आम है या केला? जमुई के कनिष्क ने उगाया 18 इंच लंबा 'बनाना मैंगो', थाईलैंड में है मशहूर बिहार एक घंटा पहले 2
जमुई के नर्सरी संचालक कनिष्क ने थाईलैंड की प्रसिद्ध नस्ल 'बनाना मैंगो' तैयार की है, जो देखने में केले जैसा दिखता है। इस आम की लंबाई 18 इंच और एक फल का वजन 800 ग्राम तक हो सकता है।

आम का मौसम आते ही लोग तरह-तरह की किस्मों का स्वाद चखने के साथ-साथ बागवानी की ओर भी रुख करते हैं। आमतौर पर खेती में या तो सामान्य नस्ल के आम उगाए जाते हैं या फिर कुछ खास देसी किस्में तैयार की जाती हैं। लेकिन जमुई के कनिष्क ने एक ऐसा आम उगाया है, जिसे देखकर पहली नजर में यह तय करना मुश्किल हो जाता है कि सामने रखा फल आम है या केला।

जमुई जिले के रहने वाले नर्सरी संचालक कनिष्क ने थाईलैंड की नस्ल वाले 'बनाना मैंगो' का उत्पादन किया है। इस आम की सबसे खास बात इसका आकार है — इसकी लंबाई 18 इंच तक पहुंच सकती है और एक फल का वजन 800 ग्राम तक हो सकता है। दिखने में यह हूबहू केले जैसा लगता है और पकने के बाद इसका रंग भी केले की तरह पीला हो जाता है।

तैयार किया इस किस्म का मदर प्लांट

कनिष्क ने इस किस्म का मदर प्लांट भी तैयार किया है, ताकि भविष्य में बड़े पैमाने पर इसका उत्पादन किया जा सके। उन्होंने बताया कि यह आम मूल रूप से थाईलैंड की नस्ल है, मगर भारत में भी कई जगहों पर इसकी खेती होती है। देश में गुजरात और महाराष्ट्र के कुछ इलाकों में इसकी पैदावार ली जाती है।

कनिष्क के मुताबिक बनाना मैंगो का मूल पौधा वह कोलकाता से लेकर आए थे। उन्होंने बताया कि स्वाद और आकार दोनों में यह सामान्य आम से बड़ा होता है, और इसका गूदा अपेक्षाकृत कम रेशेदार होता है।

एक आम की लंबाई 18 इंच तक

कनिष्क का मानना है कि बदलते दौर में किसानों को सिर्फ पारंपरिक किस्मों पर निर्भर रहने के बजाय उच्च मूल्य वाली नई प्रजातियों को भी अपनाना चाहिए। उनके अनुसार बनाना मैंगो जैसी किस्में किसानों को बेहतर बाजार और अधिक आमदनी का रास्ता दे सकती हैं।

उन्होंने बताया कि बनाना मैंगो की सामान्यतः तीन वेराइटी होती हैं। इनमें एक पीले रंग की होती है, जो बिल्कुल केले जैसी दिखती है। इसके अलावा दो और किस्में भी उपलब्ध हैं, जिनमें से उन्होंने लाल रंग वाले बनाना मैंगो का पौधा भी तैयार किया है।

कनिष्क के अनुसार इसका एक फल अधिकतम 18 इंच तक लंबा हो सकता है और एक आम का वजन 800 ग्राम तक पहुंच सकता है। हालांकि सामान्य तौर पर इसके फल 12 इंच तक के होते हैं और इनका वजन 400 से 600 ग्राम के बीच रहता है।

साढ़े चार सौ किस्मों के पौधे मौजूद

कनिष्क ने बताया कि उनके पास इस समय देश-विदेश की करीब साढ़े चार सौ किस्मों के आम के पौधे मौजूद हैं। इनमें कई ऐसी दुर्लभ प्रजातियां भी शामिल हैं, जो आमतौर पर बिहार में देखने को नहीं मिलतीं।

चेतन शुक्ला (Chetan Shukla) Print & Broadcast News Agency (PABNA) में 'मुख्य संपादक' हैं। वह पत्रकारिता में 15 वर्ष से ज्यादा का अनुभव रखते हैं। ये मूल रूप से उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं। इन्हें राजनीति और आम आदमी से जुड़ी खबरें लिखना पसंद है।

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