देहरादून में लटकते तारों का जाल बना मौत का फंदा, व्यापारियों की जान पर हर वक्त मंडराता है खतरा उत्तराखंड एक महीने पहले 24
उत्तराखंड की राजधानी देहरादून के बाजारों में बिजली के जर्जर और बेतरतीब तारों का अंबार किसी बड़े हादसे को न्योता दे रहा है। पलटन बाजार में हाल ही में लगी भीषण आग के बाद स्थानीय दुकानदारों ने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं।

शहर में बढ़ता आग का खतरा

राजधानी देहरादून में जैसे-जैसे गर्मी का पारा बढ़ रहा है, शहर में आगजनी की घटनाएं भी बढ़ती जा रही हैं। इन हादसों के पीछे सबसे बड़ा कारण बिजली के तारों का जर्जर और अव्यवस्थित होना है। शहर के व्यस्ततम पलटन बाजार की एक दुकान में हाल ही में लगी आग ने इस खतरे को फिर से उजागर कर दिया है। शहर के रिहायशी इलाकों से लेकर व्यावसायिक बाजारों तक, बिजली के तारों का मकड़जाल किसी भी वक्त बड़ी तबाही का कारण बन सकता है।

व्यापारियों की आपबीती

पलटन बाजार के कपड़ा व्यापारी जतिन डोरा ने बताया कि सरनिमल बाजार स्थित एक शोरूम में शॉर्ट सर्किट की वजह से भीषण आग लग गई थी। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि गर्मी के मौसम में शॉर्ट सर्किट का खतरा हमेशा बना रहता है। दुकानदारों का आरोप है कि वे कई वर्षों से इन खतरनाक तारों को हटाने की मांग कर रहे हैं, लेकिन उनकी सुध लेने वाला कोई नहीं है। उन्होंने कहा कि किसी वीआईपी के आने पर रातों-रात सौंदर्यीकरण हो जाता है, लेकिन व्यापारियों की सुरक्षा के प्रति प्रशासनिक लापरवाही जारी है।

अवैध तारों का अंबार

दुकानदारों के अनुसार, दुकानों के बाहर लगे खंभों पर सैकड़ों तार लटके हुए हैं। जब भी वे इन तारों के संबंध में आपत्ति जताते हैं, तो वाई-फाई कंपनियां यह कहकर पल्ला झाड़ लेती हैं कि उन्होंने इसके लिए भुगतान किया है। बाजार की गलियां इतनी संकरी हैं कि यदि यहां कोई बड़ी अनहोनी होती है, तो दमकल विभाग की गाड़ियों का पहुंचना भी मुश्किल हो जाएगा।

प्रशासन का रुख

इस गंभीर समस्या पर देहरादून के मेयर सौरभ थपलियाल ने प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि संबंधित अधिकारियों को निर्देश जारी कर दिए गए हैं कि लटके हुए तारों को व्यवस्थित कर बंच के रूप में बांधा जाए। मेयर के अनुसार, भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए ठोस कदम उठाए जाएंगे ताकि सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित की जा सके।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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