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एक घंटा पहले
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देश में करोड़ों लोग भविष्य निधि यानी पीएफ खाते का इस्तेमाल करते हैं, लेकिन उनमें से ज्यादातर को यह नहीं पता होता कि पेंशन हासिल करने के लिए एक खास दस्तावेज की भी जरूरत पड़ती है। इस दस्तावेज को स्कीम सर्टिफिकेट कहा जाता है, जो कर्मचारी भविष्य निधि संगठन की ओर से जारी किया जाता है। अगर आप ईपीएफ के तहत पेंशन का लाभ लेना चाहते हैं तो यह सर्टिफिकेट आपके लिए बेहद उपयोगी साबित होता है।
संगठन के आंकड़ों पर नजर डालें तो देश में करीब 7 करोड़ से भी ज्यादा पीएफ खाताधारक मौजूद हैं। पीएफ खाता मुख्य रूप से रिटायरमेंट के बाद पेंशन और बुढ़ापे की जरूरतों को ध्यान में रखकर खोला जाता है, जिसमें आज किया गया योगदान आगे चलकर पेंशन के रूप में वापस मिलता है। ईपीएफ एक्ट 1952 के तहत सैलरीड कर्मचारियों को रिटायरमेंट के बाद पेंशन का फायदा दिलाने के मकसद से ही यह स्कीम सर्टिफिकेट दिया जाता है।
स्कीम सर्टिफिकेट क्या है
स्कीम सर्टिफिकेट उन कर्मचारियों के लिए जारी किया जाता है, जो अपना ईपीएफ अंशदान निकाल लेने के बाद भी रिटायरमेंट की उम्र के बाद पेंशन का लाभ पाना चाहते हैं। जिन कर्मचारियों ने 10 साल की सर्विस पूरी कर ली है और जिनकी उम्र अभी 58 साल तक नहीं पहुंची है, उन्हें ईपीएफओ की ओर से यह सर्टिफिकेट दिया जाता है।
ऐसे कर्मचारियों के लिए स्कीम सर्टिफिकेट हासिल करना जरूरी माना जाता है। वहीं जिन कर्मचारियों की सर्विस 10 साल पूरी नहीं हुई है, उनके लिए यह सर्टिफिकेट लेना अनिवार्य नहीं है, हालांकि चाहें तो वे भी इसे ईपीएफओ से प्राप्त कर सकते हैं।
इस सर्टिफिकेट के फायदे
नौकरी बदलने की स्थिति में स्कीम सर्टिफिकेट के जरिये आप अपना पेंशन अकाउंट आसानी से ट्रांसफर करा सकते हैं। यह सर्टिफिकेट इस बात का प्रमाण होता है कि आपके पेंशन का पैसा नई कंपनी के साथ खोले गए पीएफ खाते में स्थानांतरित कर दिया जाएगा, जिससे आपके पेंशन लाभ में बढ़ोतरी होती है।
इसके अलावा अगर किसी पीएफ खाताधारक की मृत्यु हो जाती है तो स्कीम सर्टिफिकेट की मदद से उनका परिवार पेंशन का दावा कर सकता है। वैसे तो 8 साल की सर्विस पूरी करने वाला कर्मचारी भी अपने पीएफ खाते से पैसे निकाल सकता है, लेकिन बेहतर यही रहता है कि 10 साल की सर्विस पूरी की जाए, ताकि ईपीएस 1995 के तहत रिटायरमेंट के बाद पेंशन का फायदा मिल सके।
ईपीएफ स्कीम के लाभ
ईपीएफ में जमा रकम पर इस समय सालाना 8.25 फीसदी की दर से ब्याज मिल रहा है। इस खाते में कर्मचारी की बेसिक सैलरी का 12 फीसदी और उतनी ही राशि कंपनी की ओर से भी जमा की जाती है। अगर आपकी बेसिक और डीए 15 हजार तक है तो उस पर 12 फीसदी अंशदान किया जा सकता है। वालंटरी प्रोविडेंट फंड यानी वीपीएफ के जरिये इस निवेश को दोगुना तक बढ़ाया जा सकता है।
टैक्स के मोर्चे पर भी इस खाते में कई राहतें मिलती हैं। ईपीएफ खाते में सालाना 1.5 लाख रुपये तक के निवेश पर सेक्शन 80सी के तहत टैक्स छूट मिलती है। इसके साथ ही कर्मचारी की ओर से पीएफ खाते में जमा रकम पर मिलने वाला 2.5 लाख रुपये तक का ब्याज टैक्स फ्री रहता है, जबकि नियोक्ता की ओर से मिलने वाला पूरा ब्याज टैक्स के दायरे से बाहर रखा जाता है।
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