नाम भले 'नकली' हो, स्वाद है बिल्कुल असली! सहारनपुर का यह खास आम बना शुगर मरीजों की पहली पसंद, मंडी में मचा रहा धूम उत्तर प्रदेश एक घंटा पहले 2
सहारनपुर के किसानों ने बरसों पहले 'नकली आम' नाम की एक अनोखी किस्म तैयार की, जिसे अब 'शुगर फ्री आम' के नाम से भी जाना जाता है। मीठे के साथ हल्का खट्टापन लिए यह आम मंडी में सबसे पहले पहुंचता है और बागवानों की कमाई का बड़ा जरिया बन चुका है।

गर्मियों का मौसम शुरू होते ही हर किसी की जुबान पर बस आम का ही नाम चढ़ जाता है। उत्तर प्रदेश का सहारनपुर जिला यूं तो अपनी मैंगो बेल्ट और यहां के मशहूर लंगड़ा, चौसा तथा दशहरी आम के लिए दुनिया भर में पहचाना जाता है, लेकिन कुछ अनोखी किस्में भी इस इलाके को बेहद खास बना देती हैं। इन दिनों यहां के बागवानों की तैयार की हुई एक ऐसी ही किस्म चर्चा में है, जिसका नाम तो 'नकली' है, मगर इसका स्वाद और खूबियां पूरी तरह असली और लाजवाब हैं। सबसे अहम बात यह है कि जो लोग शुगर की वजह से मीठे आम से दूरी बना लेते थे, उनके लिए यह आम किसी तोहफे से कम नहीं।

'शुगर फ्री' आम के नाम से बनी नई पहचान

सहारनपुर के स्थानीय किसानों ने कई साल पहले कड़ी मेहनत के बाद इस खास किस्म को विकसित किया था। इसकी सबसे बड़ी खूबी इसका निराला स्वाद है। यह खाने में मीठा तो होता ही है, साथ ही इसमें हल्का सा खट्टापन भी घुला रहता है। स्वाद के इसी संतुलन की वजह से शुगर यानी डायबिटीज के मरीज भी इसे बड़े चाव से खाते हैं। यही कारण है कि अब लोग और मंडी के व्यापारी इसे शुगर फ्री आम के नाम से पुकारने लगे हैं। बीमारी के डर से सालों तक आम के स्वाद को तरसने वाले लोगों के लिए यह किस्म एक बेहतरीन विकल्प बन गई है।

दशहरी जैसी बनावट, पर रंग गहरा हरा

देखने में यह आम काफी हद तक पारंपरिक दशहरी जैसा ही लगता है, लेकिन ध्यान से देखने पर इसका रंग दशहरी के मुकाबले कहीं ज्यादा गहरा हरा नजर आता है। आकर्षक बनावट और चटकीले रंग की वजह से यह बाजार में दूर से ही लोगों का ध्यान खींच लेता है। स्वाद में बेहतरीन होने के साथ-साथ इसका खूबसूरत लुक भी ग्राहकों को खूब लुभाता है।

मंडी में सबसे पहले दस्तक, दाम भी अच्छे

सहारनपुर के बागवान विक्रम सिंह बताते हैं कि उन्होंने अपने 10 बीघा के बाग में इस नकली आम के करीब 60 से ज्यादा पेड़ लगाए हैं। इस किस्म की एक और बड़ी खासियत यह है कि यह सीजन में बाकी सभी आमों से काफी पहले पककर तैयार हो जाता है। मंडी में सबसे पहले पहुंचने के कारण किसानों को इसके बहुत अच्छे दाम मिल जाते हैं। शुरुआत में बाजार में इसकी कीमत 30 रुपये से लेकर 60 रुपये प्रति किलो तक आसानी से मिल जाती है।

कम लागत में समय से पहले अच्छी बचत देने के चलते सहारनपुर के किसानों में अब इस आम को लगाने का रुझान तेजी से बढ़ रहा है। इसका रकबा भी लगातार बढ़ता जा रहा है और यह अनोखा नकली आम अब सहारनपुर की शान बनता जा रहा है।

चेतन शुक्ला (Chetan Shukla) Print & Broadcast News Agency (PABNA) में 'मुख्य संपादक' हैं। वह पत्रकारिता में 15 वर्ष से ज्यादा का अनुभव रखते हैं। ये मूल रूप से उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं। इन्हें राजनीति और आम आदमी से जुड़ी खबरें लिखना पसंद है।

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