'पेडा रसालु' आम: मिठाई जैसी मिठास और रस से लबालब, कृषि वैज्ञानिक डॉ. दीपक मेहंदीरत्ता से जानें इसकी खासियतें उत्तर प्रदेश 3 महीने पहले 56
बड़े आकार और बेहद रसीलेपन की वजह से 'पेडा रसालु' आम लोगों की पहली पसंद बन गया है। कृषि वैज्ञानिक डॉ. दीपक मेहंदीरत्ता के मुताबिक यह आम सीधे खाने, जूस और मिठाई बनाने में इस्तेमाल होता है और इसकी मुख्य खेती फिलहाल बिहार तथा झारखंड के कुछ जिलों में होती है।

गर्मियों के मौसम में फलों के राजा आम की तमाम किस्में बाज़ार में अपनी रौनक बिखेरती हैं, मगर इन सबके बीच 'पेडा रसालु' आम अपनी अलग ही पहचान बनाए हुए है। अपने बड़े आकार, बेहद रसीलेपन और अनूठे स्वाद के चलते यह आम के शौकीनों की पहली पसंद बन चुका है। तेलुगु भाषा में 'पेडा' का अर्थ बड़ा होता है और इसी वजह से इस आम को यह नाम मिला। दक्षिण भारत की सबसे लोकप्रिय आम किस्मों में शुमार यह आम अब हर तरफ चर्चा का विषय बना हुआ है। इसका गूदा बेहद मुलायम, लगभग रेशे-रहित और कुदरती मिठास से भरा होता है, जबकि इसकी भीनी-भीनी खुशबू इसे और भी खास बना देती है। गर्मियों में इसे काटकर या रस निकालकर बड़े चाव से खाया जाता है।

रसीलेपन और मिठास से जुड़ा है इसका नाम

कृषि वैज्ञानिक डॉ. दीपक मेहंदीरत्ता ने बताया कि पेडा रसालु आम का नाम इसके रसीलेपन की वजह से पड़ा है। यह आम बेहद रसदार होता है। 'पेडा' का मतलब मिठाई से है, इस लिहाज़ से यह मिठाई जैसा मीठा आम कहलाता है। साथ ही इसका स्वाद बेहद लजीज़ होता है। उन्होंने बताया कि रसालु आम बहुत अधिक रस वाला और रसीला होता है, और रसदार तथा मीठा होने के कारण ही इसे रसालु आम कहा जाता है।

क्या है पेडा रसालु आम की खासियत

इस आम की खासियत यह है कि यह बहुत मीठा होने के साथ-साथ बेहद रसीला भी होता है और मुंह में जाते ही एकदम घुल जाता है। पकने पर इसका रंग सुनहरा पीला और चमकदार हो जाता है। पका हुआ आम आकार में थोड़ा बड़ा और लंबा रहता है, और कई बार यह अंडाकार रूप में भी आ जाता है।

स्वाद में लाजवाब और इस्तेमाल में आसान

इस आम की त्वचा बहुत हल्की होती है, जिसके चलते इसका छिलका कोई भी आसानी से उतार सकता है। रसीला और खुशबूदार होने की वजह से इसे सीधे खाने के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है। इसके अलावा इसका उपयोग जूस बनाने और मिठाई तैयार करने में भी होता है।

कहां और कैसी मिट्टी में होती है खेती

डॉ. मेहंदीरत्ता के अनुसार, यह आम फिलहाल मुख्य रूप से बिहार और झारखंड के कुछ जिलों में उगाया जाता है। इसकी खेती के लिए सिंचित और उर्वर मिट्टी की ज़रूरत होती है, यानी ऐसी मिट्टी जिसमें उर्वरा शक्ति (फर्टिलिटी) अच्छी हो। बिहार और झारखंड का मौसम इसके लिए अनुकूल माना जाता है, इसलिए वहां इसकी आसानी से खेती कर अच्छी पैदावार ली जा सकती है। कुल मिलाकर यह आम खाने में बेहद स्वादिष्ट और लाजवाब होता है।

चेतन तिवारी पाबना के उत्तर प्रदेश संवाददाता हैं और राज्य की राजनीति, प्रशासन तथा जमीनी मुद्दों को कवर करते हैं। लखनऊ में रहते हुए वे जिलों से लेकर विधानसभा तक की खबरें संतुलित रिपोर्टिंग के साथ पाठकों तक पहुंचाते हैं। आम लोगों के मुद्दों और स्थानीय घटनाओं पर उनका खास फोकस रहता है।

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