थाईलैंड का बनाना मैंगो अब बिहार में, 18 इंच लंबा और 800 ग्राम वजनी—देखकर केला समझ बैठेंगे लोग बिहार एक घंटा पहले 3
जमुई के नर्सरी संचालक कनिष्क ने थाईलैंड की नस्ल वाला बनाना मैंगो तैयार किया है, जिसकी लंबाई 18 इंच और वजन 800 ग्राम तक हो सकता है। उनके पास देश-विदेश की करीब साढ़े चार सौ किस्मों के आम के पौधे मौजूद हैं।

आम का मौसम शुरू होते ही लोग तरह-तरह की किस्मों का स्वाद चखते हैं और अपने बागों में नई वैरायटी लगाने की कोशिश भी करते हैं। आमतौर पर जो आम उगाए जाते हैं वे या तो सामान्य नस्ल के होते हैं या कुछ खास देसी किस्मों के। लेकिन जमुई के कनिष्क ने एक ऐसी पौध तैयार की है, जिसका फल देखकर कोई भी असमंजस में पड़ जाए कि यह आम है या केला।

केले जैसा दिखने वाला आम

जमुई जिले के रहने वाले नर्सरी संचालक कनिष्क ने थाईलैंड की नस्ल वाला बनाना मैंगो उगाया है। इस आम की सबसे बड़ी खासियत इसकी लंबाई है, जो 18 इंच तक पहुंच सकती है, जबकि वजन 800 ग्राम तक हो सकता है। दिखने में यह बिल्कुल केले जैसा लगता है और पकने के बाद इसका रंग भी केले की तरह पीला हो जाता है।

कोलकाता से लाया मूल पौधा

कनिष्क ने इस किस्म का मदर प्लांट भी तैयार किया है, ताकि भविष्य में इसका उत्पादन और बड़े पैमाने पर किया जा सके। उन्होंने बताया कि यह आम मूल रूप से थाईलैंड की नस्ल है, लेकिन भारत में भी इसे कई जगह उगाया जाता है। उनके मुताबिक गुजरात और महाराष्ट्र के कुछ इलाकों में इसकी खेती होती है। कनिष्क ने बताया कि बनाना मैंगो का मूल पौधा वे कोलकाता से लेकर आए थे।

स्वाद और गूदे की खूबी

उन्होंने बताया कि यह आम स्वाद और आकार दोनों में सामान्य आमों से बड़ा होता है और इसका गूदा अपेक्षाकृत कम रेशेदार होता है। कनिष्क का मानना है कि बदलते दौर में किसानों को केवल पारंपरिक किस्मों पर निर्भर रहने के बजाय अधिक मूल्य वाली नई प्रजातियों को भी अपनाना चाहिए। उनके अनुसार बनाना मैंगो जैसी किस्में किसानों को बेहतर बाजार और ज्यादा आमदनी का अवसर दे सकती हैं।

तीन वैरायटी में उपलब्ध

कनिष्क बताते हैं कि बनाना मैंगो की सामान्यतः तीन वैरायटी होती हैं। इनमें एक पीले रंग की होती है, जो बिल्कुल केले जैसी दिखती है। इसके अलावा दो और किस्में मौजूद हैं, जिनमें उन्होंने लाल रंग वाले बनाना मैंगो का पौधा भी तैयार किया है। उन्होंने बताया कि इसका एक फल अधिकतम 18 इंच तक लंबा हो सकता है और एक आम का वजन 8 सौ ग्राम तक पहुंच सकता है।

साढ़े चार सौ किस्मों का संग्रह

सामान्य तौर पर इसके फल 12 इंच तक लंबे होते हैं और उनका वजन 4 सौ से 6 सौ ग्राम के बीच रहता है। कनिष्क ने बताया कि फिलहाल उनके पास देश-विदेश की करीब साढ़े चार सौ किस्मों के आम के पौधे मौजूद हैं। इनमें कई ऐसी दुर्लभ प्रजातियां भी शामिल हैं, जो आमतौर पर बिहार में देखने को नहीं मिलतीं।

चेतन शुक्ला
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चेतन शुक्ला (Chetan Shukla) Print & Broadcast News Agency (PABNA) में 'मुख्य संपादक' हैं। वह पत्रकारिता में 15 वर्ष से ज्यादा का अनुभव रखते हैं। ये मूल रूप से उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं। इन्हें राजनीति और आम आदमी से जुड़ी खबरें लिखना पसंद है।

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