वैभव सूर्यवंशी फिर सुर्खियों में: इस बार थर्ड अंपायर के फैसले पर बवाल, आउट या नॉट आउट? क्रिकेट 4 दिन पहले 19
अफगानिस्तान ए के खिलाफ शून्य पर लिए गए कैच को थर्ड अंपायर ने नॉट आउट करार दिया, जिससे विरोधी खिलाड़ी और सोशल मीडिया दोनों बंट गए। 15 साल के भारतीय ओपनर को जीवनदान मिलने के बाद उन्होंने 28 गेंद पर 38 रन बनाए।

वैभव सूर्यवंशी इन दिनों जिस भी मुकाबले में मैदान पर उतरते हैं, हर किसी की निगाहें उन्हीं पर टिकी रहती हैं। दिलचस्प बात यह है कि अब उनके नाम के साथ विवाद भी जुड़ने लगे हैं। पिछले मैच में श्रीलंका के खिलाड़ियों से उनकी कहासुनी हुई थी और अब अफगानिस्तान के खिलाफ थर्ड अंपायर के फैसले पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

नॉट आउट के फैसले पर खड़ा हुआ विवाद

ट्राई सीरीज की शुरुआत से पहले वैभव सूर्यवंशी को लेकर खूब चर्चा हुई थी और अब जब यह सीरीज समाप्ति की ओर है, तब भी वे एक बार फिर सुर्खियों में हैं। श्रीलंका ए के खिलाफ हुई झड़प के बाद 15 साल के इस भारतीय ओपनर को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। बुधवार को अफगानिस्तान ए के खिलाफ खेलते हुए जब उन्हें शून्य के स्कोर पर आउट नहीं दिया गया, तो इस फैसले पर बखेड़ा खड़ा हो गया।

अफगानिस्तान ए के विरुद्ध पांचवें मुकाबले में सूर्यवंशी को शून्य पर नॉट आउट करार देने वाला थर्ड अंपायर का निर्णय विवादों के घेरे में आ गया। इस सीरीज में 15 साल के इस खिलाड़ी का प्रदर्शन अब तक खास नहीं रहा है। दूसरी ही गेंद पर बिना खाता खोले उन्हें पवेलियन लौटना पड़ सकता था, लेकिन थर्ड अंपायर के फैसले ने उन्हें बचा लिया।

एक हाथ से लिया गया कैच बना वजह

अफगानिस्तान ए के फरीदून दावूदजई ने शम्स उर रहमान की गेंद पर प्वाइंट पर सूर्यवंशी का कैच लपका। एक हाथ से लपका गया यह कैच ही विवाद की जड़ बन गया। रियल टाइम में देखने पर ऐसा लग रहा था कि कैच सही तरीके से पूरा किया गया है।

जब मामला थर्ड अंपायर तक पहुंचा, तो उन्होंने इस कैच के फुटेज को बार-बार देखा। अलग-अलग एंगल से जांच करने के बाद उन्होंने फैसला सुनाया कि कैच पूरा करते समय गेंद का कुछ हिस्सा जमीन को छू गया था। थर्ड अंपायर के इसी निर्णय ने सूर्यवंशी को जीवनदान दे दिया। इसके बाद बल्लेबाजी करते हुए उन्होंने 28 गेंद पर 38 रन की पारी खेली।

मैदान पर अफगान खिलाड़ियों ने जताया विरोध

जैसे ही थर्ड अंपायर ने सूर्यवंशी को नॉट आउट करार दिया और ग्रीन लाइट जली, मैदान पर अफगानिस्तान ए के खिलाड़ियों ने फील्ड अंपायर को घेर लिया। उनका कहना था कि जिस वक्त कैच लिया गया, उस समय गेंद हाथ में आ चुकी थी। कुछ देर बहस करने के बाद खिलाड़ियों को अपनी जगह पर लौटना पड़ा, क्योंकि थर्ड अंपायर का फैसला ही अंतिम माना जाता है।

सोशल मीडिया पर बंट गए फैंस

इस फैसले के बाद सोशल मीडिया पर बहस छिड़ गई और फैंस इस सवाल पर बंट गए कि क्या युवा बल्लेबाज किस्मत के सहारे बच गए। एक यूजर ने लिखा, “ये कैच फेयर क्यों नहीं है? जितना क्लीन कैच हो सकता है, उतना ही था। सूर्यवंशी यहां किस्मत वाले हैं।” एक अन्य ने कहा, “मुझे लगता है कि वो आउट था, लेकिन सूर्यवंशी को एक जीवनदान मिला, अब इसे बड़ा बनाओ।”

एक और प्रशंसक ने पोस्ट किया, “वाकई किस्मत से बच गए। गेंद के ग्रास्ड होने का सबूत बहुत धुंधला और अस्पष्ट था।” वहीं कुछ लोगों का मानना था कि थर्ड अंपायर ने उपलब्ध सबूतों के आधार पर ही निर्णय लिया और बल्लेबाज को संदेह का लाभ मिल गया।

चेतन शुक्ला
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चेतन शुक्ला (Chetan Shukla) Print & Broadcast News Agency (PABNA) में 'मुख्य संपादक' हैं। वह पत्रकारिता में 15 वर्ष से ज्यादा का अनुभव रखते हैं। ये मूल रूप से उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं। इन्हें राजनीति और आम आदमी से जुड़ी खबरें लिखना पसंद है।

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