भारत
एक घंटा पहले
2
विचारों
दक्षिण दिल्ली के मालवीय नगर इलाके में बुधवार सुबह 'फ्लरिश स्टे बीएंडबी' में लगी भीषण आग ने 21 लोगों की जान ले ली। इस हादसे में कई अन्य लोग घायल हुए हैं, जिनका इलाज अब भी चल रहा है, और मृतकों की संख्या बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। जिस होटल में आग लगी, वह 'बेड एंड ब्रेकफास्ट' (बीएंडबी) योजना के अंतर्गत संचालित हो रहा था। इस घटना के बाद सरकार ने इस पूरी योजना को ही समेटने का निर्णय ले लिया है।
'बेड एंड ब्रेकफास्ट' योजना का मतलब क्या है
इस योजना के तहत दिल्ली के निवासियों को यह विकल्प मिलता है कि वे अपने घर का कोई कमरा यात्रियों को किराए पर दे सकें। इससे लोगों को कम कीमत पर ठीक-ठाक घरों में ठहरने की सुविधा मिल जाती है। हालांकि कोई व्यक्ति अपने मकान को तभी बीएंडबी में तब्दील कर सकता था, जब उसने सरकार से जरूरी अनुमतियां हासिल की हों। इस व्यवस्था में मकान मालिक अपने घर का एक या उससे अधिक कमरा दूसरों को किराए पर देता है।
2007 में शुरू हुई थी योजना
'बेड एंड ब्रेकफास्ट' योजना की शुरुआत साल 2007 में हुई थी। उस दौर में दिल्ली में कांग्रेस की सरकार थी और शीला दीक्षित राज्य की मुख्यमंत्री थीं। लेकिन उस समय यह योजना खास असर नहीं छोड़ पाई और लंबे अरसे तक ठंडे बस्ते में पड़ी रही। अरविंद केजरीवाल की सरकार ने भी इस पर ज्यादा तवज्जो नहीं दी। दिल्ली में रेखा गुप्ता की सरकार बनने के बाद इसे दोबारा पटरी पर लाने की कोशिशें तेज हुईं। आंकड़ों के मुताबिक साल 2023 तक इस योजना के तहत 432 घरों में 2,200 से अधिक कमरे पंजीकृत थे।
आठ दिन पहले आया था नया मसौदा
दिल्ली सरकार ने 26 मई को इसका नया ड्राफ्ट जारी किया था, जिसमें पुरानी नीति में कई फेरबदल किए गए थे। कमरों के आकार, साज-सज्जा, साफ-सफाई, मेहमानों की सुविधाओं और सुरक्षा प्रबंधों के आधार पर गोल्ड और सिल्वर नाम से दो श्रेणियां तय की गई थीं। प्रस्ताव में अधिकतम आठ कमरों और 16 बिस्तरों तक की इजाजत देने की बात कही गई थी।
गोल्ड श्रेणी के लिए कमरों का न्यूनतम आकार 120 वर्ग फुट रखना और बेहतर सुविधाएं देना अनिवार्य था, जबकि सिल्वर श्रेणी में 100 वर्ग फुट के कमरे और बुनियादी सुविधाएं ही पर्याप्त मानी गई थीं। मसौदे में सुरक्षा को खास अहमियत दी गई थी। सभी बीएंडबी इकाइयों के लिए गेस्ट रजिस्टर रखना, पुलिस वेरिफिकेशन कराना और विदेशी मेहमानों से जुड़े नियमों का पालन करना जरूरी बताया गया था। इसके साथ ही आग बुझाने का उपकरण, प्राथमिक उपचार किट और आपात स्थिति के लिए संपर्क सूत्र रखना भी अनिवार्य था। सीसीटीवी कैमरों को सिर्फ प्रवेश द्वार और सामान्य क्षेत्रों तक सीमित रखने का प्रस्ताव था।
नए ड्राफ्ट में ये शर्तें थीं जरूरी
नए मसौदे में कमरों और कॉमन एरिया की नियमित सफाई, कचरे को अलग-अलग करके फेंकना और पर्याप्त खुली हवा सुनिश्चित करना अनिवार्य किया गया था। परिसर में मालिक या केयरटेकर का मौजूद रहना भी जरूरी था। योजना के दायरे में केवल आवासीय संपत्तियों को रखा गया था और इन इकाइयों में रेस्टोरेंट, बार या किसी अन्य व्यावसायिक गतिविधि की अनुमति नहीं थी। इस नीति का मकसद सस्ते और स्थानीय अनुभव वाले ठहराव को बढ़ावा देना तथा निवासियों के लिए अतिरिक्त कमाई के मौके पैदा करना था। मसौदे पर हितधारकों और आम जनता से 30 दिनों के भीतर सुझाव मांगे गए थे, लेकिन अब इसे ही वापस लेने की बात कही जा रही है।
पर्यटन मंत्री ने दी जानकारी
पर्यटन मंत्री कपिल मिश्रा ने कहा, "हम आधिकारिक तौर पर 'बेड एंड ब्रेकफास्ट' योजना को वापस लेने जा रहे हैं और इसके तहत लाइसेंस प्राप्त सभी प्रतिष्ठानों की जांच की जाएगी।"
मंत्री ने आगे कहा, "लाइसेंस की शर्तों का उल्लंघन करने वाले संचालकों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। यदि इस योजना के तहत पंजीकृत कोई भी प्रतिष्ठान छह से अधिक कमरे संचालित करते हुए पाया गया, तो उसका लाइसेंस रद्द कर दिया जाएगा।"
मिश्रा के अनुसार, 'फ्लरिश स्टे' को 2024 में बीएंडबी योजना के अंतर्गत सिल्वर श्रेणी में छह कमरों के लिए लाइसेंस दिया गया था, जिसकी वैधता 2027 तक थी। हालांकि जांचकर्ताओं का कहना है कि यह होटल कथित तौर पर अपनी स्वीकृत क्षमता से लगभग चार गुना अधिक कमरे चला रहा था और उसके पास अनिवार्य अग्निशमन अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) भी नहीं था।
Comments
0 comment