में इस्तेमाल होता है और इसकी मुख्य खेती फिलहाल बिहार तथा झारखंड के कुछ जिलों में होती है।