60 की उम्र से पहले दिल का दौरा पड़ने का है डर, तो डॉक्टर की इन 10 बातों का रखें खास ख्याल स्वास्थ्य एक महीने पहले 81
दुनिया भर में दिल की बीमारियों और युवाओं में हार्ट अटैक के बढ़ते मामलों को देखते हुए हृदय रोग विशेषज्ञों ने स्वस्थ जीवनशैली के लिए 10 महत्वपूर्ण सुझाव दिए हैं।

दिल को सुरक्षित रखने के अचूक उपाय

वर्तमान समय में पूरी दुनिया में हृदय रोगों का प्रकोप तेजी से बढ़ रहा है और हार्ट अटैक मौतों की सबसे बड़ी वजह बनकर उभरा है। चिंता की बात यह है कि कम उम्र के युवाओं में भी दिल का दौरा पड़ने की घटनाएं लगातार देखी जा रही हैं। यदि आप अपनी सेहत के प्रति सजग हैं और 60 साल की उम्र तक दिल की गंभीर बीमारियों से सुरक्षित रहना चाहते हैं, तो चिकित्सा विशेषज्ञों द्वारा बताए गए 10 नियमों का पालन करना अनिवार्य है। इन आदतों को अपनाकर आप भविष्य में आने वाले हृदय संबंधी खतरों को काफी हद तक कम कर सकते हैं।

हृदय रोग विशेषज्ञ का मार्गदर्शन

हार्ट स्पेशलिस्ट डॉक्टर इवान लेविन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम के जरिए उन 10 प्रभावी उपायों को साझा किया है, जो 60 साल की उम्र से पहले हार्ट अटैक की संभावना को कम करने में सहायक साबित हो सकते हैं। उनके सुझावों का विवरण नीचे दिया गया है।

हार्ट अटैक से बचाव के 10 सूत्र

  • धूम्रपान और नशीले पदार्थों से परहेज: डॉक्टर इवान का स्पष्ट कहना है कि धूम्रपान हृदय रोगों के सबसे बड़े जोखिम कारकों में से एक है। यदि आप दिल को मजबूत और स्वस्थ रखना चाहते हैं, तो धूम्रपान से पूरी तरह दूरी बना लें। इसके अलावा कोकीन जैसे नशीले पदार्थों का सेवन करना रक्त वाहिकाओं को गंभीर नुकसान पहुंचाता है और रक्तचाप को अनियंत्रित कर देता है। ये कारक सीधे तौर पर हार्ट अटैक और स्ट्रोक के खतरे को आमंत्रित करते हैं।
  • मीठे पेय और फास्ट फूड से दूरी: अत्यधिक चीनी वाले सोडा या अन्य मीठे ड्रिंक्स से बचना चाहिए। जंक फूड और फास्ट फूड के सेवन पर रोक लगाएं। प्रोसेस्ड फूड, अस्वास्थ्यकर फैट और नमक की अधिकता शरीर में मोटापा और डायबिटीज बढ़ाती है, जो अंततः हृदय रोगों की जड़ बनती है।
  • नियमित व्यायाम को बनाएं दिनचर्या: हृदय को सक्रिय और स्वस्थ रखने के लिए शारीरिक गतिविधियां बेहद जरूरी हैं। रोजाना कम से कम 30 मिनट का व्यायाम करने से हृदय रोगों की आशंका घटती है। अपनी दिनचर्या में कार्डियोवस्कुलर और रेजिस्टेंस एक्सरसाइज शामिल करें। इससे ब्लड प्रेशर नियंत्रित रहता है, वजन घटता है और दिल की मांसपेशियां अधिक मजबूत बनती हैं।
  • कोरोनरी आर्टरी कैल्शियम स्कैन का महत्व: कोरोनरी आर्टरी कैल्शियम (सीएसी) स्कैन एक ऐसा महत्वपूर्ण टेस्ट है, जो दिल तक रक्त पहुंचाने वाली धमनियों में जमे कैल्शियम का पता लगाता है। 40 साल से कम उम्र के वे लोग जिनका कोलेस्ट्रॉल स्तर अधिक है या जिनमें हृदय रोग की पारिवारिक पृष्ठभूमि है, उन्हें इस जांच के बारे में डॉक्टर से विस्तार से चर्चा करनी चाहिए।
  • तनाव का सही प्रबंधन: लंबे समय तक बना रहने वाला मानसिक तनाव दिल पर गहरा बुरा असर डालता है। कार्यस्थल या व्यक्तिगत जीवन से जुड़ी समस्याओं का समाधान ढूंढें। तनाव को पूरी तरह खत्म करना संभव नहीं है, लेकिन ध्यान, योग और अपने शौक को समय देकर मानसिक और शारीरिक शांति प्राप्त की जा सकती है।
  • बीपी और डायबिटीज पर नियंत्रण: हाई ब्लड प्रेशर और डायबिटीज जैसी स्थितियों को कभी भी नजरअंदाज न करें। ये दोनों बीमारियां हृदय के लिए घातक हो सकती हैं, इसलिए इन्हें दवाओं और जीवनशैली के माध्यम से हमेशा नियंत्रित दायरे में रखें।
  • वजन कम करना: मोटापे, विशेषकर पेट के आसपास जमा चर्बी को कम करना बहुत आवश्यक है। पेट की अतिरिक्त चर्बी मेटाबोलिक सिंड्रोम का संकेत हो सकती है, जिससे हाई ब्लड प्रेशर, हाई ट्राइग्लिसराइड्स और फैटी लिवर की समस्या पैदा होती है और हृदय का जोखिम बढ़ जाता है।
  • शराब के सेवन से बचें: हृदय स्वास्थ्य के लिए शराब से दूरी बनाना सबसे बेहतर है। यदि पूरी तरह बंद करना संभव न हो, तो इसके सेवन को न्यूनतम स्तर तक सीमित कर दें क्योंकि अत्यधिक मदिरापान हृदय की कार्यक्षमता को बिगाड़ता है।
  • नियमित मेडिकल स्क्रीनिंग: बहुत से लोग यह गलतफहमी पाल लेते हैं कि हार्ट अटैक अचानक आता है, जबकि सच यह है कि हृदय रोग कई वर्षों तक धीरे-धीरे विकसित होते हैं। सही समय पर जांच और स्वस्थ आदतों को अपनाकर इन्हें रोका जा सकता है।
  • विशेषज्ञ डॉक्टर की सलाह: दिल की सेहत से खिलवाड़ न करें। हमेशा किसी अनुभवी हार्ट स्पेशलिस्ट से परामर्श लें और अपनी स्थिति के अनुसार व्यक्तिगत सलाह का पालन करें। किसी भी सामान्य डॉक्टर की सलाह हृदय रोगों के जटिल मामलों में पर्याप्त नहीं होती।
डॉ. आलोक मिश्रा पाबना के स्वास्थ्य संवाददाता हैं और चिकित्सा, बीमारियों तथा वेलनेस से जुड़ी खबरों को प्रामाणिक तरीके से पाठकों तक पहुंचाते हैं। नई रिसर्च, इलाज और रोकथाम पर वे विशेषज्ञों के हवाले से सटीक जानकारी देते हैं। उनका जोर भरोसेमंद और जिम्मेदार स्वास्थ्य पत्रकारिता पर है।

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