आम के पेड़ से चाहिए ज्यादा और भारी फल, तो तुड़ाई के बाद अपनाएं यह तरीका भारत एक महीने पहले 20
सहारनपुर के कृषि विशेषज्ञों के अनुसार 10 साल से अधिक उम्र के आम के पेड़ों में जिंक सल्फेट, कॉपर सल्फेट, सुहागा और नीला थोथा को गोबर की खाद के साथ मिलाकर डालने से पोषक तत्वों की कमी दूर होती है। इससे अगले सीजन में बेहतर गुणवत्ता और अधिक संख्या में फल मिलते हैं।

सहारनपुर के किसान आम की अलग-अलग किस्मों की खेती कर देशभर में अपनी खास पहचान बना रहे हैं। मैंगो बेल्ट के नाम से मशहूर इस जिले से दशहरी, लंगड़ा और चौसा जैसे आम न सिर्फ देश में, बल्कि विदेशों तक अपनी मिठास पहुंचाते हैं। यहां के कुछ किसान आम की नई और अनोखी किस्में उगाना भी पसंद करते हैं। इस समय पेड़ों से आम की तुड़ाई के बाद फल बाजार में पहुंचने लगे हैं। ऐसे में अगर किसान अगले साल भी अपने बागों से अच्छी पैदावार चाहते हैं, तो उन्हें कुछ जरूरी पोषक तत्वों का इस्तेमाल करना होगा।

तुड़ाई के बाद क्यों जरूरी है देखभाल

अब सवाल यह उठता है कि किसानों को इन पोषक तत्वों का इस्तेमाल किस महीने में करना चाहिए और कौन-से तत्व पेड़ को स्वस्थ, फल को वजनदार तथा उत्पादन को अधिक बनाते हैं। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि बाजार में कुछ ऐसे पोषक तत्व मिलते हैं, जिनका आम के पेड़ों में प्रयोग बेहद आवश्यक है, वरना अगले वर्ष पेड़ से अच्छी पैदावार लेना मुश्किल हो जाता है।

विशेषज्ञ की राय

कृषि विज्ञान केंद्र के प्रभारी एवं प्रोफेसर डॉ. आई.के. कुशवाहा ने बातचीत में बताया कि तुड़ाई के बाद ज्यादातर किसान कृषि रक्षा रसायनों का उपयोग करते हैं। वहीं कई किसान बेहतर उत्पादन की उम्मीद में केवल डीएपी डालकर ही संतुष्ट हो जाते हैं, जबकि आम के बागों को कई तरह के पोषक तत्वों की जरूरत होती है।

उन्होंने बताया कि ये पोषक तत्व पौधों और फलों को मजबूती देते हैं, उत्पादन बढ़ाते हैं और पेड़ों को स्वस्थ रखते हैं। जब पेड़ स्वस्थ और मजबूत रहेंगे, तो उनसे लगातार अच्छी पैदावार भी मिलती रहेगी।

क्या है सही तरीका

डॉ. कुशवाहा के मुताबिक बेहतर उत्पादन के लिए 10 वर्ष से अधिक उम्र के हर आम के पेड़ में 250 ग्राम नीला थोथा, 250 ग्राम कॉपर सल्फेट, 250 ग्राम सुहागा और 250 ग्राम जिंक सल्फेट को लगभग 30 किलो सड़ी हुई गोबर की खाद में मिलाकर इस्तेमाल करना चाहिए।

इस मिश्रण को पेड़ के तने से आधा मीटर से डेढ़ मीटर की दूरी पर नाली बनाकर डालें और इसके बाद सिंचाई कर दें। खास ध्यान रखें कि इस मिश्रण में फास्फोरस युक्त किसी भी रसायन का प्रयोग नहीं करना है।

अगर किसान इस तरीके को अपनाते हैं, तो आम के बाग में पोषक तत्वों की कमी नहीं रहेगी और अगले सीजन में बेहतर उत्पादन मिलने की संभावना काफी बढ़ जाएगी।

देवेंद्र पांडेय पाबना के राजनीतिक संवाददाता हैं और राष्ट्रीय राजनीति, सरकार तथा नीतियों पर रिपोर्टिंग करते हैं। चुनाव, संसद और बड़े सियासी घटनाक्रमों का वे गहराई से विश्लेषण करते हैं। उनकी रिपोर्टिंग निष्पक्ष और तथ्यों पर आधारित होती है।

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