रात में सोने से पहले हल्दी वाला दूध पीना क्यों है गुणकारी, जानिए विशेषज्ञ की राय स्वास्थ्य 2 घंटे पहले 5
भारतीय घरों में रात के समय हल्दी वाला दूध पीने की परंपरा काफी पुरानी है, जिसे स्वास्थ्य विशेषज्ञ भी बेहद लाभकारी मानते हैं। जाने-माने गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट डॉक्टर शुभम वत्स ने विस्तार से बताया है कि यह मिश्रण शरीर को किस तरह फायदा पहुंचाता है।

नींद की गुणवत्ता में सुधार

हमारे घरों में बड़े-बुजुर्ग अक्सर सोने से पहले हल्दी वाला दूध लेने की सलाह देते हैं और आयुर्वेद में भी इसे स्वास्थ्य के लिए एक अमृत माना गया है। गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट डॉक्टर शुभम वत्स का कहना है कि हल्दी और दूध का मेल नींद न आने की समस्या को दूर करने में बेहद कारगर है। कई बार अधिक तनाव की स्थिति में रात को नींद नहीं आती, ऐसे में हल्दी वाला दूध बहुत उपयोगी साबित होता है। करक्यूमिन और दूध में मौजूद अमीनो एसिड का मेल नींद की गुणवत्ता को बेहतर बनाता है। जब हम गर्म दूध पीते हैं, तो इसमें मौजूद ट्रिप्टोफैन दिमाग में जाकर मेलाटोनिन और सेरोटोनिन के निर्माण को बढ़ावा देता है। मेलाटोनिन शरीर के सोने और जागने के चक्र यानी स्लीप-वेक साइकल को संतुलित रखता है, जिससे तंत्रिका तंत्र शांत होता है और व्यक्ति को गहरी नींद आती है।

तनाव से मिलता है छुटकारा

हल्दी वाला दूध न केवल नींद के लिए अच्छा है, बल्कि यह मानसिक तनाव को भी काफी हद तक कम कर देता है। डॉक्टर शुभम वत्स के अनुसार, हल्दी में पाया जाने वाला करक्यूमिन दिमाग में होने वाले ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस और सूजन को कम करने में सक्षम है। इससे चिंता यानी एंजायटी का स्तर नीचे आता है और मस्तिष्क को शांति मिलती है, जिसका सीधा असर बेहतर नींद के रूप में दिखाई देता है।

शरीर को मिलते हैं ये अद्भुत लाभ

रात के समय हल्दी वाला दूध पीने के कई अन्य महत्वपूर्ण स्वास्थ्य लाभ भी हैं, जिन्हें नजरअंदाज नहीं किया जा सकता:

  • लिवर की सफाई: हल्दी वाला दूध शरीर से विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालने और लिवर को डिटॉक्सीफाई करने में सहायता करता है।
  • पाचन में सुधार: यह मिश्रण पाचन तंत्र को दुरुस्त रखने में मददगार साबित होता है।
  • हड्डियों की मजबूती: हल्दी में मौजूद एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण हड्डियों की अकड़न को दूर करते हैं और मांसपेशियों को मजबूती प्रदान करते हैं।
  • गठिया में राहत: उम्र बढ़ने के साथ होने वाली हड्डियों की समस्याओं और गठिया जैसे रोगों को नियंत्रित करने में भी यह काफी प्रभावी है।

कुल मिलाकर, हल्दी वाला दूध न केवल एक पारंपरिक पेय है, बल्कि यह शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को बनाए रखने के लिए एक वैज्ञानिक रूप से समर्थित विकल्प भी है। इसे अपनी जीवनशैली में शामिल करना स्वास्थ्य के लिए एक बेहतरीन निवेश साबित हो सकता है।

डॉ. आलोक मिश्रा पाबना के स्वास्थ्य संवाददाता हैं और चिकित्सा, बीमारियों तथा वेलनेस से जुड़ी खबरों को प्रामाणिक तरीके से पाठकों तक पहुंचाते हैं। नई रिसर्च, इलाज और रोकथाम पर वे विशेषज्ञों के हवाले से सटीक जानकारी देते हैं। उनका जोर भरोसेमंद और जिम्मेदार स्वास्थ्य पत्रकारिता पर है।

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