सऊदी अरब की सुरक्षा के लिए पाकिस्तान का बड़ा दावा, लेकिन हूती विद्रोहियों पर चुप्पी क्यों? विश्व एक घंटा पहले 8
पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने सऊदी अरब की सुरक्षा को लेकर प्रतिबद्धता जताई है, लेकिन यमन के हूती विद्रोहियों के खिलाफ कार्रवाई पर वे सीधे जवाब देने से बचते नजर आए।

सऊदी अरब की सुरक्षा पर पाकिस्तान का रुख

यमन में हूती विद्रोहियों और सऊदी अरब के बीच लंबे समय से जारी संघर्ष के दौरान पाकिस्तान की भूमिका पर हमेशा से सवाल उठते रहे हैं। अब एक बार फिर पाकिस्तान ने सऊदी अरब की सुरक्षा को लेकर अपनी प्रतिबद्धता दोहराई है। पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने स्पष्ट किया है कि यदि सऊदी अरब को किसी भी प्रकार का खतरा उत्पन्न होता है, तो पाकिस्तान अपनी सैन्य क्षमताओं के माध्यम से उसकी रक्षा के लिए तैयार है। हालांकि, यह बयान एक बार फिर उन अटकलों को हवा दे रहा है कि पाकिस्तान जमीन पर सऊदी का कितना साथ देगा।

रोम में पत्रकारों के सामने असहज हुए रक्षा मंत्री

यह घटनाक्रम तब सामने आया जब रोम में पत्रकारों ने ख्वाजा आसिफ से सीधे सवाल किया। उनसे पूछा गया कि क्या पाकिस्तान ने यमन में हूती ठिकानों को निशाना बनाने वाले हवाई हमलों में कोई सक्रिय भूमिका निभाई है। इस तीखे सवाल को सुनते ही ख्वाजा आसिफ ने स्थिति को संभालने की कोशिश की और स्पष्ट उत्तर देने के बजाय बातों को घुमा दिया। उन्होंने हूती विद्रोहियों का नाम लेने से भी परहेज किया और किसी भी प्रकार की सीधी सैन्य भागीदारी की पुष्टि नहीं की।

मक्का पैक्ट और वादों का सच

पाकिस्तान और सऊदी अरब के बीच हुए मक्का पैक्ट के तहत यह अपेक्षा की जाती रही है कि जरूरत पड़ने पर पाकिस्तान सऊदी की ओर से युद्ध में शामिल होगा। ख्वाजा आसिफ ने हालांकि इस समझौते का हवाला देते हुए कहा कि पाकिस्तान के पास जो भी सैन्य साधन और संसाधन उपलब्ध हैं, उनका उपयोग सऊदी अरब के समर्थन में किया जा सकता है। उन्होंने जोर दिया कि सऊदी अरब की संप्रभुता और सुरक्षा पाकिस्तान के लिए महत्वपूर्ण है।

संदेह के घेरे में पाकिस्तान की नीयत

रक्षा मंत्री का यह बयान ऐसे समय में आया है जब पूरी दुनिया देख रही है कि पाकिस्तान इस मुद्दे पर केवल जुबानी जमा-खर्च कर रहा है या वास्तव में जमीनी स्तर पर कोई ठोस कार्रवाई करने की योजना रखता है। विश्लेषकों का मानना है कि हूतियों के मुद्दे पर पाकिस्तान की यह चुप्पी उसकी कूटनीतिक मजबूरियों को दर्शाती है। यद्यपि पाकिस्तान सऊदी अरब के साथ अपनी दोस्ती और रक्षा संबंधों को सर्वोच्च प्राथमिकता देने का दावा करता है, लेकिन हूती विद्रोहियों को लेकर उसकी हिचकिचाहट ने कई बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। अब देखना यह है कि क्या भविष्य में पाकिस्तान केवल बयानों तक सीमित रहेगा या सऊदी की मदद के लिए वास्तव में कदम उठाएगा।

साहिल चौहान पाबना के वर्ल्ड अफेयर्स रिपोर्टर हैं, जो अंतरराष्ट्रीय खबरें और वैश्विक मामले कवर करते हैं। विदेश नीति, कूटनीति और दुनिया भर के घटनाक्रमों पर उनकी अच्छी पकड़ है। वे जटिल वैश्विक मुद्दों को भारतीय नजरिए से समझाते हैं।

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