एक बार बाग में लगी तो सालों पीछा नहीं छोड़ती यह बीमारी, आम उत्पादकों के लिए चेतावनी उत्तर प्रदेश एक घंटा पहले 2
शूट गॉल मेकर आम के पेड़ों की एक जिद्दी बीमारी है जो एक बार फैलने पर अगले साल की फसल को 50 फीसदी तक नुकसान पहुंचा सकती है। जानिए इसके लक्षण और बचाव के आसान तरीके।

आम के बागों से भरपूर पैदावार पाने के लिए सबसे पहली शर्त यही है कि पेड़ों को बीमारियों की चपेट में आने से बचाया जाए। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि कुछ रोग ऐसे होते हैं जो एक बार बाग में जड़ जमा लें तो सालों तक किसानों का पीछा नहीं छोड़ते और हर मौसम में फसल को चपत लगाते रहते हैं।

क्यों खतरनाक है शूट गॉल मेकर

सहारनपुर के कृषि विज्ञान केंद्र के प्रभारी डॉ. आई.के. कुशवाहा के अनुसार, शूट गॉल मेकर आम के पेड़ों के लिए बेहद घातक और जिद्दी बीमारी मानी जाती है। यदि यह एक बार बाग में फैल जाए, तो अगले वर्ष की फसल को 50 फीसदी तक बर्बाद कर सकती है। यही वजह है कि इसे आम उत्पादकों के लिए खतरे की घंटी कहा जाता है।

शुरुआती लक्षण कैसे पहचानें

इस रोग की पहचान शुरुआती दौर में ही कर लेना सबसे जरूरी है। शुरुआत में पेड़ की पत्तियों पर छोटे-छोटे सफेद दानों के रूप में इसके लक्षण उभरने लगते हैं। इन दानों को नजरअंदाज करना भारी पड़ सकता है, क्योंकि समय रहते ध्यान न देने पर बीमारी तेजी से पूरे बाग में पैर पसार लेती है।

बचाव का सबसे सही समय

राहत की बात यह है कि इस बीमारी को जड़ से समाप्त किया जा सकता है, बशर्ते सही समय पर कदम उठाया जाए। विशेषज्ञों के मुताबिक जुलाई और अगस्त का महीना इस रोग को पूरी तरह खत्म करने के लिए सबसे उपयुक्त समय होता है। इसी अवधि में उचित उपाय अपनाकर किसान अपनी आने वाली फसल को बड़े नुकसान से बचा सकते हैं।

चेतन शुक्ला
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चेतन शुक्ला (Chetan Shukla) Print & Broadcast News Agency (PABNA) में 'मुख्य संपादक' हैं। वह पत्रकारिता में 15 वर्ष से ज्यादा का अनुभव रखते हैं। ये मूल रूप से उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं। इन्हें राजनीति और आम आदमी से जुड़ी खबरें लिखना पसंद है।

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