लक्ष्मण भोग आम: पतले छिलके और रसभरे गूदे की मनमोहक खुशबू ग्राहकों को खींच लाती है, बाजार में मचा रही धूम जीवनशैली 15 घंटे पहले 3
सीधी के रामपुर नैकिन क्षेत्र में प्रकृति प्रेमी विनय सिंह के बगीचे में उगने वाला लक्ष्मण भोग आम अपने खट्टे-मीठे स्वाद, पतले छिलके और रेशारहित रसीले गूदे के कारण लोगों की पहली पसंद बनता जा रहा है। इसकी मांग देश के साथ-साथ विदेशों में भी बनी हुई है।

गर्मी का मौसम दस्तक देते ही बाजारों में फलों के राजा आम की रौनक छा जाती है। तमाम किस्मों की भीड़ के बीच लक्ष्मण भोग आम अपनी खास पहचान और लाजवाब स्वाद के दम पर लोगों का ध्यान अपनी ओर खींच रहा है। हल्की खुशबू, रसीला गूदा और बिना रेशे वाली बनावट इसे आम प्रेमियों की पहली पसंद बना रही है।

सीधी जिले के रामपुर नैकिन क्षेत्र में भी इस किस्म की खेती हो रही है और लोगों को इसका स्वाद खूब भा रहा है। यहां के निवासी और प्रकृति प्रेमी विनय सिंह ने शौकिया तौर पर एक अनोखा आम का बगीचा तैयार किया है, जिसमें प्रसिद्ध लक्ष्मण भोग किस्म भी शामिल है।

स्वाद में बेहद खास, गूदा पूरी तरह रेशारहित

विनय सिंह के बाग में लक्ष्मण भोग आम की अच्छी पैदावार हो रही है। उनका कहना है कि स्वाद के मामले में यह आम बेहद खास होता है। इसमें हल्की खटास और प्राकृतिक मिठास का ऐसा संतुलन मिलता है, जो इसे बाकी किस्मों से अलग बनाता है। इसका गूदा पूरी तरह रेशारहित होता है, जिससे इसे खाने में अलग ही आनंद आता है।

आम के मौसम में यह किस्म अपने खट्टे-मीठे स्वाद, पतले छिलके और बिना रेशे वाले रसीले गूदे के लिए जानी जाती है। यही वजह है कि स्वाद और गुणवत्ता के कारण इसकी मांग सिर्फ देश में ही नहीं, बल्कि विदेशों में भी बनी हुई है।

मनमोहक खुशबू दूर से ही खींच लाती है ग्राहक

इस आम की मनमोहक खुशबू लोगों को दूर से ही अपनी ओर आकर्षित कर लेती है। बाजार में पहुंचते ही यह किस्म ग्राहकों को अपनी सुगंध और स्वाद से लुभा लेती है।

लोककथाओं से जुड़ा है इतिहास

कृषि वैज्ञानिक डॉ. शैलेंद्र गौतम के अनुसार, लक्ष्मण भोग आम का इतिहास लोककथाओं और पौराणिक मान्यताओं से जुड़ा हुआ माना जाता है। जनश्रुतियों के मुताबिक रामायण काल में भगवान राम को भोग लगाने से पहले लक्ष्मण ने इस आम का स्वाद चखा था।

कहा जाता है कि भगवान राम के लिए चुने जाने के कारण ही इस आम का नाम लक्ष्मण भोग पड़ा। यह मान्यता भले ही लोककथाओं पर आधारित है, लेकिन इसी वजह से इस आम का सांस्कृतिक महत्व भी और बढ़ जाता है।

चेतन शुक्ला (Chetan Shukla) Print & Broadcast News Agency (PABNA) में 'मुख्य संपादक' हैं। वह पत्रकारिता में 15 वर्ष से ज्यादा का अनुभव रखते हैं। ये मूल रूप से उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं। इन्हें राजनीति और आम आदमी से जुड़ी खबरें लिखना पसंद है।

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