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2 घंटे पहले
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ट्रंप प्रशासन के इमीग्रेशन विज्ञापन पर अमेरिका में भारी बवाल
अमेरिका में अवैध प्रवासियों के खिलाफ ट्रंप प्रशासन की ओर से चलाई जा रही मुहिम अब एक बेहद गंभीर और संवेदनशील विवाद में घिर गई है। आम तौर पर अवैध प्रवासन के खिलाफ कड़ा रुख अपनाने वाली रिपब्लिकन सरकार इस बार अपने एक नए विज्ञापन अभियान को लेकर कटघरे में है। अमेरिकी गृह सुरक्षा विभाग (DHS) द्वारा जारी किए गए एक हालिया विज्ञापन में भारतीय मूल के लोगों, विशेषकर सिख समुदाय को निशाना बनाने का आरोप लग रहा है। इस विज्ञापन में 'सिंह' उपनाम का उपयोग किए जाने पर अमेरिका में सक्रिय भारतीय, सिख और हिंदू संगठनों ने अपनी तीव्र आपत्ति दर्ज कराई है। इन संगठनों का कहना है कि सरकार ने जानबूझकर एक पूरे समुदाय को नकारात्मक रूढ़िवादिता और नस्लीय भेदभाव का निशाना बनाया है।
पॉपुलर फिल्म फ्रेंचाइजी की तर्ज पर बना विवादित पोस्टर
विवाद की शुरुआत तब हुई जब अमेरिकी गृह सुरक्षा विभाग (DHS) ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट पर एक डिजिटल पोस्टर साझा किया। इस पोस्टर का डिजाइन मशहूर हॉलीवुड फिल्म फ्रेंचाइजी 'ट्रांसफॉर्मर्स' की शैली पर आधारित है। पोस्टर में फिल्म के मुख्य रोबोटिक किरदार 'ऑप्टिमस प्राइम' को छाती पर गृह सुरक्षा विभाग (DHS) का बैज लगाए हुए दिखाया गया है। उसके ठीक सामने दाढ़ी वाले एक भारतीय मूल के व्यक्ति का चित्र दर्शाया गया है। इस पोस्टर पर बड़े अक्षरों में 'America for Americans' लिखा है। इसके साथ ही सीधे तौर पर 'Mr Singh' को संबोधित करते हुए यह संदेश दिया गया है कि वे अमेरिकी सड़कों से हट जाएं क्योंकि उन्हें वाहन चलाना नहीं आता। इस विज्ञापन के जरिए अमेरिकी सड़कों पर चलने वाले भारतीय मूल के ट्रक ड्राइवरों पर सीधा निशाना साधा गया है।
क्या है 'सेल्फ-डिपोर्ट और फाइंड आउट' मुहिम?
यह विवादित विज्ञापन ट्रंप प्रशासन की एक बड़ी योजना का हिस्सा है, जिसे 'Self-deport or find out' नाम दिया गया है। इस अभियान के तहत अमेरिका में अवैध रूप से रह रहे प्रवासियों को चेतावनी दी जा रही है कि वे स्वेच्छा से देश छोड़कर चले जाएं, अन्यथा उन्हें कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा। गृह सुरक्षा विभाग इसके लिए अपने 'सीबीपी होम' कार्यक्रम का प्रचार-प्रसार भी कर रहा है। विभाग के आधिकारिक दावों के अनुसार, जो अप्रवासी स्वेच्छा से अमेरिका छोड़ने के लिए तैयार होते हैं, उन्हें यात्रा संबंधी सरकारी सहायता प्रदान की जाती है। इसके साथ ही उन्हें वापस जाने के लिए 2600 डॉलर तक की वित्तीय मदद देने का भी प्रावधान किया गया है।
एआई-निर्मित वीडियो ने आग में घी डालने का काम किया
