फिरहाद हकीम के इस्तीफे के बाद कोलकाता नगर निगम को नोटिस, बोर्ड भंग न करने का कारण पूछा पश्चिम बंगाल एक घंटा पहले 3
तृणमूल नेता और पूर्व मेयर फिरहाद हकीम के इस्तीफे के बाद पश्चिम बंगाल सरकार ने कोलकाता नगर निगम को कारण बताओ नोटिस भेजकर पूछा है कि उसके बोर्ड को भंग क्यों न किया जाए। निगम को तीन दिनों के भीतर जवाब देने को कहा गया है।

कोलकाता: पश्चिम बंगाल की सियासी सरगर्मी के बीच राज्य सरकार ने कोलकाता नगर निगम से यह बताने को कहा है कि उसके बोर्ड को भंग क्यों न किया जाए। यह कदम ऐसे वक्त उठाया गया है जब तृणमूल कांग्रेस के नेता और पूर्व मेयर फिरहाद हकीम के इस्तीफे के बाद शहर के प्रशासन को लेकर अनिश्चितता गहरा गई है। शहरी विकास और नगरपालिका मामलों के विभाग ने निगम को कारण बताओ नोटिस थमाया है, जो कोलकाता नगर निगम अधिनियम, 1980 के प्रावधानों के अंतर्गत भेजा गया है। नोटिस में निगम से 3 दिनों के भीतर यह स्पष्ट करने को कहा गया है कि उसके विरुद्ध कार्रवाई क्यों न की जाए।

हकीम बोले- सिर्फ कुर्सी पर बैठकर उसका अपमान नहीं करना चाहता

सरकार का तर्क है कि मौजूदा हालात में यह परखना आवश्यक हो गया है कि क्या नगर निगम अब भी अपनी संवैधानिक और कानूनी जिम्मेदारियों को सही ढंग से निभा पाने की स्थिति में है। इस नोटिस की प्रतियां नगर आयुक्त, नगर सचिव समेत अन्य संबंधित अधिकारियों को भी सौंपी गई हैं। गौरतलब है कि यह कार्रवाई पूर्व मेयर फिरहाद हकीम के शुक्रवार को दिए इस्तीफे के 24 घंटे से भी कम समय के भीतर हुई है। हकीम ने इस्तीफे में कहा था कि मौजूदा परिस्थितियों में वे प्रभावी ढंग से काम नहीं कर पा रहे थे और केवल पद पर टिके रहना उनके लिए ठीक नहीं था। उन्होंने कहा था, 'मैं हमेशा सम्मान और अधिकार के साथ काम करता रहा हूं, लेकिन अब यह मुमकिन नहीं रह गया है। मैं सिर्फ कुर्सी पर बैठकर उसे अपमानित नहीं करना चाहता।'

सिर्फ इस्तीफे के आधार पर बोर्ड भंग नहीं किया जा सकता

सरकारी नोटिस में कहा गया है कि अगर नगर निगम अपने कर्तव्यों के निर्वहन में नाकाम रहता है, लगातार जिम्मेदारियां नहीं निभाता या अपने अधिकारों का गलत इस्तेमाल करता है, तो सरकार के पास कार्रवाई करने का अधिकार है। इस सिलसिले में पश्चिम बंगाल नगर निगम अधिनियम की धारा 117 का उल्लेख किया गया है। हालांकि कानूनी जानकारों ने स्पष्ट किया है कि महज मेयर के इस्तीफे के आधार पर बोर्ड को भंग नहीं किया जा सकता। वरिष्ठ अधिवक्ता एवं कोलकाता के पूर्व मेयर बिकाश रंजन भट्टाचार्य ने कहा कि सरकार निगम से उसकी कार्यप्रणाली पर जवाब-तलब कर सकती है, लेकिन सिर्फ इस्तीफे के कारण निर्वाचित बोर्ड को भंग करने का अधिकार सीमित है।

नागरिकों को आवश्यक सेवाएं देना हो प्राथमिकता

दूसरी ओर, तृणमूल कांग्रेस के पूर्व नगरपालिका बोर्ड अध्यक्ष सच्चिदानंद बंद्योपाध्याय ने कहा कि इससे पहले भी ऐसे हालात में प्रशासनिक व्यवस्था को कायम रखने के लिए प्रशासक नियुक्त किए जाते रहे हैं। उनके मुताबिक सबसे बड़ी प्राथमिकता यह होनी चाहिए कि नागरिकों को जरूरी सेवाएं निरंतर मिलती रहें। कानून के अनुसार, यदि नगर निगम भंग होता है तो मेयर, पार्षद और मेयर-इन-काउंसिल के सभी पद अपने आप समाप्त हो जाएंगे और प्रशासन की बागडोर राज्य सरकार द्वारा नियुक्त प्रशासकों के हाथों में चली जाएगी।

ममता बनर्जी के करीबी नेताओं में शुमार हैं हकीम

फिरहाद हकीम का इस्तीफा टीएमसी के लिए राजनीतिक दृष्टि से भी अहम माना जा रहा है। वे पार्टी के प्रमुख मुस्लिम चेहरों में से एक और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के लंबे समय से सहयोगी रहे हैं। उनके इस्तीफे को पार्टी के भीतर जारी उथल-पुथल का संकेत माना जा रहा है। पार्टी और प्रशासनिक सूत्रों के मुताबिक हाल के दिनों में नगर निकायों में अस्थिरता बढ़ी है और कई पार्षद या तो इस्तीफा दे चुके हैं या सक्रिय भूमिका से दूरी बना चुके हैं। बताया जा रहा है कि राज्य भर में करीब 100 टीएमसी पार्षद या तो इस्तीफा दे चुके हैं या सक्रिय राजनीति से पीछे हट गए हैं।

चेतन शुक्ला (Chetan Shukla) Print & Broadcast News Agency (PABNA) में 'मुख्य संपादक' हैं। वह पत्रकारिता में 15 वर्ष से ज्यादा का अनुभव रखते हैं। ये मूल रूप से उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं। इन्हें राजनीति और आम आदमी से जुड़ी खबरें लिखना पसंद है।

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