यह मामला उस समय और अधिक गंभीर हो गया जब गृह सुरक्षा विभाग ने 9 सितंबर 2026 को इसी अभियान के तहत आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से तैयार किया गया एक वीडियो जारी किया। सोशल मीडिया पर साझा किए गए इस वीडियो में ट्रांसफॉर्मर्स सीरीज के विलेन किरदार 'मेगाट्रॉन' को कुछ ट्रक ड्राइवरों की रिहाई की मांग करते हुए दिखाया गया है। वीडियो में विशेष रूप से उन ट्रक ड्राइवरों के नाम शामिल किए गए हैं जिन पर अमेरिका में सड़क हादसों या अन्य प्रकार के आपराधिक मामले दर्ज हैं। वीडियो में जिन लोगों के नाम उजागर किए गए हैं, वे इस प्रकार हैं:
- हरजिंदर सिंह
- राजिंदर कुमार
- बेकझान बेइशेकीव
- अखरोर बोजोरोव
- जसवीर सिंह
इस वीडियो के अंत में अमेरिकी सड़कों पर अवैध प्रवासियों की रिपोर्ट करने के लिए एक हेल्पलाइन नंबर 866-347-2423 भी जारी किया गया है। वीडियो के संदेश में लिखा गया है कि यदि कोई इस देश की सुरक्षा को चुनौती देने के इरादे से आता है, तो हम अपनी रक्षा करेंगे और अमेरिकी पहचान को बनाए रखेंगे।
भारतीय और सिख संगठनों में पनपा भारी रोष
इस विज्ञापन और वीडियो में 'सिंह' नाम को बार-बार और बेहद नकारात्मक रूप से प्रदर्शित किए जाने के कारण सिख और भारतीय-अमेरिकी संगठनों में भारी गुस्सा पनप गया है। गौरतलब है कि 'सिंह' सिख समुदाय में एक अत्यंत सम्मानित और व्यापक रूप से इस्तेमाल किया जाने वाला उपनाम है, जिसे कई हिंदू परिवार भी अपनी पहचान के हिस्से के रूप में अपनाते हैं। इसके अतिरिक्त, अमेरिकी ट्रकिंग उद्योग की बात करें तो वहां पंजाबी और सिख ड्राइवरों की बहुत बड़ी और महत्वपूर्ण भागीदारी है। अमेरिकी अर्थव्यवस्था में इस योगदान को दरकिनार करते हुए उन्हें इस रूप में प्रस्तुत करना अपमानजनक माना जा रहा है।
इस पूरे मामले पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए हिंदू अमेरिकन फाउंडेशन ने इस विज्ञापन को पूरी तरह से नस्लवादी करार दिया है। संगठन ने कहा कि यह विज्ञापन भारतीय मूल के नागरिकों को उनकी विशिष्ट पहचान, दाढ़ी और शारीरिक बनावट के आधार पर लक्षित करता है, जो बेहद निंदनीय है। वहीं दूसरी ओर, सिख कोएलिशन ने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि अमेरिका में रहने वाला सिख समुदाय लंबे समय से अपनी धार्मिक पहचान और पगड़ी-दाढ़ी जैसे बाहरी पहनावे के कारण नस्लीय प्रोफाइलिंग और प्रताड़ना का सामना करता रहा है। ऐसे में सरकारी स्तर पर इस तरह के विज्ञापन आना इस भेदभाव को और अधिक हवा देने का काम करेगा।
सोशल मीडिया पर छिड़ी नस्लीय संवेदनशीलता की बहस
इस विज्ञापन अभियान के सामने आने के बाद से सोशल मीडिया पर अमेरिकी गृह सुरक्षा विभाग (DHS) की चौतरफा निंदा हो रही है। इंटरनेट यूजर्स और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने सरकार के इस कदम पर गहरे सवाल उठाए हैं। लोगों का कहना है कि अवैध प्रवासन जैसी गंभीर समस्या से निपटने के लिए सरकारी संदेशों में किसी खास समुदाय के नाम, उनकी जीवनशैली और उनकी पहचान को इस तरह से घसीटना अनुचित है। इस विवाद ने अमेरिका के भीतर चल रही आव्रजन नीति की बहस को तो तेज किया ही है, साथ ही यह भी सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या सरकारी प्रचार अभियानों में नस्लीय संवेदनशीलता और सांस्कृतिक विविधता का कोई सम्मान बचा है या नहीं।
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